Jhansi News: डॉ. रिचा सेंगर को मिली पीएचडी उपाधि, नारीवादी मुद्दों पर किया शोध कार्य
Jhansi News: बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी में डॉ. रिचा सेंगर को पीएचडी उपाधि मिली, "भारत में नारीवादी मुद्दे" विषय पर किया शोध।
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Jhansi News: बुन्देलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में आज आयोजित मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोसे) के सफल आयोजन के उपरांत शोधार्थी रिचा सेंगर को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने "भारत में नारीवादी मुद्दे: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन" विषय पर अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
शोध कार्य का निर्देशन वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई गवर्नमेंट गर्ल्स डिग्री कॉलेज, झांसी की प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. ज्योति सिंह गौतम के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शोध की मौखिक परीक्षा एवं मूल्यांकन उज्जैन से पधारे विषय विशेषज्ञ प्रो. गोपाल कृष्ण शर्मा द्वारा किया गया। विशेषज्ञ ने शोधार्थी के शोध की विषयवस्तु, शोध पद्धति, निष्कर्षों तथा समकालीन सामाजिक परिप्रेक्ष्य में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की और शोध कार्य को संतोषजनक एवं उपयोगी बताया। इस दौरान अधिष्ठाता कला संकाय प्रोफेसर पुनीत बिसारिया एवं मानविकी एवं अनुप्रयोगात्मक समाज विज्ञान संस्थान के समन्वयक प्रोफ़ेसर मुन्ना तिवारी मौजूद रहे।
अपने शोध में रिचा सेंगर ने भारतीय समाज में महिलाओं से जुड़े विभिन्न नारीवादी विमर्शों, लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, महिला अधिकारों तथा बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाओं की भूमिका का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया है। यह शोध समकालीन सामाजिक विमर्शों एवं महिला अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला माना जा रहा है।
रिचा सेंगर उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (एस.आई.) के पद पर कार्यरत रमेश सिंह सेंगर की पुत्री हैं। उनका पैतृक निवास उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन स्थित ग्राम ऊमरी में है। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शोध निर्देशक, शिक्षकों तथा परिवारजनों के सतत मार्गदर्शन एवं सहयोग को दिया। पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त करने पर विश्वविद्यालय परिवार, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं शुभचिंतकों ने रिचा सेंगर को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनका शोध समाज में महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और नारी अध्ययन से जुड़े विषयों पर नए विमर्श को प्रोत्साहित करेगा तथा अकादमिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री सिद्ध होगा।