मछली पर सियासी महासंग्राम! बंगाल चुनाव के दौरान मछली खाते हुए फोटो क्यों चमका रहे हैं बीजेपी नेता?

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल का नाम लेते ही जिस चीज की सबसे पहले याद आती है, वह है मछली। यहां की पहचान ही ‘माछ-भात’ से जुड़ी है। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में मछली सिर्फ खाने की चीज नहीं रही, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है।

Update:2026-04-21 20:32 IST

फोटो- सोशल मीडिया

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल का नाम लेते ही जिस चीज की सबसे पहले याद आती है, वह है मछली। यहां की पहचान ही ‘माछ-भात’ से जुड़ी है। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में मछली सिर्फ खाने की चीज नहीं रही, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच अब सियासी जंग ‘फिश पॉलिटिक्स’ तक पहुंच गई है, जहां नेता मछली खाकर और दिखाकर संदेश देने में जुटे हैं।

सांस्कृतिक पहचान बनी चुनावी मुद्दा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस इस चुनाव में बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को बड़ा मुद्दा बना रही है। टीएमसी लगातार यह आरोप लगा रही है कि अगर भाजपा सत्ता में आई, तो बंगाल के लोगों को मछली, मांस और अंडा खाने से रोका जा सकता है।

ममता बनर्जी इसे ‘माछ-भाते बंगाली’ की पहचान से जोड़ते हुए कहती हैं कि मछली और चावल बंगाल के लोगों की जिंदगी का हिस्सा हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता। उन्होंने एक चुनावी सभा में कहा, “BJP आपको मछली खाने नहीं देगी. न ही वे आपको मांस या अंडे खाने देंगे।”

एक अन्य सभा में उन्होंने सवाल उठाया, “बंगाल के लोग मछली और चावल पर जीते हैं. आप कह रहे हैं कि वे मछली, मांस और अंडा नहीं खा सकते, तो फिर वे खाएंगे क्या?” टीएमसी का साफ आरोप है कि भाजपा बंगाल की संस्कृति पर हमला कर रही है और बाहर से शाकाहारी संस्कृति थोपना चाहती है।

शुरू हुई फिश पॉलिटिक्स

टीएमसी के इन आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा ने अलग रणनीति अपनाई है। पार्टी के नेता अब खुलेआम मछली खा रहे हैं, मछली बाजारों में जा रहे हैं और हाथ में मछली लेकर प्रचार कर रहे हैं।

कोलकाता पोर्ट से भाजपा उम्मीदवार राकेश सिंह दोनों हाथों में मछली लेकर घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं। वहीं बैरकपुर से उम्मीदवार कौस्तव बागची भी सफेद-लाल कपड़े पहनकर हाथ में मछली लिए लोगों के बीच जा रहे हैं। उनके साथ ढोल-नगाड़े और समर्थकों की भीड़ भी नजर आ रही है। जिसके बाद अब यह पूरा अभियान दिखाता है कि भाजपा इस बार चुनाव में हर स्तर पर सांस्कृतिक मुद्दों को साधने की कोशिश कर रही है।

बाहरी और शाकाहारी छवि तोड़ने की कोशिश

माना जा रहा है कि भाजपा की यह रणनीति सिर्फ जवाबी हमला नहीं, बल्कि अपनी छवि बदलने की भी कोशिश है। पार्टी लंबे समय से बाहरी, हिंदी थोपने वाली और शाकाहारी छवि से जूझ रही है। ऐसे में मछली खाने और उसे प्रचार का हिस्सा बनाने के जरिए भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह बंगाल की संस्कृति, भाषा और खान-पान का सम्मान करती है।

इस दौरान झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का मछली खाते हुए फोटो पोस्ट करना, अनुराग ठाकुर का मछली खाते हुए वीडियो सामने आना और हर्षवर्धन श्रृंगला का माछ-भात खाना, सब इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अनुराग ठाकुर ने मछली खाते हुए कहा, यहां माछ भी है, मछली भी है, भात भी है, सब खा रहे हैं। भाजपा की 16 राज्यों में सरकार है, NDA की 20 राज्यों में सरकार है, मगर एक भी जगह किसी के बोलने पर, खाने पर, पूजा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। लेकिन ममता बनर्जी के पास 15 साल की कोई उपलब्धि नहीं है इसलिए भय, भ्रम और अफवाहें फैलाने का काम कर रही हैं। वहीं हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि उन्हें हर तरह की मछली पसंद है और उन्होंने यह भी जोड़ा कि बंगाल में संसाधन होने के बावजूद मछली पालन उद्योग उतना विकसित नहीं हो पाया है।

पीएम मोदी ने भी उठाया मुद्दा

वहीं ये मछली का मुद्दा इतना बड़ा बन गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे अपनी रैली में उठाया। उन्होंने कहा, सत्ता में 15 साल बिताने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस आपको मछली जैसी बुनियादी चीज भी उपलब्ध कराने में नाकाम रही है। यहां तक कि मछली भी राज्य के बाहर से मंगवानी पड़ती है। माना जा रहा है कि अपने इस बयान के जरिए भाजपा ने सीधे तौर पर टीएमसी की सरकार पर निशाना साधा है।

दिल्ली में भी गूंजी फिश पॉलिटिक्स

वहीं ये मुद्दा केवल पश्चिम बंगाल तक ही सीमित नहीं है बल्कि, बंगाल की यह सियासत दिल्ली तक पहुंच गई है। आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने अनुराग ठाकुर के मछली खाने पर सवाल उठाते हुए कहा है कि, “देखिए किस तरह से भगवा पहनकर चंदन लगाकर मंगलवार के दिन मछली खा रहे हैं। ये वही लोग हैं जो दिल्ली और अन्य शहरों में मांस-मछली की दुकानें बंद कराते फिरते हैं। अब बंगाल का चुनाव क्या आया, प्रधानमंत्री जी ने सभी को मछली खाने पर लगा दिया। सत्ता के लिए क्या-क्या करोगे साहब?”

वहीं विधायक कुलदीप कुमार ने भी कहा, “मंगलवार बजरंगबली जी के दिन पर ये अनुराग ठाकुर भगवा पहनकर, टीका लगाकर मछली खा रहे हैं। ये दिल्ली में मीट की दुकानें बंद कराते हैं और बंगाल में मछली खा रहे हैं। इन्हें बस सत्ता चाहिए।”

बंगाल में मछली की अहमियत और चुनावी असर

वहीं एक सर्वे के मुताबिक बंगाल में 65 प्रतिशत से ज्यादा लोग हर हफ्ते मछली खाते हैं, जो इसे राज्य की सबसे बड़ी खान-पान पहचान बनाता है। यही वजह है कि चुनाव में मछली इतना बड़ा मुद्दा बन गई है। यहां पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार खत्म हो चुका है और 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, जबकि 4 मई को नतीजे आएंगे। जिसके बाद अब देखना यह होगा कि ये ‘फिश पॉलिटिक्स’ का यह दांव किस पार्टी के लिए कितना कारगर साबित होता है, लेकिन इतना तय है कि इस बार बंगाल का चुनाव सिर्फ मुद्दों का नहीं, बल्कि थाली और पहचान की सियासत का भी बन चुका है।

Tags:    

Similar News