Newstrack Special: क्या लंबे लोग ज्यादा अक्लमंद होते हैं? क्या है कद और बुद्धिमत्ता का पूरा सच?
Height and Intelligence Explained: क्या लंबे लोग ज्यादा बुद्धिमान होते हैं? जानिए कद और बुद्धिमत्ता के बीच वैज्ञानिक संबंध, IQ, जीन, पोषण, मस्तिष्क के आकार और बचपन के विकास की पूरी कहानी।
Height and Intelligence Explained
Height and Intelligence Explained: क्या आपने कभी सोचा है कि किसी इंसान का कद और उसकी बुद्धिमत्ता आपस में जुड़ी हो सकती है? क्या लंबे लोग औसतन ज्यादा समझदार होते हैं? क्या बड़े कद का मतलब बड़ा दिमाग और बड़ा दिमाग मतलब ज्यादा बुद्धि होता है? या फिर यह सिर्फ एक ऐसा भ्रम है, जिसे हम लंबे और प्रभावशाली दिखने वाले लोगों को देखकर बना लेते हैं?
इस सवाल का जवाब थोड़ा दिलचस्प है
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बड़े समूहों को देखें तो कद और बुद्धिमत्ता के बीच एक हल्का सकारात्मक संबंध जरूर दिखाई देता है। यानी औसतन लंबे लोगों के बुद्धिमत्ता परीक्षण के अंक छोटे कद वाले लोगों से थोड़ा ज्यादा हो सकते हैं। लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि यह अंतर बहुत छोटा है।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि छह फुट लंबा व्यक्ति पांच फुट चार इंच के व्यक्ति से ज्यादा बुद्धिमान होगा। ऐसा कोई वैज्ञानिक नियम नहीं है। किसी व्यक्ति का कद देखकर उसकी बुद्धिमत्ता का अंदाजा लगाना लगभग बेकार साबित हो सकता है।
तो फिर शोध में यह रिश्ता दिखाई क्यों देता है? क्या लंबे शरीर और तेज दिमाग के पीछे कोई साझा कारण है? क्या जीन इसका कारण हैं? क्या बचपन का पोषण दोनों को प्रभावित करता है? और क्या बड़े कद वाले लोगों का दिमाग भी औसतन बड़ा होता है?
कद और बुद्धिमत्ता का रिश्ता कितना मजबूत है?
कई अध्ययनों में कद और बुद्धिमत्ता के बीच सकारात्मक संबंध मिला है। पुराने अध्ययनों की समीक्षा में बच्चों में कद और बुद्धिमत्ता के बीच औसत सहसंबंध (correlation) करीब 0.18 और वयस्कों में करीब 0.22 पाया गया था। यह संख्या सुनने में शायद बहुत तकनीकी लगे, लेकिन इसे आसान तरीके से समझिए।
सहसंबंध (correlation) यानी दो चीजों के बीच एक साथ बदलने की प्रवृत्ति। अगर एक चीज बढ़ती है और दूसरी भी औसतन बढ़ने लगती है, तो उनके बीच सकारात्मक संबंध कहा जाता है। लेकिन 0.18 या 0.22 बहुत मजबूत संबंध नहीं है। अगर सहसंबंध करीब 0.20 है और उसका वर्ग करें तो यह करीब 0.04 आता है। आसान भाषा में कहें तो दोनों के बीच साझा सांख्यिकीय बदलाव करीब 4 प्रतिशत के आसपास बैठता है। बाकी 96 प्रतिशत के आसपास बदलाव दूसरे कारणों से जुड़ा हो सकता है। यही सबसे महत्वपूर्ण बात है।
अगर किसी बड़े शहर में हजारों लोगों का कद और बुद्धिमत्ता परीक्षण का आंकड़ा इकट्ठा किया जाए तो संभव है कि लंबे लोगों का औसत अंक थोड़ा ज्यादा आए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उस शहर में सबसे लंबा व्यक्ति सबसे ज्यादा बुद्धिमान भी होगा। आपके सामने 5 फुट 4 इंच और 6 फुट 2 इंच के दो लोग खड़े हों तो सिर्फ कद देखकर यह बताना लगभग असंभव है कि दोनों में से कौन ज्यादा बुद्धिमान है।
मान लीजिए किसी अध्ययन में पाया गया कि लंबे लोगों के बुद्धिमत्ता परीक्षण के अंक औसतन थोड़े ज्यादा हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि लंबा होने से इंसान ज्यादा बुद्धिमान हो जाता है। कद और बुद्धिमत्ता के बीच दिखाई देने वाले संबंध के पीछे भी कई साझा कारण हो सकते हैं। मसलन, बच्चे को गर्भावस्था के दौरान अच्छा पोषण मिला हो, जन्म के बाद पर्याप्त खाना मिला हो, बार-बार गंभीर संक्रमण न हुआ हो, घर का माहौल अच्छा हो और शिक्षा के अच्छे अवसर मिले हों। ये परिस्थितियां शरीर के विकास और दिमाग के विकास, दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। बाद में जब ऐसे हजारों बच्चों को एक साथ देखा जाता है तो कद और बुद्धिमत्ता के बीच एक छोटा संबंध दिखाई दे सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि कद ने बुद्धि पैदा की।
क्या जीन दोनों को प्रभावित करते हैं?
शोध में इसका भी संकेत मिला है। लगभग 6,800 से ज्यादा लोगों पर किए गए जनरेशन स्कॉटलैंड अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कद और सामान्य संज्ञानात्मक क्षमता के बीच मामूली आनुवंशिक संबंध पाया। आनुवंशिक सहसंबंध करीब 0.28 था। इसका अर्थ यह नहीं है कि कद और बुद्धिमत्ता के लिए एक ही जीन जिम्मेदार है। बल्कि बात इससे कहीं ज्यादा जटिल है।
कद पर बहुत सारे जीन असर डालते हैं। इसी तरह बुद्धिमत्ता भी बहुत सारे जीन और उनके छोटे-छोटे प्रभावों से जुड़ी होती है। इन दोनों गुणों को प्रभावित करने वाले कुछ आनुवंशिक प्रभावों में आंशिक समानता हो सकती है। इसे ऐसे समझिए जैसे दो अलग-अलग रास्तों का कुछ हिस्सा एक ही सड़क से होकर गुजरता है। दोनों रास्ते पूरी तरह एक नहीं हैं, लेकिन शुरुआत में कुछ दूरी तक उनका रास्ता साझा हो सकता है। इसी तरह कद और संज्ञानात्मक क्षमता से जुड़े कुछ आनुवंशिक प्रभाव साझा हो सकते हैं। करीब 7,900 लोगों से जुड़े एक दूसरे आनुवंशिक अध्ययन में भी कद और बुद्धिमत्ता के संबंध में साझा आनुवंशिक प्रभावों के साथ-साथ जीवनसाथी चुनने की प्रवृत्ति की संभावित भूमिका पर चर्चा की गई। लोग साथी चुनते समय पूरी तरह यादृच्छिक फैसला नहीं करते। शिक्षा, सामाजिक स्थिति, व्यक्तित्व और कभी-कभी कद जैसी चीजें भी पसंद को प्रभावित कर सकती हैं। लंबे समय में इससे कुछ गुणों के बीच सांख्यिकीय संबंध बन सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी व्यक्ति के जीन देखकर उसकी बुद्धिमत्ता या कद को पूरी तरह तय किया जा सकता है।
बचपन का खाना और स्वास्थ्य भी हो सकता है बड़ा कारण
कद और बुद्धिमत्ता की कहानी में बचपन की परिस्थितियां बहुत महत्वपूर्ण हैं। गर्भावस्था के दौरान मां का स्वास्थ्य, बच्चे को मिलने वाला पोषण, संक्रमण, बीमारी, नींद, तनाव, परिवार का वातावरण और शिक्षा - ये सभी चीजें बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती हैं। मान लीजिए दो बच्चे हैं। एक बच्चे को बचपन से पर्याप्त खाना, प्रोटीन, जरूरी पोषक तत्व, अच्छी नींद, साफ पानी, स्वास्थ्य सेवा और अच्छी शिक्षा मिलती है। दूसरे बच्चे को लंबे समय तक कुपोषण, बीमारी और खराब सामाजिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इन दोनों बच्चों के शारीरिक विकास में अंतर आ सकता है। उनके दिमागी विकास पर भी असर पड़ सकता है। बाद में अगर हम बड़ी आबादी का आंकड़ा देखें तो हमें लग सकता है कि ज्यादा कद और ज्यादा संज्ञानात्मक क्षमता एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लेकिन असली कहानी में शुरुआती जीवन की परिस्थितियां भी शामिल हैं।
यही वजह है कि वैज्ञानिक जब ऐसे संबंधों का अध्ययन करते हैं तो परिवार की आर्थिक स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी परिस्थितियों को ध्यान में रखने की कोशिश करते हैं।
क्या बड़ा कद मतलब बड़ा दिमाग?
यह सवाल सबसे स्वाभाविक है। अगर लंबे लोगों में औसतन बुद्धिमत्ता थोड़ी ज्यादा दिखाई देती है तो क्या इसकी वजह यह हो सकती है कि उनका दिमाग भी बड़ा होता है? कुछ शोधों में कद और मस्तिष्क के आकार से जुड़े कुछ मापों के बीच सकारात्मक संबंध मिला है। एक ब्रेन मैपिंग स्टडी में कद का संबंध सामान्य संज्ञानात्मक क्षमता, मस्तिष्क के कुल कॉर्टिकल आयतन (Cortical Volume) और कॉर्टिकल सतह (Cortical Surface) क्षेत्र से पाया गया। इससे यह संभावना बनती है कि शरीर के आकार, मस्तिष्क की संरचना और संज्ञानात्मक क्षमता के बीच कुछ साझा जैविक रास्ते हो सकते हैं। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि बड़ा दिमाग अपने-आप ज्यादा बुद्धिमत्ता की गारंटी नहीं देता। मस्तिष्क कोई साधारण डिब्बा नहीं है कि जितना बड़ा होगा, उतनी ज्यादा बुद्धि होगी। मस्तिष्क में अरबों तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं और उनके बीच बेहद जटिल संपर्क होते हैं। तंत्रिका कोशिकाओं के नेटवर्क की व्यवस्था, उनके बीच संपर्क, मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों का काम, विकास, अनुभव, शिक्षा और कई दूसरे कारक संज्ञानात्मक क्षमता को प्रभावित करते हैं। इसलिए यह सूत्र कि "बड़ा शरीर = बड़ा दिमाग = ज्यादा बुद्धि" वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
अगर कद और बुद्धिमत्ता का संबंध है तो फिर छोटे कद के बुद्धिमान लोग?
छोटे कद का होना और कम बुद्धिमान होना दो अलग चीजें हैं। दुनिया में बहुत से छोटे कद के लोग बेहद तेज दिमाग वाले रहे हैं और बहुत से लंबे लोग औसत या उससे कम संज्ञानात्मक क्षमता वाले हो सकते हैं। क्योंकि वैज्ञानिक शोध औसत समूहों की बात करता है। मान लीजिए 10,000 लंबे लोगों और 10,000 छोटे लोगों का औसत निकाला गया। अगर पहले समूह का औसत बुद्धिमत्ता स्कोर थोड़ा ज्यादा निकलता है तो यह दोनों समूहों के हर व्यक्ति पर लागू नहीं होगा। दोनों समूहों के लोग एक-दूसरे में बहुत ज्यादा घुले-मिले होंगे। इसीलिए किसी व्यक्ति के बारे में भविष्यवाणी करने के लिए कद एक बहुत कमजोर संकेत है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी कक्षा में लड़कों का औसत कद लड़कियों से ज्यादा हो सकता है। इससे यह नहीं कहा जा सकता कि हर लड़का हर लड़की से लंबा होगा।
औसत और व्यक्ति के बीच यही फर्क है।
बच्चों में संबंध कुछ ज्यादा क्यों दिख सकता है?
कुछ पुराने दीर्घकालीन अध्ययनों में बच्चों के कद और बाद की बुद्धिमत्ता के बीच अपेक्षाकृत ज्यादा संबंध दिखाई दिया। कुछ उम्रों में लड़कियों के लिए सहसंबंध करीब 0.40 तक भी पाया गया, हालांकि लड़कों में वही पैटर्न उतना साफ नहीं था। इससे पता चलता है कि कद और संज्ञानात्मक क्षमता का संबंध उम्र, लिंग, नमूने और सामाजिक परिस्थितियों के हिसाब से बदल सकता है। बच्चों में शरीर और दिमाग दोनों तेजी से विकसित हो रहे होते हैं। इसलिए शुरुआती जीवन की परिस्थितियों का प्रभाव भी ज्यादा दिखाई दे सकता है। जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता है, उसके अनुभव, शिक्षा, सामाजिक वातावरण और दूसरे कारक संज्ञानात्मक क्षमता में अपना योगदान बढ़ाते हैं। इसलिए किसी एक उम्र के अध्ययन को लेकर पूरी जिंदगी के बारे में निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा।
जुड़वां बच्चों से वैज्ञानिकों को क्या पता चलता है?
कद और बुद्धिमत्ता के रिश्ते को समझने में जुड़वां बच्चों के अध्ययन काफी उपयोगी रहे हैं। क्योंकि जुड़वां बच्चों में आनुवंशिक समानता और पारिवारिक वातावरण की तुलना करना आसान होता है। नॉर्वे के करीब 2,600 पुरुष जुड़वां जोड़ों और डच जुड़वां आंकड़ों पर हुए शोधों में कद और बुद्धिमत्ता के बीच आनुवंशिक हिस्से के प्रमाण मिले हैं। डच अध्ययन में बचपन और किशोरावस्था के दौरान कद और संज्ञानात्मक क्षमता के बीच सकारात्मक संबंध देखा गया। कई उम्रों पर यह संबंध साझा आनुवंशिक प्रभावों से समझाया जा सका। लेकिन फिर वही बात जरूरी है। साझा आनुवंशिक प्रभाव का अर्थ यह नहीं कि कद और बुद्धिमत्ता के वही जीन हैं। कद के लिए हजारों आनुवंशिक बदलाव जिम्मेदार हो सकते हैं और बुद्धिमत्ता भी हजारों छोटे आनुवंशिक प्रभावों से प्रभावित होती है। कुछ हिस्सों में इनके बीच समानता हो सकती है, लेकिन दोनों गुण एक-दूसरे के पर्याय नहीं हैं।
क्या अच्छी जिंदगी जीने वाले बच्चे लंबे और ज्यादा बुद्धिमान होते हैं?
कई मामलों में जीवन की अच्छी शुरुआती परिस्थितियां दोनों चीजों को साथ प्रभावित कर सकती हैं। अगर बच्चे को अच्छा पोषण मिलता है तो उसके शरीर को अपनी आनुवंशिक क्षमता के मुताबिक बढ़ने का बेहतर मौका मिलता है। अगर उसी बच्चे को अच्छी शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और स्वास्थ्य सुविधाएं भी मिलती हैं तो उसके संज्ञानात्मक विकास के लिए भी बेहतर परिस्थितियां बनती हैं। इसके उलट गरीबी, कुपोषण, बीमारी और खराब शिक्षा कई समस्याओं को एक साथ जन्म दे सकती हैं। यही वजह है कि किसी समाज में औसत कद और औसत शैक्षणिक प्रदर्शन के बीच संबंध दिखाई दे सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उस समाज के लोग सिर्फ इसलिए ज्यादा बुद्धिमान हैं क्योंकि उनका औसत कद ज्यादा है। यहां सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
क्या लंबा होना सामाजिक फायदा भी देता है?
लंबा व्यक्ति कई बार लोगों को ज्यादा प्रभावशाली या आत्मविश्वासी दिखाई दे सकता है। समाज में लंबे कद को नेतृत्व, ताकत या प्रभाव से जोड़ने की प्रवृत्ति भी मिलती है। इससे कुछ परिस्थितियों में लंबे लोगों को सामाजिक या पेशेवर फायदा मिल सकता है। अगर लंबे लोगों को औसतन ज्यादा अवसर मिलते हैं और वे बेहतर शिक्षा या नौकरी हासिल करते हैं तो बाद में उनकी उपलब्धियां भी ज्यादा दिखाई दे सकती हैं। लेकिन उपलब्धि और बुद्धिमत्ता एक ही चीज नहीं हैं। किसी व्यक्ति की नौकरी, आय या सामाजिक स्थिति में परिवार, शिक्षा, संपर्क, अवसर, मेहनत, व्यक्तित्व और संयोग तक की भूमिका होती है। इसलिए लंबाई और सफलता के बीच संबंध मिल जाए तो उसे सीधे बुद्धिमत्ता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
क्या कद बढ़ाने से बुद्धिमत्ता बढ़ सकती है?
अगर कोई व्यक्ति किसी तरह अपने शरीर की लंबाई बढ़ा ले तो उसकी बुद्धिमत्ता अपने-आप नहीं बढ़ जाएगी। वयस्क व्यक्ति जूते पहनकर लंबा दिख सकता है या चिकित्सा प्रक्रिया से उसकी लंबाई बदल सकती है, लेकिन इससे उसके दिमाग की संज्ञानात्मक क्षमता अचानक नहीं बदलती। इसी तरह बच्चे को सिर्फ इसलिए ज्यादा खाना खिलाना कि वह लंबा होगा और इसलिए ज्यादा बुद्धिमान बनेगा, पूरी तरह गलत सोच है। बच्चे को पर्याप्त पोषण इसलिए चाहिए क्योंकि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क के विकास के लिए इसकी जरूरत है। सेंटीमीटर सीधे बुद्धिमत्ता में नहीं बदलते।
आनुवंशिकता का मतलब भाग्य तय होना नहीं है
कद और बुद्धिमत्ता दोनों में आनुवंशिक प्रभाव महत्वपूर्ण हैं। लेकिन आनुवंशिकता का मतलब यह नहीं कि किसी व्यक्ति का भविष्य पहले से तय है। यह बात समझना बहुत जरूरी है। अगर किसी आबादी में कद की आनुवंशिकता ज्यादा है, तब भी खराब पोषण उस आबादी की औसत लंबाई को कम कर सकता है। इसी तरह संज्ञानात्मक क्षमता में आनुवंशिक प्रभाव होने के बावजूद शिक्षा, बीमारी, पोषण, सामाजिक वातावरण और दूसरे अनुभव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। आनुवंशिकता किसी व्यक्ति का भाग्य बताने वाला आंकड़ा नहीं है। यह किसी आबादी में लोगों के बीच मौजूद अंतर को समझने का एक सांख्यिकीय तरीका है।
क्या पुरुष ज्यादा लंबे हैं इसलिए ज्यादा बुद्धिमान हैं?
यह सवाल भी कई बार उठता है। पुरुषों का औसत कद महिलाओं से ज्यादा होता है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना कि पुरुष सामान्य रूप से ज्यादा बुद्धिमान होते हैं, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। बुद्धिमत्ता कोई एक चीज नहीं है। अलग-अलग संज्ञानात्मक क्षमताओं में अलग-अलग पैटर्न हो सकते हैं। कुछ पुराने अध्ययनों ने कद और लिंग के अंतर को सामान्य बुद्धिमत्ता से जोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन इसे वैज्ञानिक सहमति नहीं माना जा सकता। औसत कद के अंतर से सामान्य बुद्धिमत्ता का सीधा निष्कर्ष निकालना बहुत बड़ी छलांग होगी।
देशों के कद और बुद्धिमत्ता को जोड़ना क्यों खतरनाक है?
किसी देश के लोगों का औसत कद ज्यादा है और किसी दूसरे देश का कम, तो इससे यह कहना कि पहले देश के लोग ज्यादा बुद्धिमान हैं, वैज्ञानिक रूप से बहुत कमजोर निष्कर्ष होगा। देशों के बीच शिक्षा, आय, पोषण, स्वास्थ्य सेवा, संक्रमण, गरीबी, भाषा और बुद्धिमत्ता परीक्षण की गुणवत्ता में बहुत बड़ा अंतर हो सकता है। यहां तक कि परीक्षा का तरीका और उसमें इस्तेमाल होने वाली भाषा भी नतीजे को प्रभावित कर सकती है। व्यक्ति-स्तर पर मिला छोटा संबंध पूरी जाति, समुदाय या राष्ट्र पर लागू नहीं किया जा सकता। ऐसा करना सांख्यिकी के एक बेहद सामान्य नियम को तोड़ना होगा—छोटे समूह के औसत संबंध से व्यक्ति या पूरे समूह के बारे में बहुत बड़ा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
बुद्धिमत्ता आखिर होती क्या है?
यह सवाल भी उतना ही जरूरी है। शोध में बुद्धिमत्ता को अक्सर बुद्धिमत्ता परीक्षण या सामान्य संज्ञानात्मक क्षमता के जरिए मापा जाता है। इन परीक्षणों में तर्क, शब्दों को समझना, याददाश्त, समस्या हल करना और जानकारी को तेजी से समझने जैसी क्षमताओं के अलग-अलग पहलू शामिल हो सकते हैं। लेकिन इंसानी बुद्धिमत्ता इससे कहीं बड़ी चीज है। रचनात्मकता, सामाजिक समझ, भावनात्मक समझ, व्यावहारिक फैसला लेने की क्षमता, कला, नेतृत्व, अनुभव से सीखना और मुश्किल परिस्थितियों में सही निर्णय लेना किसी एक अंक में पूरी तरह नहीं समा सकते। इसलिए जब कोई वैज्ञानिक अध्ययन कहता है कि "कद और बुद्धिमत्ता में संबंध है", तो अक्सर उसका मतलब होता है कि बड़े समूह में लंबे लोगों का मानकीकृत संज्ञानात्मक परीक्षण स्कोर औसतन थोड़ा ज्यादा पाया गया। इसे "लंबे लोग ज्यादा समझदार होते हैं" कहना शोध को जरूरत से ज्यादा सरल बना देना है।
शोध का निष्कर्ष क्या है?
तो क्या लंबे लोग ज्यादा अक्लमंद होते हैं? वैज्ञानिक जवाब है - औसत स्तर पर कद और मानकीकृत बुद्धिमत्ता परीक्षण के बीच एक छोटा सकारात्मक संबंध कई अध्ययनों में दिखाई दिया है। लेकिन यह संबंध इतना मजबूत नहीं है कि किसी व्यक्ति के कद से उसकी बुद्धिमत्ता का अंदाजा लगाया जा सके। इस रिश्ते में साझा आनुवंशिक प्रभावों की कुछ भूमिका हो सकती है। बचपन का पोषण, गर्भावस्था का स्वास्थ्य, बीमारी, शिक्षा, परिवार और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां भी दोनों गुणों को प्रभावित कर सकती हैं। मस्तिष्क की संरचना और शरीर के आकार के बीच कुछ संबंध इस कहानी का एक और हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन इनमें से कोई भी बात यह नहीं कहती कि लंबा होना बुद्धिमत्ता पैदा करता है। सीधी भाषा में कहें तो लंबाई और बुद्धिमत्ता की कहानी "लंबा शरीर, तेज दिमाग" जैसी आसान कहानी नहीं है।
यह जीन, शुरुआती विकास, पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक वातावरण की मिली-जुली कहानी है। और सबसे अहम बात यह है कि समूहों के औसत को किसी एक व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता। अगर किसी शहर के हजारों लोगों का अध्ययन किया जाए तो संभव है कि 180 सेंटीमीटर लंबे लोगों का औसत संज्ञानात्मक स्कोर 165 सेंटीमीटर लंबे लोगों से थोड़ा ज्यादा निकले। लेकिन दोनों समूहों के लोगों के अंक इतने ज्यादा एक-दूसरे में मिले होंगे कि सड़क पर मिले किसी एक 180 सेंटीमीटर और किसी एक 165 सेंटीमीटर लंबे व्यक्ति को देखकर यह कहना लगभग असंभव होगा कि दोनों में से कौन ज्यादा बुद्धिमान है।
इसलिए अगली बार जब कोई कहे कि "लंबे लोग ज्यादा बुद्धिमान होते हैं", तो सही जवाब होगा - औसत आंकड़ों में थोड़ा संबंध जरूर मिला है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। कद शरीर की लंबाई बताता है, दिमाग की क्षमता नहीं।