Aligarh News: अलीगढ़ में हर गौवंश को मिलेगी डिजिटल पहचान, ईएलसी भी होंगे सक्रिय

Aligarh News: राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के तहत हर पशु का ऑनलाइन रिकॉर्ड बनेगा, वहीं जिले की सातों विधानसभा में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब दोबारा सक्रिय किए जाएंगे।

Update:2026-06-06 20:30 IST

Aligarh News: अलीगढ़ जिले में अब गाय और बैल भी बिना पहचान के नहीं रहेंगे। पशुधन प्रबंधन को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के तहत तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी को लेकर कलैक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा तय की गई।

अब तक जिले में पशुओं का कोई एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसकी वजह से टीकाकरण, नस्ल सुधार और विभिन्न सरकारी योजनाओं की निगरानी में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नए मिशन के लागू होने के बाद जिले के प्रत्येक पशु की एक यूनिक आईडी तैयार की जाएगी। इस डिजिटल पहचान के माध्यम से पशु का स्वास्थ्य रिकॉर्ड, टीकाकरण की स्थिति, नस्ल, उम्र और उसके मालिक की पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। इसके साथ ही पशुपालक का आधार नंबर भी इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक ही पहुंच सकेगा।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस नई व्यवस्था से सड़कों पर गौवंश छोड़ने की समस्या पर भी काफी हद तक नियंत्रण लगाया जा सकेगा। हर पशु की डिजिटल पहचान और उसके मालिक का पूरा विवरण दर्ज होने के बाद यदि कोई पशु लावारिस अवस्था में मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना आसान हो जाएगा। इससे निराश्रित गौवंश की समस्या कम होने की उम्मीद है और पशुपालकों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

मिशन के सफल संचालन के लिए जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे जबकि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिवाकर त्रिपाठी सदस्य सचिव की जिम्मेदारी निभाएंगे। समिति की बैठक प्रत्येक महीने आयोजित की जाएगी ताकि कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा सके।

मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार ने ब्लॉक स्तर पर भी बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी और सभी खंड विकास अधिकारियों से कहा कि पंचायत सचिवों की आधार आधारित आईडी और पासवर्ड तैयार करने के लिए आवश्यक विवरण तत्काल पशु चिकित्सा अधिकारियों को उपलब्ध कराए जाएं।

अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से नस्ल सुधार की प्रक्रिया तेज होगी, पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और सरकारी योजनाओं की निगरानी पहले से अधिक आसान हो जाएगी। मिशन के पूरी तरह लागू होने के बाद अलीगढ़ का पशुधन प्रबंधन डिजिटल व्यवस्था के तहत संचालित होगा और पशुओं से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगी।

लोकतंत्र की पाठशाला को फिर मिलेगी रफ्तार

मतदाताओं को जागरूक करने के अभियान को नई गति देने के लिए अलीगढ़ प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी है। जिला निर्वाचन अधिकारी अविनाश कुमार के निर्देश पर जिले की सातों विधानसभा सीटों पर निष्क्रिय पड़े इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब यानी ईएलसी को दोबारा सक्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


भारत निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन अब स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संचालित ईएलसी का विधानसभा वार डाटा तैयार करेगा। इसके लिए उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, एनआईसी और स्वीप समन्वयकों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।


जिले की खैर, बरौली, अतरौली, छर्रा, कोल, अलीगढ़ और इगलास विधानसभा क्षेत्रों में संचालित सभी ईएलसी की जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि प्रत्येक शिक्षण संस्थान में कितने ईएलसी संचालित हो रहे हैं, उनमें कितने सदस्य हैं, उनके समन्वयक कौन हैं और क्लब का सोशल मीडिया अकाउंट मौजूद है या नहीं। प्रशासन का उद्देश्य युवाओं और नए मतदाताओं को लोकतंत्र, मतदान के महत्व और चुनावी प्रक्रिया की पूरी जानकारी देना है।

सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का अध्ययन कर हर शिक्षण संस्थान तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित प्रारूप में सभी सूचनाएं 8 जून 2026 को दोपहर 12 बजे तक ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध करानी होंगी। इसके बाद जिले की समेकित रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि ईएलसी के दोबारा सक्रिय होने से कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में मतदाता पंजीकरण अभियान, ईवीएम और वीवीपैट डेमो, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगितियां तथा नुक्कड़ नाटक जैसी गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे 18 वर्ष से अधिक आयु के नए मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिलेगी और पुराने मतदाता भी अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति अधिक जागरूक बनेंगे।

अब सभी की नजर 8 जून की तय समय सीमा पर है, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि अलीगढ़ में लोकतंत्र की यह पाठशाला कितनी सक्रिय और मजबूत बन पाई है।

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