Newstrack Special: सच में ऊर्जा देती है या ये सिर्फ़ भ्रम है, शरीर के अंदर क्या करते हैं ऐसे ड्रिंक?

Energy Drink Ke Fayde-Nuksan: क्या एनर्जी ड्रिंक सच में शरीर को ऊर्जा देती है या सिर्फ थकान का एहसास दबाती है? जानिए कैफीन, शुगर, डोपामिन, नींद, दिल, दिमाग और एनर्जी ड्रिंक की लत का पूरा विज्ञान।

Update:2026-08-20 17:50 IST

Energy Drink Ke Fayde-Nuksan

Energy Drink Ke Fayde-Nuksan: एनर्जी ड्रिंक का नाम सुनते ही ऐसा लगता है जैसे उसमें कोई खास ‘ऊर्जा’ हो जो सीधे शरीर में जाकर ताकत पैदा कर देती है। सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। एनर्जी ड्रिंक आपको एनर्जी का अनुभव जरूर करा सकती है लेकिन उसका असली प्रभाव वास्तविक ऊर्जा उत्पादन से ज्यादा मस्तिष्क को थकान कम महसूस कराने और सतर्कता बढ़ाने का होता है। अगर एनर्जी ड्रिंक में शक्कर है तो वह शरीर को कैलोरी के रूप में वास्तविक ऊर्जा भी देती है। लेकिन ‘मैं अचानक तरोताजा हो गया’ वाली अनुभूति मुख्यतः कैफीन और उससे जुड़े उत्तेजक प्रभावों से आती है।

यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण फर्क है कि एनर्जी और अलर्टनेस एक ही चीज नहीं हैं। शरीर की वास्तविक ऊर्जा भोजन के कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन से आती है, जिन्हें सेल्स अंततः एटीपी जैसे एनर्जी अणुओं में बदलती हैं। कैफीन खुद शरीर के लिए महत्वपूर्ण कैलोरी स्रोत नहीं है। वह थके हुए शरीर में नई ऊर्जा पैदा नहीं करता। वह मस्तिष्क के थकान संकेतों को कुछ समय के लिए दबा देता है।

शरीर थका हुआ है, यह दिमाग को कैसे पता चलता है?

दिनभर हमारा मस्तिष्क और शरीर ऊर्जा खर्च करते हैं। सेल्स में एटीपी टूटता है। इस प्रक्रिया से एडेनोसिन नामक पदार्थ से जुड़े संकेत बढ़ते जाते हैं। जैसे-जैसे जागने का समय बढ़ता है मस्तिष्क में एडेनोसिन का प्रभाव बढ़ता है। यह हमें उनींदापन तथा थकान की ओर धकेलता है। इसे एक तरह के जैविक ‘थकान संदेश’ की तरह समझ सकते हैं।

कैफीन की आणविक बनावट ऐसी है कि वह एडेनोसिन के कुछ रिसेप्टरों से जुड़ सकती है। लेकिन वह एडेनोसिन की तरह उनींदापन का संदेश सक्रिय नहीं करती। उलटे वह उन रिसेप्टरों को ब्लॉक कर देती है। वैज्ञानिक विवरणों में कैफीन के उत्तेजक प्रभाव का मुख्य तंत्र एडेनोसिन रिसेप्टर, विशेष रूप से A2A रिसेप्टर, की रुकावट से जुड़ा बताया गया है। मतलब ये कि शरीर वास्तव में थका हुआ हो सकता है। एडेनोसिन मौजूद भी है। लेकिन कुछ समय के लिए उसका संदेश मस्तिष्क तक पूरी ताकत से नहीं पहुँच पाता।

यही वजह है कि कैफीन पीने के बाद आप सोचते हैं - ‘थकान चली गई।’ असल में थकान पूरी तरह गई नहीं बल्कि उसका अनुभव दब गया है।

फिर सतर्कता कैसे बढ़ती है?

जब एडेनोसिन का शांत करने वाला प्रभाव कम होता है, तो मस्तिष्क के उत्तेजक तंत्र अपेक्षाकृत ज्यादा एक्टिव दिखाई देने लगते हैं। इसका असर ध्यान, जागरूकता और प्रतिक्रिया की गति पर पड़ सकता है। व्यक्ति अधिक सतर्क महसूस कर सकता है, नींद कम लग सकती है और किसी काम पर थोड़ी देर अधिक ध्यान बनाए रखना आसान लग सकता है। इसी कारण कैफीन को सेंट्रल नर्वस सिस्टम का उत्तेजक पदार्थ माना जाता है। यह दुनिया में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले मनो-सक्रिय पदार्थों में है।

यदि आपने रात में कम नींद ली है और सुबह एनर्जी ड्रिंक पी ली तो दिमाग कुछ समय के लिए अधिक जागा हुआ महसूस कर सकता है। लेकिन पेय ने आपकी नींद की कमी पूरी नहीं की है। यह ठीक वैसा है जैसे कार के डैशबोर्ड पर ‘ईंधन कम है’ वाली चेतावनी को ढक दिया जाए। चेतावनी दिखाई नहीं दे रही, लेकिन टैंक अपने-आप नहीं भर गया।

एनर्जी ड्रिंक में आखिर होता क्या है?

अलग-अलग कंपनियों के उत्पाद अलग हैं, लेकिन सामान्यतः इनमें कैफीन, चीनी या कृत्रिम मिठास, टॉरिन, बी-विटामिन और कभी गुआराना, जिनसेंग, एल-कार्निटीन जैसे पदार्थ हो सकते हैं। वैज्ञानिक समीक्षाओं में भी ऊर्जा पेयों की प्रमुख पहचान कैफीन तथा अक्सर अतिरिक्त चीनी और दूसरे उत्तेजक या पोषण-संबंधी घटकों से की जाती है। इनमें सबसे निर्णायक तत्काल प्रभाव सामान्यतः कैफीन का होता है। ऐसी डिंक्स में टॉरिन का नाम बहुत सुनाई देता है। यह एक अमीनो-सल्फोनिक एसिड है जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से भी मौजूद होता है और हृदय, मांसपेशियों तथा तंत्रिका तंत्र में कई भूमिकाएँ निभाता है। लेकिन ऊर्जा पेय का तत्काल ‘किक’ मुख्यतः टॉरिन से नहीं आता।

बी-विटामिन भी अक्सर बड़े अक्षरों में लिखे जाते हैं। वे शरीर की ऊर्जा चयापचय प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक अवश्य हैं। लेकिन यदि किसी स्वस्थ व्यक्ति में पहले से उनकी पर्याप्त मात्रा है तो अतिरिक्त बी-विटामिन पी लेने से वह अचानक अधिक ऊर्जावान नहीं हो जाएगा।यानी पैकेट पर बहुत कुछ लिखा हो सकता है। लेकिन तत्काल अनुभव में कैफीन सबसे बड़ा खिलाड़ी है।

चीनी क्या करती है?

यदि एनर्जी ड्रिंक में पर्याप्त चीनी है तो कहानी का दूसरा भाग वास्तविक कैलोरी का है। चीनी पचकर ग्लूकोज में बदलती है। ग्लूकोज रक्त में जाता है और शरीर की कोशिकाएँ उसे ऊर्जा के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। यानी इस अर्थ में मीठी एनर्जी ड्रिंक वास्तव में कुछ ऊर्जा देती है।लेकिन यह वही ऊर्जा है जो आपको किसी अन्य मीठे पेय, फल या कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन से मिल सकती है। यह कोई विशेष ‘एनर्जी ड्रिंक ऊर्जा’ नहीं है।

समस्या यह है कि बड़ी मात्रा में चीनी बहुत तेजी से रक्त में जा सकती है। इसके जवाब में इंसुलिन बढ़ता है। कुछ लोगों को थोड़ी देर बाद ऊर्जा गिरती हुई महसूस हो सकती है, हालांकि ‘शुगर क्रैश’ का अनुभव हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में एक जैसा नहीं होता। यदि ऐसी मीठी ड्रिंक रोज ली जाए तो अतिरिक्त चीनी कुल कैलोरी बढ़ा सकती है। WHO लंबे समय से चीनी-युक्त पेयों के अधिक सेवन को मोटापा, टाइप-2 मधुमेह और दाँतों की समस्या से जोड़कर सेवन कम करने की सलाह देता है।

इसलिए शुगर-फ्री एनर्जी ड्रिंक में कैलोरी वाली ‘ऊर्जा’ लगभग नहीं हो सकती, फिर भी व्यक्ति बहुत जागा हुआ महसूस कर सकता है। यही सबसे अच्छा प्रमाण है कि उस ‘एनर्जी’ अनुभव का बड़ा हिस्सा उत्तेजना है, कैलोरी नहीं।

यह असर कितनी जल्दी शुरू होता है?

कैफीन पेट और छोटी आंत से तेजी से अवशोषित हो जाती है। आम तौर पर सेवन के कुछ समय बाद खून में इसका स्तर बढ़ने लगता है और लगभग आधे से एक घंटे के आसपास प्रभाव स्पष्ट महसूस हो सकता है, हालांकि व्यक्ति, भोजन और खुराक से समय बदलता है। कैफीन का असर कई घंटों तक रह सकता है। इसी कारण शाम को ली गई एनर्जी ड्रिंक रात की नींद खराब कर सकती है, भले व्यक्ति को लगे कि ‘अब तो असर खत्म हो गया।’

नींद पर यही प्रभाव सबसे अधिक अनदेखा किया जाता है। मान लें कोई व्यक्ति दोपहर बाद थकान में एनर्जी ड्रिंक पीता है। शाम को वह बेहतर महसूस करता है। लेकिन रात की नींद थोड़ी खराब होती है। अगली सुबह वह और थका हुआ उठता है। फिर उसे दोबारा कैफीन चाहिए।इस तरह थकान → कैफीन → खराब नींद → ज्यादा थकान → ज्यादा कैफीन का चक्र बन सकता है।

क्या इससे डोपामिन भी बढ़ता है?

कैफीन का प्रभाव पुरस्कार और प्रेरणा तंत्र पर भी पड़ सकता है। लेकिन इसे ‘डोपामिन बम’ कहना गलत होगा। उसका मुख्य कार्य एडेनोसिन रिसेप्टरों को रोकना है। इससे कुछ डोपामिन संबंधी तंत्रों की सक्रियता प्रभावित हो सकती है, विशेष रूप से स्ट्रायटम में।यही कारण है कि कैफीन केवल जागने का अनुभव नहीं देती; कई लोगों को काम शुरू करने की इच्छा, हल्की प्रेरणा और बेहतर मूड भी महसूस होता है। लेकिन यह कोकीन या एम्फेटामिन जैसे शक्तिशाली उत्तेजक नशों के स्तर का डोपामिन प्रभाव नहीं है।

दिल पर क्या असर पड़ता है?

कैफीन और ऊर्जा पेयों के उत्तेजक प्रभाव से कुछ लोगों में हृदय गति और रक्तचाप अस्थायी रूप से बढ़ सकते हैं। 2025 की एक व्यापक समीक्षा में ऊर्जा पेयों के सेवन के साथ हृदय गति, रक्तचाप और हृदय की विद्युत गतिविधि के QTc अंतराल में बदलाव जैसे प्रभावों पर चिंता जताई गई। स्वस्थ व्यक्ति में एक सामान्य मात्रा हमेशा खतरनाक नहीं होती लेकिन समस्या खुराक और व्यक्ति की संवेदनशीलता से जुड़ी है। यदि कोई जल्दी-जल्दी कई कैन पी जाए, पहले से दिल की लय की समस्या हो, बहुत अधिक व्यायाम कर रहा हो, डीहाईड्रेटेड हो या दूसरे उत्तेजक पदार्थ भी ले रहा हो तो जोखिम बढ़ सकता है। इसके लक्षण हो सकते हैं – तेज धड़कन लगना, हाथ काँपना, बेचैनी, सिरदर्द, चक्कर, घबराहट या कभी अधिक गंभीर हृदय-लय विकार।

खिलाड़ियों को इससे फायदा क्यों होता है?

कैफीन केवल थकान का भ्रम नहीं पैदा करती। कुछ परिस्थितियों में यह खेल प्रदर्शन में वास्तविक सुधार भी कर सकती है। कारण यह है कि जब थकान की अनुभूति कम होती है तो व्यक्ति कुछ समय तक अधिक प्रयास कर सकता है। ध्यान और प्रतिक्रिया बेहतर हो सकती है। कुछ शारीरिक प्रदर्शन में कैफीन का लाभ अच्छी तरह स्थापित है। इसलिए ‘एनर्जी ड्रिंक केवल भ्रम है’ कहना भी पूरी तरह सही नहीं होगा। बेहतर उत्तर है कग यह शरीर में नई रहस्यमय ऊर्जा नहीं बनाती। लेकिन थकान की अनुभूति और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की सक्रियता बदलकर वास्तविक प्रदर्शन को कुछ समय के लिए बढ़ा सकती है।मगर यही फायदा अच्छी नींद और पोषण का विकल्प नहीं है।

कॉफी और एनर्जी ड्रिंक में क्या फर्क है?

दोनों में कैफीन हो सकती है, इसलिए मूल उत्तेजक तंत्र काफी समान है। अंतर यह है कि कॉफी प्राकृतिक रूप से कैफीन के साथ अनेक प्लांट केमिकल भी देती है, जबकि एनर्जी ड्रिंक में अक्सर अतिरिक्त चीनी, टॉरिन और दूसरे पदार्थ जोड़े जाते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात मात्रा की है। एक ऊर्जा पेय की बोतल में कैफीन की मात्रा ब्रांड और आकार के अनुसार बहुत बदल सकती है। पुराने और वर्तमान उत्पादों में कुछ बड़े पैक बहुत अधिक कैफीन वाले भी रहे हैं। इसलिए ‘एक कैन’ स्वयं कोई वैज्ञानिक मात्रा नहीं है। पैकेट पर कुल कैफीन कितनी मिलीग्राम है, यह देखना महत्वपूर्ण है।

क्या रोज पीने पर असर कम होने लगता है?

नियमित कैफीन सेवन से शरीर कुछ हद तक टॉलरेंस डेवलप कर सकता है। मस्तिष्क लगातार एडेनोसिन रिसेप्टर बंद होने की भरपाई करने की कोशिश करता है। परिणाम यह हो सकता है कि पहले जिस मात्रा से बहुत तेज जागरूकता मिलती थी, बाद में वही प्रभाव पाने के लिए अधिक मात्रा की इच्छा हो। यदि नियमित यूजर अचानक कैफीन बंद कर दे तो सिरदर्द, उनींदापन, थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान में कमी जैसी वापसी की प्रतिक्रियाएँ हो सकती हैं। यही कारण है कि कुछ लोग कहते हैं, ‘कॉफी या एनर्जी ड्रिंक न मिले तो मैं सामान्य ही नहीं रह पाता।’ कभी-कभी पेय उन्हें सामान्य से ऊपर नहीं ले जा रहा होता। वह कैफीन न मिलने पर उत्पन्न वापसी के लक्षणों को ही कम कर रहा होता है।

क्या एनर्जी ड्रिंक की लत लग सकती है?

कैफीन पर शारीरिक निर्भरता विकसित हो सकती है। इसे हेरोइन या शराब जैसे गंभीर लत के बराबर नहीं रखना चाहिए। लेकिन लगातार अधिक सेवन, सहनशीलता और वापसी के लक्षण वास्तविक हैं। यदि व्यक्ति दिनभर कई एनर्जी ड्रिंक पीने लगे और इनके बिना सिरदर्द, अत्यधिक थकान या चिड़चिड़ापन हो तो यह निर्भरता का संकेत हो सकता है।

किशोरों के लिए ज्यादा चिंता क्यों है?

बच्चों और किशोरों में शरीर का आकार छोटा होता है, मस्तिष्क विकासशील है और नींद की जरूरत अधिक है। इसलिए कैफीन की वही मात्रा वयस्क की तुलना में अधिक प्रभाव डाल सकती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने बच्चों और किशोरों के लिए ऊर्जा पेयों को उचित नहीं माना है और कैफीन तथा चीनी से जुड़े जोखिमों पर लंबे समय से चिंता जताई है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की हाल की रोगी जानकारी किशोरों में भी कैफीन को सीमित रखने की बात करती है और लगभग 100 मिलीग्राम प्रतिदिन से अधिक न लेने की सावधानी बताती है। किशोरों में सबसे बड़ा तत्काल नुकसान कई बार दिल से पहले नींद पर होता है। देर रात एनर्जी ड्रिंक पीकर पढ़ने वाला विद्यार्थी कुछ घंटे जाग सकता है, लेकिन कम नींद अगले दिन स्मृति, ध्यान और सीखने की क्षमता को नुकसान पहुँचा सकती है। तब पेय का तत्काल फायदा अगले दिन की कीमत पर मिलता है।

शराब के साथ एनर्जी ड्रिंक ज्यादा खतरनाक क्यों हो सकती है?

यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कैफीन शराब के नशे को समाप्त नहीं करती। शराब मस्तिष्क के निर्णय, समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता को खराब करती रहती है। लेकिन कैफीन व्यक्ति को अधिक जागा हुआ महसूस करा सकती है। इसलिए उसे लग सकता है कि वह उतना नशे में नहीं है जितना वास्तव में है। यानी नशा कम नहीं हुआ; उनींदापन कम महसूस हुआ।

यही कॉम्बिनेशन व्यक्ति को ज्यादा शराब पीने, वाहन चलाने या जोखिम भरा निर्णय लेने के लिए प्रेरित कर सकता है। FDA ने कैफीनयुक्त अल्कोहलिक पेयों के स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर पहले भी कार्रवाई की है। इसलिए ‘वोडका + एनर्जी ड्रिंक मुझे होश में रखती है’ जैसी धारणा विशेष रूप से खतरनाक है।

व्यायाम से पहले एनर्जी ड्रिंक और स्पोर्ट्स ड्रिंक एक चीज हैं?

स्पोर्ट्स ड्रिंक मुख्यतः पानी, कार्बोहाइड्रेट और इलेक्ट्रोलाइट देने के लिए बनाई जाती है, विशेष रूप से लंबे या तीव्र व्यायाम में। एनर्जी ड्रिंक मुख्यतः उत्तेजक प्रभाव के लिए कैफीन देती है। नामों में समानता होने से लोग इन्हें एक समझ लेते हैं। लेकिन कोई व्यक्ति धूप में लंबी दौड़ लगा रहा हो तो उसे मुख्यतः पानी और इलेक्ट्रोलाइट की जरूरत हो सकती है; बहुत अधिक कैफीन वाला पेय उस आवश्यकता का उचित विकल्प नहीं है।

क्या एनर्जी ड्रिंक शरीर को डिहाइड्रेट करती है?

कैफीन में हल्का मूत्रवर्धक (Diuretic) प्रभाव हो सकता है, विशेषकर अधिक मात्रा में या ऐसे व्यक्ति में जो इसका नियमित उपयोग नहीं करता। लेकिन सामान्य कैफीन सेवन से मिलने वाले पेय का पानी भी शरीर में जाता है, इसलिए यह कहना कि ‘एक एनर्जी ड्रिंक पीते ही शरीर निर्जलित हो जाएगा’ अतिशयोक्ति है। मगर गर्म वातावरण, लंबे व्यायाम, बहुत पसीना और बड़ी कैफीन मात्रा के संयोजन में केवल एनर्जी ड्रिंक पर निर्भर रहना उचित नहीं है। पानी और आवश्यकता के अनुसार इलेक्ट्रोलाइट अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

कितनी कैफीन सुरक्षित मानी जाती है?

यह उम्र, शरीर के आकार, गर्भावस्था, दवाओं और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। स्वस्थ वयस्कों में मध्यम कैफीन सेवन सामान्यतः सहनीय माना जाता है।लेकिन संवेदनशीलता बहुत अलग-अलग होती है।कुछ लोग 100 मिलीग्राम पर भी धड़कन और चिंता महसूस कर सकते हैं, जबकि नियमित कॉफी पीने वाला व्यक्ति ज्यादा मात्रा सह सकता है।यहाँ ‘सह लेना’ और ‘स्वास्थ्य के लिए आदर्श’ भी एक चीज नहीं है। गर्भावस्था में कैफीन शरीर से धीमी गति से निकलती है और WHO अधिक सेवन से बचने की सलाह देता है क्योंकि उच्च मात्रा भ्रूण वृद्धि और जन्म परिणामों से जुड़ी चिंताओं के साथ देखी गई है।

‘शुगर फ्री’ एनर्जी ड्रिंक क्या स्वस्थ विकल्प है?

शुगर फ्री ड्रिंक में चीनी और कैलोरी कम हो सकती हैं, इसलिए अत्यधिक चीनी वाली ड्रिंक की कुछ समस्याएँ कम होती हैं। लेकिन कैफीन वहीं रहती है।इसलिए यदि समस्या धड़कन, चिंता, नींद या कैफीन निर्भरता है तो शुगर-फ्री लेबल उसका समाधान नहीं करता।वह ‘कम चीनी वाली एनर्जी ड्रिंक’ है, ‘कैफीन से मुक्त स्वास्थ्य पेय’ नहीं।

क्या बी-विटामिन आपको अतिरिक्त ऊर्जा देते हैं?

यह मार्केटिंग में सबसे दिलचस्प भ्रमों में से है। विटामिन B1, B2, B3, B6 और B12 शरीर की ऊर्जा चयापचय प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक हैं। इसका अर्थ है कि इनकी कमी हो तो शरीर ऊर्जा ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।लेकिन यदि आपके शरीर में इनकी कमी नहीं है तो अतिरिक्त मात्रा पी लेने से ऊर्जा उत्पादन किसी टर्बो इंजन की तरह नहीं बढ़ जाता।

उदाहरण के लिए B12 की कमी से एनीमिया और कमजोरी हो सकती है। ऐसी कमी वाले व्यक्ति को उपचार से वास्तविक ऊर्जा और स्वास्थ्य सुधार मिलेगा। लेकिन स्वस्थ व्यक्ति को बहुत अधिक B12 देने से वह सुपरचार्ज नहीं हो जाता।’ऊर्जा चयापचय में मदद करता है’ और ‘तुरंत अतिरिक्त ऊर्जा देता है’, इन दोनों वाक्यों में बड़ा अंतर है।

टॉरिन क्या वास्तव में शक्तिशाली उत्तेजक है?

यह भी अक्सर गलत समझा जाता है। टॉरिन स्वयं कैफीन जैसा केंद्रीय तंत्रिका उत्तेजक नहीं है। शरीर इसे प्राकृतिक रूप से बनाता है और यह हृदय, मांसपेशी तथा तंत्रिका कोशिकाओं में कई जैविक भूमिकाएँ निभाता है।एनर्जी ड्रिंक में कैफीन और टॉरिन एक साथ होते हैं, इसलिए लोग कई बार पेय के पूरे प्रभाव का श्रेय टॉरिन को भी देते हैं। लेकिन तत्काल जागरूकता का सबसे बड़ा कारण फिर भी कैफीन है।

क्या ‘एनर्जी क्रैश’ वास्तव में होता है?

हो सकता है, लेकिन इसके कई कारण हो सकते हैं। पहला, कैफीन का असर कम होने पर एडेनोसिन फिर अपने रिसेप्टरों पर काम करने लगता है। यदि व्यक्ति पहले से नींद से वंचित था तो मूल थकान वापस ज्यादा स्पष्ट महसूस हो सकती है। दूसरा, यदि पेय में बहुत चीनी है तो ग्लूकोज और इंसुलिन के तेज बदलाव कुछ लोगों में सुस्ती की अनुभूति से जुड़े हो सकते हैं। तीसरा, व्यक्ति ने कैफीन के कारण शरीर की वास्तविक थकान को कुछ समय दबाकर जरूरत से ज्यादा काम कर लिया हो सकता है। यानी क्रैश अक्सर इसलिए लगता है क्योंकि कर्ज चुकाना बाकी था। कैफीन ने कुछ घंटे केवल उसकी वसूली टाल दी थी।

अगर पढ़ाई करनी हो तो क्या एनर्जी ड्रिंक मदद करेगी?

यदि व्यक्ति नींद में है तो कैफीन थोड़े समय के लिए जागरूकता और ध्यान सुधार सकती है। इसलिए रात भर पढ़ने वाला विद्यार्थी इसे उपयोगी समझ सकता है। लेकिन स्मृति का निर्माण केवल जागकर पढ़ने से नहीं होता। नींद स्वयं याददाश्त को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।यदि एनर्जी ड्रिंक के कारण विद्यार्थी चार घंटे ज्यादा जागा लेकिन फिर नींद बहुत कम हुई तो अगले दिन सीखने और स्मृति में नुकसान हो सकता है। इसलिए लंबी अवधि की पढ़ाई में पर्याप्त नींद एनर्जी ड्रिंक से कहीं अधिक प्रभावी ‘ब्रेन हैक’ है।

आखिर यह एनर्जी है या भ्रम?

अब सबसे सटीक उत्तर दिया जा सकता है। यदि ड्रिंक में चीनी है तो वह कुछ वास्तविक कैलोरी ऊर्जा देती है। यदि उसमें कैफीन है तो वह मुख्यतः थकान का संकेत दबाकर जागरूकता, ध्यान और कभी-कभी शारीरिक प्रदर्शन बढ़ाती है। इसलिए अनुभव न तो पूरा भ्रम है और न ही ‘बोतल में भरी अतिरिक्त शक्ति’। यह कुछ वैसा है जैसे किसी थके हुए व्यक्ति के मस्तिष्क में थकान का अलार्म थोड़ी देर धीमा कर दिया जाए।आप वास्तव में अधिक जागरूक हो सकते हैं। आपका प्रदर्शन कुछ समय बेहतर हो सकता है। लेकिन जिस नींद, आराम और पोषण की कमी के कारण शरीर थका था, वह कमी बनी रहती है।

यही एनर्जी ड्रिंक का विज्ञान है। और इसी कारण इनका सबसे बड़ा खतरा हमेशा एक कैन नहीं, बल्कि यह विश्वास है कि ‘मैं थका नहीं हूँ क्योंकि अब मुझे थकान महसूस नहीं हो रही।’ थकान केवल असुविधा नहीं। कई बार शरीर का संदेश है कि उसे आराम चाहिए। कैफीन उस संदेश को कुछ घंटे दबा सकती है, शरीर की जैविक जरूरत को रद्द नहीं कर सकती।

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