Chitrakoot News: विधानसभा घेराव को जा रहे ग्राम प्रधानों को पुलिस ने रोका, नारेबाजी के साथ प्रदर्शन
Chitrakoot News: चित्रकूट में ग्राम प्रधानों को विधानसभा घेराव के लिए लखनऊ जाते समय पुलिस ने रोक दिया। प्रधानों ने कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर नारेबाजी की और सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया।
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Chitrakoot News: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल इसी महीने 26 मई को समाप्त होने वाला है। इससे पहले ग्राम प्रधान अपने कार्यकाल को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि समय से पहले चुनाव न होने की स्थिति में ग्राम पंचायतों के संचालन की जिम्मेदारी वर्तमान प्रधानों को ही सौंपी जानी चाहिए। प्रधान शासन स्तर पर कार्यकाल समाप्त होने से पहले पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी का विरोध कर रहे हैं।
लखनऊ में बुधवार को ग्राम प्रधान संगठन ने इसी मांग को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। इसमें शामिल होने के लिए प्रधान संघ जिलाध्यक्ष सुनील शुक्ला के नेतृत्व में लगभग आधा सैकड़ा से अधिक ग्राम प्रधान लखनऊ जा रहे थे। पुलिस और प्रशासन ने प्रधानों को रोकने के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी।प्रधान कौशांबी के रास्ते लखनऊ जा रहे थे। जैसे ही प्रधानों का जत्था कौशांबी-चित्रकूट बॉर्डर स्थित यमुना पुल के पास पहुंचा, वहां पहले से ही पुलिस बल के साथ मौजूद सीओ राजकमल, थाना प्रभारी अनिल गुप्ता और रैपुरा थानाध्यक्ष राम सिंह ने उन्हें रोक लिया। पुलिस ने पुल के दोनों ओर घेराबंदी कर प्रधानों के जत्थे को आगे बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रधान आक्रोशित हो गए और सड़क पर ही नारेबाजी शुरू कर दी। प्रधानों ने लखनऊ जाने के लिए कई बार प्रयास किया, जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों से तीखी बहस भी हुई, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। करीब एक घंटे तक चले हंगामे और नारेबाजी के बाद सभी प्रधानों को राजापुर थाने लाया गया, जहां पुलिस और प्रधान संघ पदाधिकारियों के बीच लंबी वार्ता हुई। बाद में सभी को वापस भेज दिया गया।प्रधान संघ जिलाध्यक्ष सुनील शुक्ला ने कहा कि प्रदेश सरकार लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश कर रही है। ग्राम प्रधान जनता के सीधे चुने हुए प्रतिनिधि हैं, लेकिन सरकार जानबूझकर पंचायत चुनाव टाल रही है और प्रशासक नियुक्त कर गांवों की सत्ता नौकरशाही के हाथों में सौंपना चाहती है।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतें लोकतंत्र की बुनियाद हैं। यदि चुने हुए प्रधानों को हटाकर प्रशासक बैठाए गए तो यह जनता के जनादेश का खुला अपमान होगा। प्रधान संघ इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए और पंचायत संचालन के सभी अधिकार प्रधानों के पास ही रहने चाहिए। यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन होगा।उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानों को लखनऊ जाने से रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। प्रधान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने जा रहे थे, लेकिन सरकार ने पुलिस बल के दम पर उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद प्रधानों को रोका नहीं जा सका और जिले से करीब डेढ़ सौ प्रधान लखनऊ आंदोलन में पहुंच गए।
सीओ राजकमल ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रधानों को शांतिपूर्वक रोका गया और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।इस दौरान प्रधान लवदीप शुक्ला (खरसेड़ा), रंजीत सिंह (कलवारा), रामेश्वर (सगवारा), ईंदल (बीर्धुमाई), रामबाबू शुक्ला (शालिकपुर), रामरूप (दरसेड़ा), अनिल (बरेठी), लवकुश (खरौंध), सुभाषचंद्र (सुरसेन), कमल सिंह (सरैया), उदित (अर्जुनपुर), फलेश यादव, देवनाथ (दहिनी), जवाहरलाल (कलवारा बुजुर्ग) आदि प्रधान मौजूद रहे।