UP Congress Strategy: बिहार वाली गलती यूपी में नहीं दोहराएगी कांग्रेस! अखिलेश यादव से बातचीत से पहले तैयार किया 'मास्टर प्लान'

UP Congress Strategy: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए कांग्रेस एक्टिव मोड में आ गई है। बिहार चुनाव की गलतियों से सबक लेते हुए पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों और 120 मजबूत सीटों की लिस्ट तैयार करने की रणनीति बनाई है, ताकि सपा के साथ गठबंधन में सीट शेयरिंग पर कोई विवाद न हो।

By :  Shivam
Update:2026-05-19 21:05 IST

UP Congress Strategy: अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक गानों में अभी से ही सरगर्मियां तेज हो गई है। 2024 लोकसभा चुनाव में राज्य में शानदार प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस पार्टी की बेहद उत्साहित है और उसने अभी से ही प्रदेश में चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी बेहद फूंकफूंक कर कदम रख रही है क्योंकि बिहार चुनाव में कोई सीट बंटवारे की देरी और आंतरिक मतभेदों से सबक लेते हुए पार्टी ने काफी सबक सीखा है। आला कमान राज्य कांग्रेस कमेटी को उन विधानसभा क्षेत्र के संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करने को कहा है जहां पार्टी की स्थिति बहुत मजबूत है। पार्टी की रणनीति का मुख्य उद्देश्य समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे के दौरान किसी भी विवाद से बचाना है।

पार्टी के अंदरखाने इस बात को लेकर गहरा मंथन हो रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में समय पर फैसला न लेने के कारण महागठबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अब कांग्रेस पार्टी प्रदेश में इस चूक से बचना चाह रही।

इसलिए राज्य प्रभारी अविनाश पांडे ने सचिवों को दो विशेष लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। पहली लिस्ट में सभी 403 विधानसभा सीटों के संभावित उम्मीदवार होंगे जबकि दूसरी लिस्ट में 100 से 120 चुनिंदा सीटों का ब्योरा होगा जहां पार्टी की जीत की संभावना है बहुत ज्यादा है। इस सीटों के मूल्यांकन के आधार पर ज्यादा संभावना, मामूली संभावना और कम संभावना जैसी श्रेणियां में विभाजन किया गया है।

जमीनी स्तर पर स्थानीय इकाइयों और टिकट के दावेदारों से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट जल्द ही दिल्ली भेजी जाएगी। हालांकि, कांग्रेस खुद को 100 से अधिक सीटों पर दावेदार मान रही है लेकिन गठबंधन के समीकरणों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि वह समाजवादी पार्टी से तकरीबन 80 सीटों के आसपास समझौता कर लेगी। पार्टी का एक बड़ा धड़ा मानता है कि बीते लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन बहुत ही सफल रहा था, जिसे केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार को पूर्ण बहुमत से रोक दिया था। ऐसे में विधानसभा चुनाव में भी इस सफलता को दोहराने के लिए जमीनी स्तर पर तालमेल रखना बेहद जरूरी है भले ही पार्टी का एक धड़ा पार्टी को मजबूत करने के लिए अकेले चुनाव लड़ने की वकालत कर रहा हूं

मैं अगर वोट बैंक की बात कर तो इस मोर्चे पर कांग्रेस पार्टी एक खास सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश में है। पार्टी मुख्य रूप से दलित मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं को ध्यान में रख रही है। कभी कांग्रेस पार्टी का मुख्य आधार रहे ब्राह्मण समाज को साधने की इस सत्ता विरोधी लहर में पुरजोर कोशिश में है। मुस्लिम और दलित मतदाताओं के साथ वह एक ऐसा मजबूत त्रिकोणीय समीकरण बनाने की तैयारी में है जिसकी काट भाजपा के पास न हो। कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि अगस्त्य सितंबर तक सेट बटवारा अंतिम रूप ले ले ताकि उम्मीदवारों को जमीन पर काम करने के लिए पूरा समय मिल सके।

इस पूरी चुनावी सुगबुगाहट के के बीच प्रदेश कांग्रेस में बड़े फिर बादल की भी खबरें हैं। दिल्ली से लखनऊ तक चर्चा आम हो गई है की राज्य नेतृत्व में कुछ चौक आने वाले फिर बदल देखने को मिल सकते हैं इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है की प्रियंका गांधी एक बार फिर उत्तर प्रदेश में पार्टी का मुख्य चेहरा बन सकते हैं। हालांकि 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद ही खराब रहा था लेकिन 2024 में मिली बड़ी सफलता के बाद केंद्रीय नेतृत्व इस बार पूरी ताकत रोकने को तैयार दिख रहा है।

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