बंगाल उपचुनाव में सियासी ड्रामा! नंदीग्राम के बाद रेजीनगर प्रत्याशी गिरफ्तार, जाली नोट और हथियार से हड़कंप

West Bengal Bypolls: पश्चिम बंगाल के रेजीनगर उपचुनाव से पहले प्रत्याशी सैफुल इस्लाम की 2021 के मामले में गिरफ्तारी से सियासी हलचल बढ़ गई। हुमायूं कबीर की पार्टी के नेता की जाली नोट और हथियार के मामले में गिरफ्तारी भी चर्चा में है।

Update:2026-09-20 11:28 IST

Image Source- Social Media

West Bengal Bypolls: पश्चिम बंगाल के विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। नंदीग्राम सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद अब रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी सैफुल इस्लाम की गिरफ्तारी ने भी राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। शनिवार को पुलिस ने सैफुल इस्लाम को उनके आवास से गिरफ्तार किया। उन पर 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान हुए एक मामले में कार्रवाई की गई है। पांच साल पहले चुनाव के दौरान दो गुटों के बीच झड़प हुई थी और इसी मामले में सैफुल इस्लाम भी आरोपी थे।

रेजीनगर में होने वाले उपचुनाव से पहले प्रत्याशी की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल में नया मोड़ ला दिया है। इससे पहले नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हुई थी। अब रेजीनगर में भी प्रत्याशी पर पुलिस कार्रवाई के बाद उपचुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हुमायूं कबीर की पार्टी से जुड़ाव

सैफुल इस्लाम का जुड़ाव हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी (Aam Janata Unnayan Party) से रहा है। रेजीनगर उपचुनाव में पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी पहले से ही चर्चा में है।

वहीं नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी अलग मामले में हुई है। उन्हें करीब दो दशक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला 2007 में क्षेत्र में हुए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन से जुड़ा बताया गया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक मिलन प्रधान को पुराने मामलों में लंबित वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया और बाद में अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

इससे पहले ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान किया था और इसके बाद ही मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हुई। इस घटनाक्रम ने नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी।

रेजीनगर में हुमायूं कबीर के बेटे मैदान में

रेजीनगर उपचुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी ने हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को अपना उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में पार्टी से जुड़े नेताओं और उम्मीदवारों को लेकर लगातार सामने आ रहे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया है।

हुमायूं कबीर खुद भी पुलिस की कार्रवाई के दायरे में आए हैं। बहरामपुर पुलिस ने शनिवार को उन्हें नोटिस जारी किया और सोमवार को जांच अधिकारियों के सामने पेश होने को कहा है। यह मामला दो समुदायों के बीच तनाव पैदा करने की कथित साजिश से जुड़ा बताया गया है।

यानी एक तरफ रेजीनगर में पार्टी का उम्मीदवार चुनाव मैदान में है, तो दूसरी तरफ पार्टी से जुड़े नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ का सिलसिला भी चल रहा है।

हुमायूं कबीर के प्रदेश सचिव गिरफ्तार

इसी बीच हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रदेश सचिव आशिक इकबाल की गिरफ्तारी ने भी मामले को और गरमा दिया है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक उनके पास से बड़ी मात्रा में जाली नोट और अवैध हथियार बरामद किए गए हैं।

एक अधिकारी के मुताबिक आशिक इकबाल को शुक्रवार देर रात मुर्शिदाबाद जिले के हरिहरपाड़ा में पुलिस जांच चौकी पर वाहनों की जांच के दौरान पकड़ा गया। उनके साथ यात्रा कर रहे एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक गरिनामा इलाके के पास एक एसयूवी को रोका गया था। वाहन की तलाशी के दौरान 500 रुपये मूल्य के 108 जाली नोट, दो आग्नेयास्त्र और चार कारतूस बरामद किए गए। इसके बाद आशिक इकबाल को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है।

दो सीटों पर जीत के बाद खाली हुई रेजीनगर

रेजीनगर सीट का मौजूदा उपचुनाव भी हुमायूं कबीर की राजनीतिक स्थिति से जुड़ा है। दी गई जानकारी के मुताबिक हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नवादा दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने नवादा सीट अपने पास रखी और रेजीनगर सीट खाली कर दी। इसी वजह से अब रेजीनगर में उपचुनाव कराया जा रहा है।

आम जनता उन्नयन पार्टी ने इस सीट पर उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा है। ऐसे में पार्टी के प्रमुख चेहरे और उनके करीबियों से जुड़े पुलिस मामलों ने चुनावी माहौल को और चर्चा में ला दिया है।

रेजीनगर में नामांकन वापस लेने का ऐलान

शनिवार को रेजीनगर सीट पर एक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। इस सीट से ममता बनर्जी के प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी ने अपना नामांकन वापस लेने का ऐलान कर दिया।

उन्होंने शाम होते-होते ममता बनर्जी की पार्टी छोड़ने की भी घोषणा कर दी थी। इससे ऐसा लगा कि रेजीनगर के चुनावी समीकरण में एक और बड़ा बदलाव हो गया है। लेकिन कुछ ही समय बाद रबीउल आलम चौधरी अपने बयान से पलट गए।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने उन्हें मना लिया है और इसलिए वह चुनाव लड़ेंगे। इस तरह कुछ ही घंटों के भीतर उनका नामांकन वापस लेने और फिर चुनाव मैदान में बने रहने का घटनाक्रम सामने आया।

एक के बाद एक घटनाओं से बढ़ा सस्पेंस

रेजीनगर उपचुनाव से पहले जिस तरह एक के बाद एक घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे यहां का चुनावी माहौल बेहद चर्चा में आ गया है। पहले प्रत्याशी सैफुल इस्लाम की 2021 के मामले में गिरफ्तारी हुई। फिर आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रदेश सचिव आशिक इकबाल की जाली नोट और हथियार बरामदगी के मामले में गिरफ्तारी हुई। इसके बाद पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर को भी पुलिस ने जांच के लिए नोटिस जारी किया।

दूसरी तरफ रेजीनगर से ममता बनर्जी के प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी के नामांकन वापस लेने और फिर अपना फैसला बदलने से भी राजनीतिक घटनाक्रम लगातार बदलता नजर आया।

नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने पहले ही उपचुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी थी। अब रेजीनगर में भी प्रत्याशी की गिरफ्तारी और उससे जुड़े दूसरे घटनाक्रम सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल के इन उपचुनावों पर सबकी नजर है।

Tags:    

Similar News