तो क्या इस वजह से नहीं हिले खड़े हनुमान? उज्जैन में बजरंबली की नाराजगी की ये है बड़ी वजह!
Ujjain Khade Hanuman Row: उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण के लिए नए मंदिर में शिफ्ट करने की तैयारी थी, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। भक्त इसे बजरंगबली की नाराजगी और दक्षिणमुखी स्वरूप से जोड़ रहे हैं।
Ujjain Khade Hanuman Row: मध्य प्रदेश की धर्मधानी उज्जैन में इन दिनों हर तरफ बस एक ही अनोखे वाकये की चर्चा हो रही है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और सड़क चौड़ीकरण की योजनाओं के बीच शहर का प्रसिद्ध 'खड़े हनुमान मंदिर' अचानक देशभर में सुर्खियों में आ गया है। कंठाल से छत्री चौक तक के मार्ग को चौड़ा करने के लिए प्रशासन ने इस ऐतिहासिक प्रतिमा को टंकी चौक के पास नवनिर्मित मंदिर में स्थापित करने का फैसला किया था। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर जब प्रतिमा को नए स्थान पर ले जाने की तैयारी हुई पर भगवान की मूर्ति अपनी जगह से तस से मस नहीं हुई। इसके बाद से ही महाकाल की नगरी में यह बात तेजी से फैल गई कि पवनपुत्र हनुमान जी इस बदलाव से बेहद नाराज हैं
नाराजगी की क्या है वजह
श्रद्धालुओं के बीच सबसे बड़ी नाराजगी भगवान की प्रतिमा की दिशा बदलने को लेकर है। वर्तमान में मंदिर में विराजमान खड़े हनुमान जी का मुख दक्षिण दिशा की ओर है, जिसे अत्यंत फलदायी और चमत्कारी माना जाता है। हालांकि, टंकी चौक पर प्रशासन द्वारा जो नया मंदिर ढांचा तैयार किया गया है, वहां प्रतिमा स्थापित होने पर उनका मुख उत्तर दिशा की तरफ हो जाएगा। भक्तों का साफ तौर पर कहना है कि जब दशकों से मारुति नंदन की पूजा उनके दक्षिणमुखी स्वरूप में होती आई है, तो नए स्थान पर उनकी दिशा क्यों बदली जा रही है? दिशा के इस फेरबदल को ही भक्त बजरंगबली की नाराजगी का मुख्य कारण मान रहे हैं।
आस्था का केंद्र और ताबीज-झाड़नी के चमत्कारों की मान्यता
स्थानीय नागरिकों के लिए यह केवल पत्थरों का ढांचा भर नहीं, बल्कि अटूट विश्वास का बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि इस दर पर सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। यहां से मिलने वाले विशेष ताबीज और झाड़नी को लेकर दूर-दूर तक लोगों में गहरी आस्था है। भक्तों का दावा है कि इसके उपयोग से कई तरह की बीमारियों और कष्टों से मुक्ति मिलती है। यही वजह है कि अब केवल मंगलवार या शनिवार ही नहीं, बल्कि सप्ताह के आम दिनों में भी सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ रही है।
सोशल मीडिया का तड़का और जंतर-मंतर जैसी लगी चौपाल
जैसे ही प्रतिमा के न हटने की खबर इंटरनेट पर आई, सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियो की बाढ़ आ गई। कई लोग इसे भगवान का अलौकिक चमत्कार बता रहे हैं, तो कुछ लोग प्रशासनिक विफलता कह रहे हैं। डिजिटल मीडिया के प्रभाव से अब जो लोग महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं, वे भी इस मंदिर में नतमस्तक होने आ रहे हैं। परिसर में लगी जन-चौपालों में श्रद्धालुओं ने गुहार लगाई है कि शहर में 60 से अधिक मंदिरों को पहले ही हटाया जा चुका है, इसलिए इस एक चमत्कारिक धाम को उसके मूल स्थान पर ही रहने दिया जाए।
पुजारी का बयान और IIT की हाईटेक स्कैनिंग से उम्मीद
मंदिर के मुख्य पुजारी महेश बैरागी का मानना है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी शुरुआत में ही सभी पक्षों को विश्वास में लेकर धार्मिक परंपराओं के अनुसार कदम उठाते, तो यह गतिरोध पैदा ही नहीं होता। अब इस पहेली को सुलझाने के लिए प्रशासन ने तकनीकी रास्ता अपनाने का मन बनाया है। प्रतिमा और उसके आधार की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए आईआईटी के विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक स्कैनिंग कराने की योजना है। दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया की अफवाहों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने के लिए अभी तक किसी भी प्रकार की भारी मशीनरी का प्रयोग नहीं किया गया है।