भारत ने बनाई कैंसर की ऐसी 'स्मार्ट' दवा, अब कीमोथेरेपी जैसी दर्दनाक इलाज से मिलेगी राहत

वैज्ञानिकों ने RK-251 नाम की नई ‘स्मार्ट’ कैंसर दवा तैयार की है, जो कैंसर कोशिकाओं के अंदर पहुंचकर ही एक्टिव होने के लिए बनाई गई है।

Update:2026-08-20 19:31 IST

RK-251, smart cancer drug: कैंसर के इलाज में एक नई दवा ने उम्मीद जगाई है। भारत के वैज्ञानिकों ने RK-251 नाम की एक ऐसी 'स्मार्ट' दवा तैयार की है, जिसे इस तरह बनाया गया है कि यह मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं के अंदर जाकर ही अपना असर दिखाए। इसका मकसद यह है कि शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम नुकसान पहुंचे।

अभी कैंसर के कई मरीजों का इलाज कीमोथेरेपी से किया जाता है। कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में मदद करती है, लेकिन इसका असर शरीर की कुछ स्वस्थ कोशिकाओं पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से मरीजों को कमजोरी, उल्टी, बाल झड़ना और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसी दवा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो सीधे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर काम करे।

भारत के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार की दवा

यह नई दवा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाले Institute of Advanced Study in Science and Technology (IASST) और IIT गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार की है। इस रिसर्च का नेतृत्व IASST के डॉ. असीस बाला और IIT गुवाहाटी के डॉ. केपी भाबक ने किया।

RK-251 को खास तरीके से तैयार किया गया है। कैंसर कोशिकाओं के अंदर एक खास तरह के हानिकारक अणु ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें Reactive Oxygen Species यानी ROS कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने इसी खासियत का इस्तेमाल दवा को सक्रिय करने के लिए किया है।

 

कैंसर सेल के अंदर पहुंचते ही एक्टिव होगी दवा

जब RK-251 कैंसर कोशिका के अंदर पहुंचती है और वहां ROS का स्तर ज्यादा मिलता है, तो दवा सक्रिय हो जाती है। इसके बाद यह NBDHEX नाम के एक ताकतवर कैंसर-रोधी पदार्थ को रिलीज करती है।

यह पदार्थ कैंसर कोशिकाओं में मौजूद उन प्रोटीन पर हमला करता है, जिनकी मदद से कैंसर सेल जिंदा रहती हैं और इलाज के असर से बचने की कोशिश करती हैं। इस तरह दवा का मुख्य असर कैंसर कोशिकाओं पर पड़ता है।

ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में दिखा अच्छा असर

वैज्ञानिकों ने शुरुआती लैब टेस्ट में इस दवा को ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर की कोशिकाओं पर आजमाया। इन टेस्ट में RK-251 ने कैंसर कोशिकाओं पर मजबूत असर दिखाया, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं को इससे काफी कम नुकसान हुआ।

वैज्ञानिकों ने जेब्राफिश के भ्रूणों पर भी दवा का शुरुआती परीक्षण किया। इस दौरान दवा से किसी बड़ी जहरीली प्रतिक्रिया के साफ संकेत नहीं मिले। इसके अलावा ROS की मौजूदगी में दवा ने वैसा फ्लोरेसेंस भी दिखाया, जैसा वैज्ञानिकों ने उम्मीद की थी।

अभी इंसानों पर टेस्ट होना बाकी

हालांकि इस खबर को कैंसर के इलाज में एक बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि RK-251 कीमोथेरेपी की जगह ले लेगी। फिलहाल इसके शुरुआती स्तर के टेस्ट हुए हैं और इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल से पहले कई और जांच जरूरी हैं।

अगर आगे के परीक्षणों में भी यह दवा सुरक्षित और असरदार साबित होती है, तो भविष्य में यह कैंसर के इलाज का एक नया तरीका बन सकती है, जिसमें कैंसर कोशिकाओं को ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बनाया जा सके।

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