BWF Championship में बंदरों का डर, लंगूर की आवाज बनेगी हथियार

BWF Championship: दिल्ली में BWF विश्व चैंपियनशिप के दौरान बंदरों को स्टेडियम से दूर रखने के लिए लंगूर की आवाज निकालने वाले विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। जानें पूरा मामला।

Update:2026-08-11 16:10 IST

BWF Championship: Langur Calls to Keep Monkeys Away

BWF Championship: दिल्ली के बैडमिंटन कोर्ट में इस बार सिर्फ हवा में इतराती शटल काक की गूंज नहीं, बल्कि लंगूर की आवाज भी सुनाई दे सकती है। वजह है इस स्टेडियम में आने वाले बंदर। दुनिया के दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी 17 अगस्त से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में विश्व चैंपियनशिप के लिए उतरेंगे, तब कोर्ट और खिलाड़ियों की व्यवस्था के अलावा इस बार आयोजक की बंदरों पर भी खास निगरानी रहेगी। जनवरी में हुए इंडिया ओपन के दौरान स्टेडियम में बंदर पहुंचने और मैच के दौरान कबूतर की बीट गिरने जैसी घटनाओं से हुई किरकिरी के बाद आयोजकों ने इस बार अलग तरह की तैयारी की है। बंदरों को स्टेडियम से दूर रखने के लिए तीन ऐसे विशेषज्ञों की सेवाएं ली गई हैं। जो लंगूर की आवाज की हूबहू नकल कर सकते हैं।

लंगूर की आवाज सुनते ही भागते हैं रीसस मकाक

दिल्ली में रीसस मकाक यानी आम तौर पर दिखाई देने वाले बंदरों की संख्या काफी है। ये बंदर इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम और आसपास के इलाकों में भी देखे जाते हैं। आयोजकों ने इन्हें भगाने के लिए किसी तरह के बल प्रयोग के बजाय इनके स्वाभाविक व्यवहार का सहारा लेने का तरीका चुना है।

विशेषज्ञ लंगूर जैसी आवाज निकालेंगे। इसके पीछे वजह यह है कि रीसस मकाक आमतौर पर लंगूर को अपने से बड़ा और संभावित खतरा मानते हैं। आवाज सुनने पर उनके इलाके से दूर चले जाने की संभावना रहती है। इस तरीके में वास्तविक लंगूर को स्टेडियम में लाने की जरूरत नहीं होगी।

इन्हीं विशेषज्ञों को अनौपचारिक तौर पर ‘मंकी व्हिस्परर्स’ कहा जा रहा है। इनमें शामिल जफर के मुताबिक, यह काम उनके परिवार में पीढ़ियों से चला आ रहा है। उन्होंने दिल्ली के कई महत्वपूर्ण इलाकों के अलावा गुरुग्राम, चंडीगढ़ और मथुरा में भी ऐसी सेवाएं देने की बात कही है।

इंडिया ओपन में दर्शक दीर्घा तक पहुंच गया था बंदर

इस असामान्य इंतजाम की वजह जनवरी 2026 में हुआ इंडिया ओपन भी है। उसी इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित टूर्नामेंट के दौरान एक बंदर दर्शक दीर्घा में पहुंच गया था। इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे। एक विदेशी फोटोग्राफर ने भी बंदर की तस्वीर साझा की थी। जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना की चर्चा हुई।

मामला सिर्फ बंदर तक सीमित नहीं था। भारत के एचएस प्रणय और सिंगापुर के लोह कीन यू के मुकाबले के दौरान कोर्ट पर पक्षी की बीट गिरने से मैच दो बार रोकना पड़ा था। इससे आयोजन की साफ-सफाई और तैयारी पर सवाल उठे थे। इंडिया ओपन के दौरान कुछ विदेशी खिलाड़ियों ने भी दिल्ली में आयोजन और ट्रेनिंग से जुड़ी सुविधाओं पर सवाल उठाए थे। ऐसे में विश्व चैंपियनशिप से पहले आयोजकों के लिए जनवरी की कमियों को दूर करना बड़ी चुनौती बन गया।

हिमंता बिस्वा सरमा के ‘बंदर मैच देखने आए तो क्या दिक्कत’ वाले बयान की भी चर्चा

इंडिया ओपन में बंदर पहुंचने के बाद भारतीय बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से इस पर सवाल किया गया था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली से बंदरों को पूरी तरह हटाना संभव नहीं है और वन्यजीव कानूनों के कारण उन्हें छुआ भी नहीं जा सकता। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर बंदर मैच देखने आ जाएं तो इसमें परेशानी क्या है और मजाकिया अंदाज में अगली बार उन्हें केला देने की बात कही थी। उनका कहना था कि बंदर आने पर मैच कुछ देर रोका जा सकता है, क्योंकि यह उनकी प्राकृतिक गतिविधि है। हालांकि विश्व चैंपियनशिप के लिए इस बार आयोजकों का रुख बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है। उनका लक्ष्य यह है कि किसी भी ऐसी स्थिति के कारण मुकाबले बाधित न हों।

असली लंगूर क्यों नहीं लाए जा रहे?

बंदरों को भगाने के लिए पहले दिल्ली में वास्तविक लंगूरों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों और जंगली जानवरों के इस्तेमाल को लेकर आपत्तियों के कारण यह तरीका अब स्वीकार्य नहीं माना जाता। वास्तविक लंगूरों को पकड़कर, बांधकर या व्यावसायिक काम के लिए इस्तेमाल करने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। 2012 में एक ‘लंगूरवाला’ वास्तविक लंगूर के इस्तेमाल के मामले में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत पुलिस कार्रवाई का सामना कर चुका है।

हाल के वर्षों में भी विशेषज्ञों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने बंदरों को भगाने के लिए लंगूरों को कैद में रखने और इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई है।

सिर्फ बंदर नहीं, कबूतरों पर भी रहेगी नजर

विश्व चैंपियनशिप के लिए तैयारी केवल बंदरों तक सीमित नहीं है। जनवरी के इंडिया ओपन में कबूतरों की मौजूदगी और कोर्ट पर बीट गिरने की घटना के बाद इस बार स्टेडियम में पक्षियों की समस्या से निपटने के लिए भी इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों ने कबूतरों को बैठने से रोकने के लिए गैर-विषैले जेल का इस्तेमाल किया है। साथ ही आयोजन स्थल की सफाई और प्रवेश व्यवस्था को भी बेहतर किया गया है।

पीवी सिंधु ने कहा- हंस सकते हैं, लेकिन कोशिश की सराहना होनी चाहिए

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन पीवी सिंधु ने भी बंदरों से निपटने के इस तरीके पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने माना कि लंगूर की आवाज निकालने वाले लोगों को बुलाने का फैसला सुनने में मजेदार लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की तैयारी को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

सिंधु के मुताबिक, भारत दुनिया के खिलाड़ियों और दर्शकों की मेजबानी के लिए तैयार हो रहा है और पर्दे के पीछे कई लोग इस आयोजन को बेहतर बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

17 अगस्त से शुरू होगी विश्व चैंपियनशिप

बीएफडब्ल्यू विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप 17 से 23 अगस्त तक नई दिल्ली में आयोजित होगी। करीब 17 साल बाद भारत को इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी मिली है। ऐसे में आयोजकों पर सिर्फ सफल टूर्नामेंट कराने की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के सामने बेहतर मेजबानी की छवि पेश करने की भी जिम्मेदारी है।

इसी वजह से इस बार कोर्ट की तकनीकी तैयारियों से लेकर सफाई, सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था, कबूतरों और यहां तक कि बंदरों तक पर नजर रखी जा रही है। जनवरी में जिस बंदर ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में दर्शक दीर्घा में पहुंचकर सुर्खियां बटोरी थीं, अब उसे रोकने के लिए इंसानों की आवाज ही हथियार बनने जा रही है।

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