15 साल का राज और संदेशखाली का 'शाप'! इस बार ममता के लिए क्यों मुश्किल है राह? वो 5 बड़ी वजहें जो बदल देंगी बंगाल का इतिहास

क्या संदेशखाली और 15 साल की सत्ता विरोधी लहर ममता बनर्जी की राह रोक देगी? जानिए वो 5 बड़े कारण जो पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों को बदल सकते हैं और एग्जिट पोल्स में भाजपा की बढ़त के पीछे की असली वजहें।

By :  Shivam
Update:2026-05-02 21:31 IST

Mamata Banerjee

Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। दोपहर तक तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी कि राज्य में अगली सरकार किसकी बनेगी। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में भाजपा को बढ़त और संभावित जीत मिलती दिख रही है, हालांकि पहले भी कई बार एग्जिट पोल गलत साबित हुए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन पोल्स पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इन्हें भाजपा के इशारे पर चलाया जा रहा है, ताकि टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराया जा सके। मतदान के बाद कई जगहों पर भाजपा और टीएमसी समर्थकों के बीच ईवीएम की सुरक्षा को लेकर तनाव भी देखने को मिला। करीब 15 साल से सत्ता में बनी ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव अब तक का सबसे कठिन माना जा रहा है। जहां एक ओर उनकी सरकार की वेलफेयर योजनाएं रही हैं, वहीं भाजपा ने भ्रष्टाचार और शासन से जुड़े मुद्दों पर उन्हें घेरा, साथ ही घुसपैठ का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।

पांच साल में कैसे बदली तस्वीर

कुछ साल पहले तक यह कल्पना भी मुश्किल थी कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में पहुंचेगी। एग्जिट पोल्स के मुताबिक पार्टी मजबूत स्थिति में है, हालांकि अंतिम नतीजों का इंतजार बाकी है। 2016 में महज तीन सीटों तक सीमित रहने वाली भाजपा 2021 में 77 सीटों तक पहुंची और अब सत्ता का दावा कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद चुनावी रणनीति की कमान संभाली, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई रैलियों के जरिए प्रचार को धार दी।

ममता के लिए क्यों मुश्किल हुआ मुकाबला

2011 में वामपंथी शासन को खत्म कर सत्ता में आईं ममता बनर्जी से लोगों को काफी उम्मीदें थीं। कई योजनाओं से उन्हें समर्थन भी मिला, लेकिन कुछ वादे अधूरे रहने और लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण एंटी-इंकंबेंसी का असर भी दिख रहा है। भाजपा ने संगठन स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का विस्तार किया है। महिला वोट बैंक पर ममता की पकड़ मजबूत रही है, लेकिन महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को आलोचना झेलनी पड़ी। आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप केस जैसे मामलों ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया, जिसे भाजपा ने प्रमुख मुद्दा बनाया।

एसआईआर प्रक्रिया का असर

राज्य में एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए। चुनाव आयोग का कहना है कि इनमें मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम शामिल थे। हालांकि, इस प्रक्रिया ने बाहर रहने वाले बंगाल के मतदाताओं में आशंका पैदा कर दी, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग वापस लौटकर मतदान करने पहुंचे। इससे वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया का लाभ भाजपा को मिल सकता है।

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