JSSC-CGL समेत 22 एग्जाम रद्द करने के आदेश पर झारखंड HC की रोक, सोरेन सरकार को बड़ा झटका, अभ्यर्थियों को राहत
झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC की परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है।
Jharkhand HC On JSSC CGL Exam: JPSC की परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के बाद झारखंड हाईकोर्ट से हेमंत सोरेन की सरकार को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल, JPSC परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत JPSC की परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द की गई थीं।
दरअसल, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर झारखंड में छात्रों ने करीब 25 दिनों तक आंदोलन किया था। आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए 22 परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी किया था।
सरकार ने क्यों रद्द की थी परीक्षा?
सरकार का कहना था कि JPSC की ओर से कराई जा रही और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। इसके अलावा CID की जांच के दौरान सरकार के सामने कुछ तथ्य भी आए थे। इन्हीं शिकायतों और जांच के आधार पर परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया।
किन-किन परीक्षाओं पर पड़ा असर?
सरकार के फैसले का असर कई महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं पर पड़ा। इनमें ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे पदों की परीक्षाएं शामिल थीं। इसके अलावा सरकारी पॉलीटेक्निक में लेक्चरर, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट और कई प्रशासनिक व तकनीकी पदों की भर्ती परीक्षाएं भी इस सूची में शामिल थीं।
चार याचिकाओं के जरिए कोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में कुल चार याचिकाएं दाखिल की गईं। इनमें 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा में सफल अभ्यर्थी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं में अवधेश कुमार, दीपमाला, सोनम कुमारी और सौरभ सिंह समेत अन्य सफल अभ्यर्थियों के नाम शामिल हैं।
इन अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने बिना उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिए परीक्षा और उसके बाद हुई नियुक्तियों को रद्द कर दिया। उनका तर्क था कि अगर किसी अभ्यर्थी पर गड़बड़ी या अनियमितता का आरोप है तो उसके खिलाफ अलग से जांच होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है।
नौकरी ज्वाइन कर चुके अभ्यर्थियों की भी बढ़ी थी चिंता
इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात यह थी कि कई सफल अभ्यर्थी परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी ज्वाइन भी कर चुके थे। सरकार के आदेश के बाद उनकी नौकरी पर भी सीधा असर पड़ने की आशंका हुई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यदि जांच में किसी विशेष अभ्यर्थी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन बिना व्यक्तिगत जांच और सुनवाई के सभी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करना न्यायसंगत नहीं होगा।