Aligarh News: "स्कूल की एक जांच ने बचा ली जान! 10 साल की नन्दिनी को मिला नया जीवन"
Aligarh News: अलीगढ़ में स्कूल की जांच के दौरान 10 वर्षीय नंदिनी की गंभीर बीमारी का पता चला। समय पर इलाज से उसे नया जीवन मिला।
Aligarh News(Photo-Social Media)
Aligarh News: 12 अगस्त 2026 एक छोटी सी जांच, और एक बच्ची की जिंदगी बदल गई। लोधा ब्लॉक के गांव चिलकौरा की 10 वर्षीय नन्दिनी आज जिस तरह स्कूल जाती है, दौड़ती-खेलती है, ये सब कुछ संभव हुआ है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम यानी आरबीएसके की समय पर हुई पहल से। जन्म से ही हृदय रोग से जूझ रही नन्दिनी को अब सांस लेने में दिक्कत नहीं होती, न ही जल्दी थकान होती है।
नन्दिनी को बचपन से ही सांस फूलना, वजन न बढ़ना, सीने में दर्द और थोड़ा चलने पर थक जाना जैसी शिकायतें थीं। परिजनों ने उसे कई निजी अस्पतालों में दिखाया। दवाइयां चलीं, टेस्ट हुए, लेकिन हालत में सुधार की जगह परेशानी बढ़ती गई। महंगे इलाज का खर्च भी परिवार के लिए भारी पड़ रहा था। उम्मीद लगभग खत्म सी हो रही थी।
इसी बीच जुलाई के पहले हफ्ते में आरबीएसके की मोबाइल स्वास्थ्य टीम नन्दिनी के गांव के स्कूल में पहुंची। टीम का मकसद था स्कूली बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ना। रूटीन जांच के दौरान जब डॉ. सरफराज अंसारी और डॉ. सोनल जुनैजा ने नन्दिनी की जांच की तो उसके दिल की धड़कन और लक्षणों से उन्हें कुछ गड़बड़ लगी। ऑप्ट्रोमेट्रिस्ट अतुल कुमार और स्टाफ नर्स अल्का ने भी अन्य पैरामीटर्स चेक किए।
टीम ने देर नहीं की। उसी दिन नन्दिनी का प्राथमिक परीक्षण कर उसे आगे के इलाज के लिए जिला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। आरबीएसके योजना के तहत 0 से 18 साल तक के बच्चों में 30 प्रकार की बीमारियों की पहचान और निःशुल्क उपचार की सुविधा मिलती है। इसी योजना के माध्यम से जुलाई में नन्दिनी की हृदय की सर्जरी कराई गई। पूरा खर्च सरकार ने उठाया।
सर्जरी के बाद नन्दिनी अब पूरी तरह स्वस्थ है। पहले जो बच्ची दो सीढ़ी चढ़ते ही हांफ जाती थी, आज वह स्कूल में प्रार्थना के बाद पीटी भी करती है। उसका वजन भी बढ़ा है। और चेहरे पर पहले जैसी मुरझाहट नहीं है। खबर मिलते ही नन्दिनी के माता-पिता की आंखें भर आईं। उन्होंने आरबीएसके टीम का आभार जताते हुए कहा कि "अगर स्कूल में जांच न होती तो पता नहीं क्या होता। डॉक्टरों ने हमें नई जिंदगी दी है।"
आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. सरफराज अंसारी ने बताया कि टीम हर महीने जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाती है। अब तक सैकड़ों बच्चों में कुपोषण, दृष्टि दोष, सुनने की समस्या और जन्मजात बीमारियां पकड़ी जा चुकी हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में लगातार थकान, नीला पड़ना, वजन न बढ़ना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं। समय पर इलाज से बड़ी से बड़ी बीमारी को मात दी जा सकती है। नन्दिनी की कहानी इस बात का सबूत है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ कागजों पर नहीं हैं। एक सही समय पर हुआ परीक्षण किसी का पूरा जीवन बदल सकता है। गांव में अब लोग भी अपने बच्चों को नियमित जांच के लिए प्रेरित कर रहे हैं।