'लद्दाख में स्थापित होगा जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बेंच', अमित शाह के एलान के बाद खाड़ी में खुशी, अब न्याय दूर नहीं
केंद्र सरकार ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की बेंच बनाने को मंजूरी दे दी है।
Ladakh High Court Bench: लद्दाख के लोगों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा लद्दाख के उन लोगों को मिलेगा, जिन्हें हाईकोर्ट से जुड़े मामलों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
दूरदराज के लोगों के लिए आसान होगा न्याय तक पहुंचना
लद्दाख भौगोलिक रूप से काफी बड़ा और पहाड़ी इलाका है। यहां कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में काफी समय लगता है। ऐसे में किसी कानूनी मामले के लिए हाईकोर्ट जाना आम लोगों के लिए मुश्किल और खर्चीला हो सकता है। अमित शाह ने कहा कि लद्दाख में हाईकोर्ट की बेंच बनने से लोगों को अपने कानूनी अधिकारों और सेवाओं के लिए ज्यादा समय और दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे न्याय तक पहुंच आसान होगी और लोगों का समय भी बचेगा।
अभी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का है एक ही हाईकोर्ट
फिलहाल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लिए साझा हाईकोर्ट है। इसकी मुख्य सीटें जम्मू और श्रीनगर में हैं। लद्दाख में अभी हाईकोर्ट की अपनी कोई बेंच नहीं है। ऐसे में लद्दाख के किसी व्यक्ति को ऐसा मामला होने पर, जिसमें हाईकोर्ट की जरूरत हो, जम्मू या श्रीनगर जाना पड़ सकता है। नए फैसले के बाद इस परेशानी को काफी हद तक कम करने की उम्मीद है।
अलग हाईकोर्ट नहीं, साझा हाईकोर्ट की ही होगी बेंच
यह बात समझना जरूरी है कि केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए अलग हाईकोर्ट बनाने का फैसला नहीं किया है। लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की एक बेंच बनाई जाएगी। यानी हाईकोर्ट की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन लद्दाख में उसकी मौजूदगी बढ़ जाएगी। इससे स्थानीय लोगों को हाईकोर्ट से जुड़ी कानूनी सेवाएं अपने क्षेत्र के करीब मिल सकेंगी।
2019 में केंद्र शासित प्रदेश बना था लद्दाख
लद्दाख को 31 अक्टूबर 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इससे पहले जम्मू-कश्मीर एक राज्य था। 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। इसी पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक ही हाईकोर्ट की व्यवस्था लागू हुई। हालांकि, लद्दाख में अब तक हाईकोर्ट की अपनी बेंच नहीं थी।
केंद्र के इस नए फैसले से लद्दाख में न्याय व्यवस्था लोगों के ज्यादा करीब आने की उम्मीद है। खासकर दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह फैसला कानूनी मदद हासिल करने की प्रक्रिया को आसान बना सकता है।