Chandauli News: नौगढ़ में गैस संकट गहराया, हफ्तों बाद भी नहीं मिल रहे सिलेंडर
Chandauli News: चंदौली के नौगढ़ क्षेत्र में रसोई गैस की भारी किल्लत से लोग परेशान, बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर, चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हुए उपभोक्ता।
नौगढ़ में गैस संकट गहराया, हफ्तों बाद भी नहीं मिल रहे सिलेंडर (Photo- Newstrack)
Chandauli News: एक ओर जहाँ सरकार डिजिटल इंडिया और आधुनिक सुख-सुविधाओं का दावा कर रही है, वहीं चंदौली जिले के नौगढ़ बाजार और ग्रामीण अंचलों में रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है। क्षेत्र की गैस एजेंसियों की लापरवाही के कारण हजारों उपभोक्ता बुकिंग कराने के बाद भी खाली सिलेंडर लेकर भटकने को मजबूर हैं।
एजेंसियों की मनमानी, उपभोक्ता परेशान
क्षेत्र में सक्रिय बीपीएस भारत गैस नौगढ़, गुरु इंडेन गैस मझगावां, चकिया भारत गैस और भारत गैस बरहुआ अपने उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस की बुकिंग कराए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन गोदामों से उन्हें बार-बार खाली हाथ वापस लौटा दिया जाता है।
मिड-डे मील और दफ्तरों पर भी असर
गैस की इस किल्लत ने केवल आम आदमी ही नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था को भी प्रभावित किया है।
स्कूलों में संकट:प्राथमिक विद्यालयों में गैस न होने के कारण बच्चों का 'मिड-डे मील' तैयार करने में भारी समस्या आ रही है।
कर्मचारी बेहाल:नौगढ़ में कार्यरत सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों के अधिकारी और कर्मचारी, जो अकेले रहकर ड्यूटी करते हैं, उन्हें अब खाने के लिए होटल या पुराने तरीकों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
शादी-विवाह के मौसम में बढ़ी मुश्किलें
वर्तमान में लग्न और शादी-विवाह का सीजन चल रहा है। ऐसे में वर और वधू पक्ष के लोगों के सामने मेहमानों के लिए खाना बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सिलेंडर न मिलने के कारण कई घरों में खुशियों के बीच चूल्हे का धुआं और लकड़ी जुटाने की जद्दोजहद देखी जा रही है।
"अच्छे दिन" के दावों पर उठ रहे सवाल
इक्कीसवीं सदी के इस दौर में भी नौगढ़ के लोग धुएं वाले चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं। परेशान ग्रामीण अब मोदी सरकार के 'अच्छे दिन' वाले वादों को याद कर तंज कस रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उज्ज्वला योजना और गैस सब्सिडी जैसी बातें जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
चुनाव में सबक सिखाने की तैयारी
गैस की इस लगातार किल्लत और प्रशासन की चुप्पी से जनता में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। आक्रोशित उपभोक्ताओं का कहना है कि वे आगामी आम चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे अपने साथ हो रहे इस व्यवहार का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दे सकें।