फिर सलाखों के पीछे सोनम रघुवंशी, SC ने कहा 'टाइपिंग की गलती' हत्यारोपी के लिए ढाल नहीं

Sonam Raghuvanshi Bail: अदालत ने माना कि मुकदमा अभी बेहद महत्वपूर्ण चरण में है और इस समय आरोपी का जमानत पर बाहर रहना उचित नहीं होगा।

Update:2026-07-23 17:01 IST

Sonam Raghuvanshi: मेघालय के चर्चित हनीमून मर्डर केस में हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत ने उसकी जमानत रद्द करते हुए साफ कर दिया कि हत्या जैसे गंभीर मामले में सिर्फ अरेस्ट मेमो में हुई तकनीकी गलती के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने न सिर्फ निचली अदालत और हाई कोर्ट से मिली राहत पर विराम लगा दिया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि कानून की तकनीकी खामी को गंभीर आपराधिक मामलों में बचाव की ढाल नहीं बनाया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश- 'टाइपिंग मिस्टेक' हत्या के आरोप से बड़ी नहीं

जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि सोनम को गिरफ्तारी के समय पूरी तरह पता था कि उसे किस मामले में गिरफ्तार किया जा रहा है। ऐसे में अरेस्ट मेमो में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गलत धारा दर्ज हो जाना जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

अदालत ने माना कि मुकदमा अभी बेहद महत्वपूर्ण चरण में है और इस समय आरोपी का जमानत पर बाहर रहना उचित नहीं होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ट्रायल छह महीने के भीतर पूरा नहीं होता है, तो सोनम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

क्या है पूरा मामला?

इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय पहुंचे। चेरापूंजी यात्रा के दौरान राजा रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। बाद में उनका शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने सनसनीखेज दावा किया कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। जांच एजेंसियों ने सोनम, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य सहयोगियों को आरोपी बनाया। 9 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सोनम को गिरफ्तार किया गया।

एक टाइपिंग गलती और मिल गई थी जमानत

इस हाई-प्रोफाइल केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब पुलिस की एक तकनीकी चूक सोनम के पक्ष में चली गई। गिरफ्तारी मेमो और केस डायरी में हत्या से जुड़ी बीएनएस की धारा 103 की जगह गलती से धारा 403 लिख दी गई, जबकि बीएनएस में ऐसी कोई धारा मौजूद ही नहीं है। इसी आधार पर निचली अदालत ने अप्रैल 2026 में सोनम को सशर्त जमानत दे दी थी।

अदालत का तर्क था कि आरोपी को गिरफ्तारी का सही कारण नहीं बताया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है। बाद में हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।

मेघालय सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, पलट गया पूरा मामला

हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सोनम लंबे समय तक फरार रही और उसे पूरी तरह पता था कि वह हत्या के मामले में वांछित है।

उन्होंने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय भी सोनम को कारण बताया गया था और बाद में मजिस्ट्रेट के सामने भी गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट किए गए। ऐसे में केवल अरेस्ट मेमो में हुई मानवीय भूल के आधार पर हत्या जैसे गंभीर मामले में जमानत देना न्यायसंगत नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों से सहमति जताई और सोनम की जमानत रद्द कर दी।

सोनम की दलील भी नहीं आई काम

सोनम की ओर से अदालत में कहा गया कि वह फिलहाल शिलांग में रह रही है, जमानत की सभी शर्तों का पालन कर रही है और उसे दोबारा जेल भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर बनाए रखना उचित नहीं होगा।

कोर्ट की युवा पीढ़ी पर भी तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत में केवल कानूनी बहस ही नहीं हुई, बल्कि समाज में बढ़ते वैवाहिक अपराधों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जहां लोग तलाक लेने की बजाय जीवनसाथी की हत्या की साजिश रच रहे हैं। इस पर जस्टिस एम. एम. सुंदरेश ने टिप्पणी की कि नई पीढ़ी जानकारी के मामले में आगे जरूर है, लेकिन मानसिक दबाव सहने की क्षमता कमजोर होती जा रही है।

वहीं जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने कहा कि आज की पीढ़ी का ज्ञान परिवार के बुजुर्गों से ज्यादा मोबाइल और व्हाट्सएप से आ रहा है। भावनात्मक सहारे की जगह बच्चों के हाथ में मोबाइल थमा दिया गया है, जिसका असर उनके व्यवहार पर दिखाई दे रहा है।

साफ संदेश: तकनीकी खामी नहीं बनेगी हत्या के आरोपियों की ढाल

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को केवल सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द होने तक सीमित नहीं माना जा रहा। कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि हत्या जैसे गंभीर अपराधों में केवल तकनीकी त्रुटियों के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब आरोपी को गिरफ्तारी का वास्तविक कारण पहले से पता हो।

फिलहाल सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। इसके बाद हनीमून मर्डर केस का ट्रायल आगे बढ़ेगा और अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि अदालत इस बहुचर्चित मामले में अंतिम फैसला कब सुनाती है।

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