स्क्रीन की लत बनी सिरदर्द: मोबाइल से माइग्रेन का खतरा 60 प्रतिशत तक बढ़ा, वयस्कों के लिए चेतावनी

Mobile Addiction Symptoms: निमहांस की समीक्षा में सामने आया कि अधिक स्क्रीन टाइम से सिरदर्द और माइग्रेन का जोखिम बढ़ सकता है, वयस्कों में इसका असर सबसे अधिक दर्ज किया गया है।

Update:2026-08-18 17:08 IST

स्क्रीन की लत बनी सिरदर्द: मोबाइल से माइग्रेन का खतरा 60 प्रतिशत तक बढ़ा, वयस्कों के लिए चेतावनी (Photo- Social Media)

New Delhi/Bengaluru: सुबह आंख खुलते ही हाथ में मोबाइल और रात को सोने तक स्क्रीन से चिपके रहने की आदत अब केवल आंखों की रोशनी ही नहीं छीन रही, बल्कि असहनीय सिरदर्द और माइग्रेन का बड़ा कारण भी बन रही है। बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और स्नायु विज्ञान संस्थान (NIMHANS) के शोधकर्ताओं की एक व्यापक समीक्षा में सामने आया है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम वाले लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में माइग्रेन या सिरदर्द का जोखिम करीब 60 प्रतिशत (1.60 गुना) अधिक पाया गया है।

प्रतिष्ठित मेडिकल पत्रिका 'जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी' में प्रकाशित इस अध्ययन में कुल 14,763 प्रतिभागियों से जुड़े 22 अलग-अलग अध्ययनों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया।

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मुख्य विश्लेषण में 10 अध्ययनों के 11,218 लोगों के डेटा को शामिल किया गया। शोध के नतीजे बताते हैं कि स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग वयस्कों को सबसे तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। अधिक स्क्रीन टाइम वाले वयस्कों में माइग्रेन या सिरदर्द की आशंका 87 प्रतिशत तक अधिक दर्ज की गई, जबकि बच्चों और किशोरों में यह जोखिम 46 प्रतिशत पाया गया।

मेलाटोनिन हार्मोन और बॉडी क्लॉक हो रही प्रभावित

निमहांस के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. निशांत गौड़ा के नेतृत्व में किए गए इस शोध में अत्यधिक स्क्रीन टाइम से माइग्रेन ट्रिगर होने के जैविक कारणों को स्पष्ट किया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट स्क्रीन से निकलने वाली कृत्रिम रोशनी आंखों के रेटिना में मौजूद प्रकाश-संवेदनशील (लाइट सेंसिटिव) कोशिकाओं को असामान्य रूप से सक्रिय कर देती है।

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इस उत्तेजना के चलते मस्तिष्क में नींद को नियंत्रित करने वाले 'मेलाटोनिन' हार्मोन का प्राकृतिक स्राव बाधित हो जाता है, जिससे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (बॉडी क्लॉक) बिगड़ जाती है। पर्याप्त और गहरी नींद न मिलने, आंखों पर लगातार तनाव रहने और डिजिटल थकान के कारण न्यूरोलॉजिकल असंतुलन पैदा होता है, जो अंततः गंभीर माइग्रेन, नींद के विकार, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव का रूप ले लेता है।

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि डिजिटल स्क्रीन के अनियंत्रित इस्तेमाल से लोगों के जीवन की गुणवत्ता और मानसिक स्वास्थ्य तेजी से प्रभावित हो रहा है, जिससे बचने के लिए स्क्रीन टाइम में कटौती और समय पर ब्रेक लेना बेहद जरूरी है।

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