Jhansi News: क्या था मैरी हत्याकांड? जिसकी पैरवी करने पर हुई अधिवक्ता की हत्या, अब तीन को उम्रकैद
Jhansi News: झांसी के चर्चित मैरी हत्याकांड की पैरवी कर रहे अधिवक्ता पुष्पराज की हत्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।
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Jhansi News: झांसी के चर्चित मैरी हत्याकांड की पैरवी करने वाले अधिवक्ता पुष्पराज की हत्या के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने तीन आरोपियों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी है। वहीं अदालत के इस फैसले के बाद करीब 19 साल पुराने मामले में न्यायिक प्रक्रिया एक अहम मुकाम पर पहुंच गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति सलिल कुमार और न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार शामिल थे, ने बुधवार को सुनवाई के दौरान निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने आरोपी कृष्णपाल उर्फ लाला, भगवानदास और ऋषिपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई।
अधिवक्ता पुष्पराज कर रहे थे पैरवी
हाईकोर्ट में मृतक पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट महेश चंद्र चतुर्वेदी और अधिवक्ता हरिशचंद्र मिश्रा ने बताया कि 1 जुलाई 2007 की रात अधिवक्ता पुष्पराज अपने परिवार के साथ घर पर मौजूद थे। उसी दौरान मैरी गांव निवासी कृष्णपाल उर्फ लाला, भगवानदास और ऋषिपाल हथियारों से लैस होकर उनके घर पहुंचे।बताया गया कि आरोपी बंदूक, कुल्हाड़ी, भाला और फरसा लेकर आए थे। उन्होंने अधिवक्ता पुष्पराज पर मैरी हत्याकांड की पैरवी छोड़ने का दबाव बनाया। जब पुष्पराज ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उन्हें घर से बाहर खींच लिया और बेरहमी से हमला कर दिया।हमले में पुष्पराज गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बचाने पहुंचे उनके भाई मनोज, पत्नी विमला देवी और मां बिट्टी देवी पर भी आरोपियों ने हमला कर दिया। बाद में परिजन घायल पुष्पराज को झांसी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिजनों की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा
घटना के बाद मृतक अधिवक्ता के परिजनों ने थाना नवाबाद में कृष्णपाल उर्फ लाला, भगवानदास और ऋषिपाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
क्या था चर्चित मैरी चौहरा हत्याकांड?
झांसी का मैरी चौहरा हत्याकांड वर्ष 2007 के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा था। 30 मार्च 2007 को थाना कोतवाली क्षेत्र के बड़ागांव गेट बाहर कुछ लोग ताश खेल रहे थे। इसी दौरान काले रंग की चार पहिया गाड़ी और तीन मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।इस हमले में देवेंद्र उर्फ देबू यादव, उसके भाई अरविंद यादव, बृजेंद्र यादव और सुरेंद्र यादव की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।पुलिस ने इस मामले में सुमित यादव, अरविंद यादव, शिशुपाल यादव, शीतल यादव, रवि यादव, अजब सिंह यादव और लखन यादव समेत कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जांच के बाद सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने पहले भी खारिज की थी जमानत याचिका
मैरी चौहरा हत्याकांड के दोषियों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका भी दाखिल की गई थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया था। अब अधिवक्ता पुष्पराज हत्याकांड में भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।