ना पोस्टर, ना प्रचार... बंगाल फतह का सबसे बड़ा ‘मास्टरमाइंड’ निकला ये RSS प्रचारक! जिसने बदल दिया पूरा सियासी खेल
Mastermind Of Bengal Election 2026: बंगाल में भाजपा की बढ़ती ताकत सिर्फ चुनावी नारों का परिणाम नहीं, बल्कि गांव-गांव तक फैले उस नेटवर्क का नतीजा है जिसे रामचंद्र पांडेय जैसे प्रचारकों ने बहुत ही 'खामोशी' से स्थापित किया।
Mastermind Of Bengal Election 2026
Mastermind Of Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में भाजपा ने अपनी सबसे बड़ी चुनौती पार कर ली है। पहली बार राज्य में अपनी प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज करने के बाद अब हर किसी के मन में एक सवाल सबसे ज्यादा उठ रहा है - इस ऐतिहासिक 'जीत' के पीछे सबसे ज्यादा योगदान किन लोगों का है? इसी बीच अब एक ऐसा नाम तेजी से चर्चा में आ गया है जो आपको कभी पोस्टर, मंच और कैमरों में नहीं दिखा होगा। हम बात कर रहे हैं RSS के उस ‘गुमनाम रणनीतिकार’ रामचंद्र पांडेय की, जिन्होंने सालों तक पर्दे के पीछे रहकर ही बंगाल की राजनीति में 'वैचारिक' और 'संगठनात्मक' रूप से ज़मीनी तैयारी की।
जी हां... ऐसा कहा जाता है कि बंगाल में भाजपा की बढ़ती ताकत सिर्फ चुनावी नारों का परिणाम नहीं, बल्कि गांव-गांव तक फैले उस नेटवर्क का नतीजा है जिसे रामचंद्र पांडेय जैसे प्रचारकों ने बहुत ही 'खामोशी' से स्थापित किया।
पांडेय ने इस तरह जुटाई ज़मीनी ताकत
संघ और BJP के अंदरूनी जानकारी के अनुसार, बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जड़ों को मजबूत करने, असंतुष्ट नेताओं को जोड़ने और बंगाली भद्रलोक के बीच संघ के प्रति विश्वास पैदा करने में रामचंद्र पांडेय की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही है। हालांकि सार्वजनिक मंचों पर उनका नाम कम ही सुनाई देता है, लेकिन संगठन के अंदर उन्हें रणनीतिकार और जमीनी नेटवर्क तैयार करने वाले प्रचारक के रूप में देखा जाता है।
प्रणब मुखर्जी को नागपुर ले जाने के पीछे भी थी भूमिका
साल 2018 में देश के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी का RSS मुख्यालय नागपुर जाना राष्ट्रीय राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक था। कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े रहे प्रणब मुखर्जी का संघ के कार्यक्रम में शामिल होना राजनीतिक गलियारों में बड़े संदेश के तौर पर देखा गया।
ऐसा दावा भी किया गया है कि प्रणब मुखर्जी को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तैयार करने के पीछे रामचंद्र पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्होंने प्रणब मुखर्जी के करीबी संपर्कों के माध्यम से संवाद स्थापित किया और इस मुलाकात को संभव बनाया। इस घटना के बाद बंगाल के शिक्षित और प्रभावशाली वर्ग के बीच RSS और BJP के प्रति धारणा में परिवर्तन देखने को मिला।
2016 के बाद बंगाल में संभाली संगठन की कमान
साल 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद संघ ने रामचंद्र पांडेय को कोलकाता केंद्र बनाकर राज्य में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी। इसके बाद उन्होंने सिलिगुड़ी, आसनसोल, बर्दवान, मुर्शिदाबाद, मालदा और कोलकाता समेत कई क्षेत्रों में लगातार प्रवास किया।
जानकारी के मुताबिक, उन्होंने ऐसे लोगों से संपर्क साधा जो कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों से नाराज थे। बीजेपी और संघ से सहानुभूति रखने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय किया गया। यही वह दौर था जब BJP ने बंगाल में तेजी से अपना जनाधार बढ़ाना शुरू किया।
सुवेंदु अधिकारी जैसे नेताओं से बनाए संपर्क
इसे लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस के कई प्रभावशाली नेताओं से संवाद स्थापित करने में भी रामचंद्र पांडेय की भूमिका रही। इनमें सबसे चर्चित नाम वर्तमान नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी का माना जाता है। संघ के संपर्क अभियान के माध्यम से कई ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को BJP के करीब लाने का पूरा प्रयास किया गया, जो राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से असंतुष्ट थे। संगठन के अंदर ऐसा माना जाता है कि यह रणनीति भाजपा के लिए लंबे वक़्त में फायदेमंद साबित हुई।
राजनाथ सिंह को संगठन में सक्रिय करने का श्रेय
रामचंद्र पांडेय का प्रभाव सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहा। ऐसा भी कहा जाता है कि मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को संगठनात्मक ढांचे में सक्रिय भूमिका दिलाने में भी उनका योगदान रहा। मिर्जापुर में उन्हें RSS का जिला कार्यवाह बनाने में रामचंद्र पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है।
सादगी भरा जीवन, लेकिन संगठन में बड़ी पहचान
लगभग 5 दशक से संघ के प्रचारक जीवन में सक्रिय रामचंद्र पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से आते हैं। साल 1967 में उन्होंने अपना घर छोड़कर संघ के लिए पूर्णकालिक जीवन समर्पित कर दिया था। संघ के अंदर उनकी पहचान बहुत ही सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले प्रचारक के रूप में होती है। वे आज भी एक बहुत साधारण जीवन शैली जीते हैं और लगातार प्रवास करते रहते हैं। बता दे पूर्वी उत्तर प्रदेश, अवध, काशी और बुंदेलखंड क्षेत्र में हजारों कार्यकर्ताओं को तैयार करने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
पर्दे के पीछे रहकर तैयार की ‘बदलाव की बयार’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का उभार सिर्फ चुनावी रणनीति का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई सालों तक चला संगठनात्मक और वैचारिक अभियान भी था। रामचंद्र पांडेय जैसे प्रचारकों ने गांव-गांव और गली-कूचों तक पहुंचकर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार बनाया।
देखा जाये तो... आज यही सबसे बड़ा कारण है कि BJP ने बंगाल में एक मजबूत विपक्ष के रूप में अपनी पहचान तो बनाई ही... और अब राज्य में नई चुनौती के साथ भाजपा का परचम लहराने जा रहा है। इन सब का श्रेय रामचंद्र पांडेय को जाता है जो भले ही सार्वजनिक मंचों से दूर रहते हों, लेकिन संगठन के अंदर उन्हें बंगाल में भाजपा के विस्तार में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।