Nishad Reservation Issue: यूपी चुनाव में होगा ‘महा-खेला’! रिजर्वेशन का हथियार लेकर सियासी दंगल में उतरेंगे मुकेश सहनी, निकालेंगे ‘निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा’
Nishad Reservation Issue: वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी ने कई सीटों पर दमदार प्रदर्शन की उम्मीद जताई थी, लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए।
Mukesh Sahani
Nishad Reservation Issue: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उम्मीदों के साथ मैदान में उतरी विकासशील इंसान पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। पार्टी प्रमुख मुकेश साहनी ने कई सीटों पर दमदार प्रदर्शन की उम्मीद जताई थी, लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए। पार्टी ने 15 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी। इस चुनावी झटके के बाद अब मुकेश साहनी ने अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र उत्तर प्रदेश को बनाने का फैसला किया है।
यूपी में निषाद वोट बैंक पर नजर
उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय की बड़ी आबादी को देखते हुए मुकेश साहनी यहां अपनी राजनीतिक संभावनाएं तलाश रहे हैं। विभिन्न आकलनों के अनुसार राज्य में निषाद, मल्लाह, बिंद, कश्यप, धीवर और उनसे जुड़ी अन्य जातियों की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। राजनीतिक दल लंबे समय से इस समुदाय को अपने पक्ष में करने की कोशिश करते रहे हैं क्योंकि कई क्षेत्रों में यह वोट बैंक चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
आरक्षण को बनाया मुख्य चुनावी मुद्दा
मुकेश साहनी की रणनीति का सबसे बड़ा आधार निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा दिलाने की मांग है। उनका कहना है कि निषाद, मल्लाह, बिंद, बेलदार और नोनिया जैसी जातियां आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई हैं। यदि इन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा मिलता है तो समुदाय के लोगों को शिक्षा, सरकारी नौकरियों और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का अधिक लाभ मिल सकेगा।
‘एक संविधान, एक कानून’ का तर्क
साहनी का तर्क है कि जब पूरे देश में एक संविधान और एक कानून की बात होती है, तो निषाद समुदाय के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग व्यवस्था क्यों होनी चाहिए। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में निषाद समुदाय की कुछ जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ मिलता है, जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं है। इसी मुद्दे को वे राजनीतिक और सामाजिक अभियान का प्रमुख आधार बना रहे हैं।
यूपी चुनाव से पहले आरक्षण आंदोलन की तैयारी
हाल ही में अयोध्या में रामलला के दर्शन के बाद मुकेश साहनी ने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक सक्रियता का संकेत दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मांग पूरी नहीं होती है तो निषाद समाज सत्ताधारी दलों के खिलाफ एकजुट हो सकता है।
इसी उद्देश्य से विकासशील इंसान पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश में ‘निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा’ शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस यात्रा के माध्यम से पार्टी निषाद समुदाय को संगठित कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।