सुरिंदर कोली के पास थे कई रसूखदारों के बड़े राज? संदिग्ध मौत के बाद निठारी पीड़ितों के दावे से सनसनी
Nithari Kand Victims on Surinder Koli Death: निठारी कांड के मुख्य आरोपी रहे सुरिंदर कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत के बाद 20 साल पुराने केस के अनसुलझे सवाल फिर सामने हैं। पीड़ित परिवारों ने मौत पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
Nithari Kand Victims on Surinder Koli Death: देश के सबसे खौफनाक और दिल दहला देने वाले निठारी कांड के मुख्य आरोपी रहे सुरिंदर कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक बार फिर 20 साल पुराने ज़ख्मों को हरा कर दिया है। हरिद्वार में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाने वाले सुरिंदर कोली का शव फंदे से झूलता मिलने के बाद जहां पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है, वहीं इस भयानक कांड में अपनी 10 साल की बेटी खो चुके पीड़ितों का गुस्सा और दर्द सड़क पर फूट पड़ा है। निठारी के पीड़ित झब्बू लाल ने रोते और कांपते हाथों से कपड़े प्रेस करते हुए सीधा आरोप लगाया है कि यह कोई खुदकुशी नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत किया गया मर्डर है। उनका दावा है कि सुरिंदर कोली को उन ताकतवर लोगों ने मरवा दिया, जिनके बड़े और काले राज उसके पास दफन थे।
20 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ
नोएडा के सेक्टर-31 स्थित पंढेर के खाली पड़े उस मनहूस बंगले D-5 से महज 100 मीटर की दूरी पर कपड़े प्रेस कर अपना पेट पालने वाले 66 वर्षीय झब्बू लाल का दर्द देखकर किसी का भी कलेजा कांप उठेगा। झब्बू लाल कहते हैं कि अगर कोली को अपनी जान ही देनी होती तो वह इतने सालों तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के दौरान ही दे देता। आज जब नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे आखिरी मामले में भी बरी कर दिया था और वह बाहर आ गया था, तब अचानक फांसी लगाने की बात गले से नीचे नहीं उतरती। झब्बू लाल बड़े ही भारी मन से कहते हैं कि 20 साल बीत गए, मेरी मासूम बच्ची चली गई, केस लड़ते-लड़ते हमारी जमीन-जायदाद और पूरी जमापूंजी बिक गई, लेकिन हमें न्याय के नाम पर सिर्फ एक भद्दा मजाक मिला।
नोएडा की कोठी नंबर D-5 की वह मनहूस कहानी
29 दिसंबर 2006 की वह कड़ाके की ठंड आज भी उत्तर भारत के लोग नहीं भूले हैं। दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी गांव से अचानक एक ऐसी खबर सामने आई जिसने हर किसी की रूह कंपा दी थी। कोठी नंबर D-5 के पीछे बने गंदे नाले से जब एक-एक कर छोटे-छोटे मासूम बच्चों और महिलाओं के कंकाल, हड्डियां, कपड़े और खोपड़ियां मिलने लगीं, तो पूरा देश स्तब्ध रह गया। इस कोठी का मालिक अमीर कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर था और वहां घरेलू नौकर के तौर पर सुरिंदर कोली काम करता था। आरोप लगे कि मासूमों को फुसलाकर कोठी में लाया जाता था, जहां उनके साथ हैवानियत कर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी जाती थी। इसके बाद 2009 में सीबीआई अदालत ने कोली को मौत की सजा भी सुनाई थी।
न्याय की अंतहीन लड़ाई में सब कुछ लुटा चुके हैं बेबस मां-बाप
मूल रूप से उन्नाव के रहने वाले झब्बू लाल और उनकी 63 वर्षीय पत्नी सुनीता देवी पिछले 25 सालों से नोएडा में ही रहकर गुजर-बसर कर रहे हैं। 20 साल पहले उनकी 10 साल की मासूम बेटी ज्योति अचानक गायब हो गई थी, जो कभी लौटकर वापस नहीं आई। बेटी को इंसाफ दिलाने की इस लंबी कानूनी जंग में झब्बू लाल ने अपना प्लॉट तक बेच दिया और वकीलों को लाखों रुपये दे डाले। आज दोनों पति-पत्नी पाई-पाई को मोहताज होकर सड़क किनारे प्रेस की दुकान चलाने को मजबूर हैं। सुनीता देवी का दावा है कि जब यह कांड खुला था, तब कोली ने थाने में उनसे खुद कहा था कि 'तुम्हारी बेटी गलती से मारी गई।' सुनीता का आरोप है कि पुलिस ने इस कबूलनामे की सीडी कोर्ट में जमा ही नहीं की, क्योंकि इस पूरे खेल में कई बड़े चेहरे शामिल थे।
20 साल बाद भी अनसुलझी पहेली
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुरिंदर कोली को तमाम सबूतों के अभाव में बरी किए जाने के बाद से ही यह सवाल हवा में तैर रहा है कि अगर पंढेर और कोली बेकसूर थे, तो फिर नाले से मिले उन दर्जनों मासूम बच्चों के कंकाल किसके थे? उनके कत्ल का गुनहगार कौन है? झब्बू लाल कहते हैं कि वह अब इन सवालों से पूरी तरह थक चुके हैं। हर साल मीडिया वाले आकर पुराने जख्म उकेर देते हैं, लेकिन इंसाफ की उम्मीद अब खत्म हो चुकी है। अब सुरिंदर कोली की इस रहस्यमयी मौत ने निठारी कांड के उन अनसुलझे और कड़वे राज को हमेशा-हमेशा के लिए अपने साथ दफन कर दिया है।