Sujit Bose Arrested: ममता दीदी के करीबी पूर्व मंत्री पर ED का शिकंजा! नगर पालिका भर्ती घोटाले में सुजीत बोस गिरफ्तार
Bengal ED arrested Sujit Bose: पश्चिम बंगाल में ED की बड़ी कार्रवाई! ममता बनर्जी के करीबी नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस को नगर पालिका भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया गया। जानिए 150 अवैध भर्तियों, करोड़ों की उगाही और फ्लैट डील के पीछे का पूरा मामला।
Bengal ED arrested Sujit Bose: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन एक बड़ा तूफान लेकर आया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को नगर पालिका भर्ती घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से चल रही जांच और घंटों की तीखी पूछताछ के बाद, जब ईडी के अधिकारियों ने सुजीत बोस के सामने ठोस सबूतों का ढेर लगाया, तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। यह गिरफ्तारी ममता बनर्जी की पार्टी के लिए एक और बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि सुजीत बोस दक्षिण दमदम इलाके के एक कद्दावर नेता और सरकार के महत्वपूर्ण चेहरे रहे हैं।
150 उम्मीदवारों की 'अवैध सिफारिश' और फ्लैटों का खेल
ईडी की जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगर पालिका में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की अवैध तरीके से सिफारिश की थी। आरोप है कि इन नौकरियों को दिलाने के बदले उन्होंने न केवल करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ लिया, बल्कि इसके बदले कई आलीशान फ्लैट भी हासिल किए। ईडी ने इन संपत्तियों को 'अपराध की कमाई' (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में चिन्हित किया है। इसके अलावा, उनके नियंत्रण वाले बैंक खातों में भारी मात्रा में नकद जमा होने के सबूत भी मिले हैं, जिनका कोई हिसाब नहीं दिया जा सका।
छापेमारी में मिले 45 लाख नकद और अहम दस्तावेज
सुजीत बोस की गिरफ्तारी की नींव 10 अक्टूबर 2025 को ही रख दी गई थी, जब ईडी ने पश्चिम बंगाल के 13 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान सुजीत बोस के घर और दफ्तर को भी खंगाला गया था। उस समय जांच एजेंसी ने 45 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद किए थे। इन्हीं दस्तावेजों और अयान सील जैसे आरोपियों से मिली जानकारियों के आधार पर सुजीत बोस को पूछताछ के लिए बुलाया गया और अंततः उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब उन्हें मंगलवार सुबह विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
क्या है बंगाल का यह बहुचर्चित नगर पालिका भर्ती घोटाला?
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के कई नगर निगमों और नगरपालिकाओं में हुई कथित अवैध भर्तियों से जुड़ा है। इसकी शुरुआत तब हुई जब कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। जांच में सामने आया कि यह धांधली केवल शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं थी, बल्कि राज्य की कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर, टीटागढ़ और दमदम जैसी नगरपालिकाओं में भी फैली हुई थी। यहां मजदूर, सफाईकर्मी, क्लर्क, चपरासी और ड्राइवर जैसे पदों पर पैसों के बदले अयोग्य लोगों को नियुक्त किया गया। इस पूरे खेल में अयान सील की कंपनी 'एबीएस इंफोजोन' की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसे परीक्षा कराने का ठेका दिया गया था।
ममता सरकार की बढ़ी मुश्किलें, अब आगे क्या?
सुजीत बोस की गिरफ्तारी के बाद बंगाल की सियासत गरमा गई है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक प्रतिशोध कह रहा है। हालांकि, ईडी का आरोप है कि ओएमआर शीट (OMR Sheet) में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाई गई और इसके बदले करोड़ों रुपये की उगाही की गई। जिस तरह से एक के बाद एक मंत्री जेल जा रहे हैं, उससे सरकार की छवि पर गहरा असर पड़ रहा है। अब सबकी नजरें विशेष अदालत पर टिकी हैं, जहां सुजीत बोस की रिमांड को लेकर सुनवाई होगी।