SIR की वजह से जीत गई कांग्रेस... थरूर की जुबान फिसली या भाजपा को 'शुक्रिया'
Shashi Tharoor: अब कांग्रेस के लिए दिक्कत यह है कि जिस प्रक्रिया को विपक्ष लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा था, उसी को थरूर केरल में कांग्रेस का सफाई अभियान घोषित कर बैठे।
Shashi Tharoor on SIR: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसे सुनकर कांग्रेस के रणनीतिकार भी माथा पकड़ लें और विपक्षी दल ठहाके। स्टैनफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए थरूर ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन पर सवाल उठाने के चक्कर में यह भी कह दिया कि केरल में कांग्रेस की जीत में इसी प्रक्रिया का बड़ा हाथ था। अब राजनीति में इसे आत्मघाती ईमानदारी कहा जाए या बौद्धिक फिसलन, इस पर बहस शुरू हो गई है।
थरूर ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां वोटर लिस्ट से 91 लाख नाम हटाए गए, जिनमें बड़ी संख्या वैध मतदाताओं की थी। उन्होंने कहा कि 34 लाख लोगों ने अपील की लेकिन सुनवाई कुछ सौ मामलों तक ही सीमित रही। थरूर का तर्क था कि जब भाजपा करीब 30 लाख वोटों के अंतर से जीती और उतने ही वोटर अपीलों में फंसे रह गए, तो लोकतंत्र पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एसआईआर का फायदा कांग्रेस
लेकिन असली राजनीतिक ट्विस्ट तब आया जब थरूर ने केरल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि SIR से कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF को फायदा हुआ क्योंकि वामपंथी दल CPM कथित तौर पर डबल-ट्रिपल एनरोलमेंट की पुरानी खिलाड़ी रही है। यानी एक ही वोटर का नाम कई बूथों पर। थरूर के मुताबिक, SIR ने ऐसे नाम हटाकर वोटर लिस्ट को साफ किया और इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला।
अब कांग्रेस के लिए दिक्कत यह है कि जिस प्रक्रिया को विपक्ष लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा था, उसी को थरूर केरल में कांग्रेस का सफाई अभियान घोषित कर बैठे। भाजपा समर्थक इसे थरूर जी का सत्यवचन बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस खेमे में कई नेता शायद यही सोच रहे होंगे कि पार्टी प्रवक्ता बनने से पहले नेताओं का स्पेशल इंटेंसिव ट्रेनिंग रिविजन भी जरूरी है।
विपक्ष को मिल गया मुद्दा
उधर CPM के लिए यह बयान किसी राजनीतिक नमक से कम नहीं। जिन पर वर्षों से बूथ मैनेजमेंट का आरोप लगता रहा, अब उसी पर कांग्रेस सांसद ने अंतरराष्ट्रीय मंच से मुहर जैसी बात कर दी। हालांकि थरूर ने यह भी साफ किया कि बंगाल जैसी भारी संख्या में अपीलें केरल और तमिलनाडु में नहीं आईं।
गौरतलब है कि हालिया चुनावों में पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पहली बार सत्ता हासिल की, जबकि केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF ने वामपंथी किले को ध्वस्त कर दिया। लेकिन अब चुनावी नतीजों से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि थरूर ने विपक्ष का मुद्दा मजबूत किया या विरोधियों का नैरेटिव।