Suvendu Adhikari: बंगाल में शुभेंदु सरकार का बड़ा 'क्लीन स्वीप'! ममता काल के सभी बोर्ड और अध्यक्ष बर्खास्त, रिटायर्ड अफसरों की भी छुट्टी
Suvendu Adhikari Bengal clean sweep: बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा एक्शन! ममता बनर्जी काल में नियुक्त सभी बोर्ड अध्यक्षों, निदेशकों और रिटायर्ड अफसरों की छुट्टी। जानिए कैसे BJP सरकार प्रशासनिक सिस्टम को पूरी तरह बदलने में जुटी है।
Suvendu Adhikari Bengal clean sweep: पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पूरी तरह 'एक्शन मोड' में नजर आ रहे हैं। सोमवार को एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए शुभेंदु सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में आमूल-चूल बदलाव की शुरुआत कर दी है। राज्य सरकार ने ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों में तैनात किए गए सभी नामित सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया है। सरकार के इस फैसले से बंगाल के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसे पिछली सरकार के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
पॉलिटिकल नियुक्तियों पर चला सरकार का डंडा
शुभेंदु सरकार की इस बड़ी कार्रवाई की जद में वे सभी गैर-सांविधिक निकाय और संगठन भी आए हैं, जिनमें राजनीतिक आधार पर नियुक्तियां की गई थीं। ममता सरकार के समय कई प्रभावशाली नेताओं और करीबी लोगों को विभिन्न बोर्डों का अध्यक्ष या निदेशक बनाया गया था। नए आदेश के मुताबिक, अब ऐसे सभी पदों पर नामित व्यक्तियों की सेवाएं तुरंत समाप्त मानी जाएंगी। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नई कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला अनिवार्य था। अब इन पदों पर नई नियुक्तियां की जाएंगी, जिसमें पेशेवर योग्यता और नए विजन को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
रिटायर्ड अफसरों के 'सेवा-विस्तार' पर लगा ब्रेक
सिर्फ बोर्ड और निगम ही नहीं, बल्कि शुभेंदु सरकार ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिराई है जो सेवानिवृत्ति के बाद भी मलाईदार पदों पर जमे हुए थे। आदेश में साफ कहा गया है कि ममता सरकार के दौरान जिन रिटायर्ड अधिकारियों को 'पुनर्नियुक्ति' (Re-employment) मिली थी या जिन्हें बार-बार 'सेवा-विस्तार' (Extension) दिया गया था, उन्हें भी तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाता है। मुख्यमंत्री का यह कदम उन युवा अधिकारियों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया है जो प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे। सरकार का यह संदेश साफ है कि अब अनुभव के नाम पर पुराने चेहरों को ढोने की परंपरा खत्म होगी।
ममता की विरासत को बदलने की तैयारी
इस फैसले को सीधे तौर पर ममता बनर्जी के 'सिस्टम' को उखाड़ फेंकने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण के समय ही संकेत दिए थे कि वे राज्य के शासन मॉडल में बड़ा बदलाव करेंगे। जानकारों का कहना है कि अब उन सभी महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होगी जो सीधे तौर पर जनता से जुड़ी योजनाओं को प्रभावित करते हैं। फिलहाल, इन बर्खास्तगियों के बाद कई विभागों का कामकाज सीधे सचिवों के हाथ में आ गया है।