सिलेंडर के लिए 'मच्छरदानी सत्याग्रह'! बस्ती में गैस की भारी किल्लत, सड़क पर सोने को मजबूर लोग

Basti Gas Crisis: बस्ती में गैस का हाहाकार! रत्नाकर गैस एजेंसी के बाहर सिलेंडर के लिए सड़क पर मच्छरदानी लगाकर सोने को मजबूर हुए लोग। जानें क्यों 'डिजिटल इंडिया' के दौर में बुजुर्गों और महिलाओं को फुटपाथ पर बितानी पड़ रही है रात। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

Update:2026-04-01 15:33 IST

Basti Gas Crisis: बस्ती जिले में गैस की किल्लत ने आम जनता को जिस मोड़ पर खड़ा कर दिया है, उसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। क्या आपने कभी सोचा है कि एक रसोई गैस के सिलेंडर के लिए किसी को सड़क पर मच्छरदानी लगाकर रात बितानी पड़ सकती है? जी हां, यह कोई फिल्मी सीन नहीं बल्कि बस्ती के रत्नाकर गैस एजेंसी के बाहर की कड़वी हकीकत है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक युवक गैस एजेंसी के सामने ही मच्छरदानी तानकर सो रहा है ताकि सुबह सबसे पहले उसे गैस मिल सके। यह दृश्य न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि हमारी वितरण व्यवस्था की बदहाली पर एक करारा तमाचा भी है। आखिर क्यों एक सिलेंडर के लिए लोगों को अपना घर-बार छोड़कर फुटपाथ को बसेरा बनाना पड़ रहा है?

सड़क पर मच्छरदानी और सिलेंडर का पहरा

कोतवाली थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड पर स्थित रत्नाकर गैस एजेंसी इन दिनों किसी छावनी जैसी नजर आ रही है। यहां गैस की इतनी भीषण किल्लत है कि लोग रात के 10 बजे से ही कतारों में लग जा रहे हैं। खाली हाथ लौटने के डर ने लोगों के मन में ऐसा खौफ पैदा कर दिया है कि वे रात भर घर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। कड़ाके की रात और मच्छरों के प्रकोप के बीच एक युवक ने तो हद ही कर दी, उसने एजेंसी के ठीक सामने अपनी मच्छरदानी लगा ली और बिस्तर बिछा लिया। उसका कहना है कि अगर वह घर गया तो सुबह तक नंबर इतना पीछे हो जाएगा कि उसे खाली हाथ लौटना पड़ेगा। यह स्थिति दर्शाती है कि एक आम आदमी के लिए अपनी रसोई का चूल्हा जलाना अब कितना संघर्षपूर्ण हो गया है।

फुटपाथ पर बुजुर्गों और महिलाओं की बेबसी

इस अव्यवस्था की सबसे दर्दनाक तस्वीर वह है जिसमें बुजुर्ग और महिलाएं पूरी-पूरी रात फुटपाथ पर जागकर गुजार रहे हैं। नियमित आपूर्ति न होने के कारण इन लोगों के पास और कोई विकल्प नहीं बचा है। बुजुर्गों को इस उम्र में अपनी सेहत की परवाह किए बिना सिलेंडर के लिए रात भर पहरा देना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि घर में चूल्हा नहीं जल रहा और बच्चे भूखे हैं, ऐसे में वे मजबूरन यहां लाइन में लगी हैं। घंटों इंतजार के बाद भी जब ट्रक नहीं आता या गैस खत्म होने का बोर्ड लग जाता है, तो इन लोगों की हताशा अब उग्र नाराजगी में बदल रही है। फुटपाथ पर सोती इन महिलाओं और बुजुर्गों की तस्वीरें प्रशासन के दावों की पोल खोल रही हैं।

प्रशासन की खामोशी और जनता की पुकार

गैस वितरण व्यवस्था में आई इस सेंध ने स्थानीय निवासियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। लोगों का आरोप है कि एजेंसी और प्रशासन के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस अमानवीय स्थिति को पूरी दुनिया के सामने ला दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। नाराज ग्राहकों ने अब सीधे तौर पर जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि गैस की नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाए। लोग पूछ रहे हैं कि क्या डिजिटल इंडिया के दौर में भी एक गैस सिलेंडर के लिए पूरी रात सड़क पर मच्छरदानी लगाकर सोना ही उनकी नियति है? आने वाले दिनों में अगर सप्लाई नहीं सुधरी तो यह गुस्सा किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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