ज्योतिष सरीखी भारतीय विधाओं का दुनिया मान रही है लोहा : डॉ. दिनेश शर्मा

Dinesh Sharma: कानपुर में 76वें राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि ज्योतिष और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने ज्योतिष में शोध, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पारदर्शिता और नैतिक मानकों पर जोर दिया।

Update:2026-08-23 22:42 IST

Dinesh Sharma

National Astrology Conference: राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि ज्योतिष सरीखी भारत की विधाओं का दुनिया लोहा मान रही है। ज्योतिष भारत की ज्ञान परम्परा का अंग होने के साथ ही खगोलीय गणनाओं से जुडा हुआ है। ज्योतिष और विज्ञान जब एक दूसरे के पूरक बनकर कार्य करते हैं तब भारत की ज्ञान परम्परा का दुनिया में परचम लहराता है। दुनिया के अन्य देशों में भी इसके प्रति आकर्षण बढ रहा है। उनका कहना था कि ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं होकर व्यक्ति को आत्मचिंतन , अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करने का भी माध्यम बने। ज्योतिष का सही ज्ञान रखने वाले भय उत्पन्न करके आर्थिक लाभ नही लेते हैं पर कुछ लोग जब इसे आर्थिक लाभ का साधन बनाते हैं वह इसका दुरुपयोग है।

दुर्गा प्रसाद विद्यानिकेतन, गुजैनी, कानपुर में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित केoएमo दुबे "पद्मेश" द्वारा आयोजित 76वें राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन-2026 एवं सौमित्र दुबे विद्वत शिखर सम्मान समारोह में देशभर से पधारे विद्वान ज्योतिष मनीषियों के मध्य मुख्य अतिथि के रूप सांसद ने कहा कि आज के समय में ज्योतिष और विज्ञान को लेकर बहस होती है पर दोनो का ही अपने अपने स्थान पर बराबर का महत्व है। परम्पराओं पर गर्व के साथ ही उनके अध्ययन में तर्क और शोध की कसौटी को स्वीकार किया जाना चाहिए। आस्था के साथ वैज्ञानिक अनुसंघान को भी साथ चलना चाहिए। भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति में भारतीय परम्पराओं को प्रोत्साहन के लिए अलग से फंड की व्यवस्था की है। ज्योतिष की विधाओं पर शोध किए जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शोध में सामने आने वाले नए ज्ञान का प्रसार होना चाहिए। भारत के ज्ञान को आधुनिक पद्धति से जोडना समय की मांग है।

डॉ. शर्मा ने कहा कि डिजिटल युग में ज्योतिष का स्वरूप बदला है और यह परिवर्तनकारी बन रहा है। पंचाग , कुंडली आदि डिजिटल माध्यम से लोगों के बीच में पहुच रही हैं। इसलिए आनलाइन ज्योतिष में परदर्शिता , विशेषज्ञता और नैतिक मानक जरूरी हो गए हैं। ज्योतिष में कम्प्यूटर का प्रयोग पूरी सतर्कता से किया जाना चाहिए क्योंकि थोडी सी असवाधानी बडा भ्रम पैदा कर सकती है। ज्योतिष का सरलीकरण करके दुनिया के हर कोने में इसका प्रसार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानपुर औद्योगिक नगरी होने के साथ ही शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का केन्द्र भी है। ज्ञान परम्परा के विभिन्न स्वरूप हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी के समय में ज्ञान परम्परा केवल संग्रहालय तक सीमित नहीं है बल्कि इनका विस्तार भी हो रहा है। वर्तमान सरकार के समय में भारत की ज्ञान परम्परा के संरक्षण के साथ उसका दस्तावेजीकरण भी हो रहा है।

सम्मेलन में उपस्थित वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों से अपने शिष्य बनाने और उन्हे अपना ज्ञान देने की अपील करते हुए कहा कि ऐसा करने से इसका प्रसार कई पीढियों तक होगा। इसे आधुनिक उपयोगिता के साथ ही आगे बढाना होगा। लोगों का भरोसा इसपर बढना चाहिए। ये आदि काल से लेकर आदि काल तक चलने वाला ज्ञान है। ये प्रयास होना चाहिए कि ये अंधविश्वास का कारण नहीं बनने पाए।

इस अवसर पर ज्योतिष, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में विद्वानों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन में भाजपा अध्यक्ष शिवराम जी, भाजपा उपाध्यक्ष कानपुर शशांक मिश्रा जी, आचार्यगण इंदु प्रकाश मिश्र जी(इंडिया टीवी), डॉ. सतीश शर्मा जी,राजस्थान, प्रो. पवन सिन्हा जी(आजतक टीवी), के. लेखराज शर्मा,हिमांचल प्रदेश , डॉ. हेमचंद्र पाण्डेय जी,भोपाल, आचार्य रमेश सेमवाल जी, आचार्य शैलेन्द्र पाण्डेय जी,(आजतक टीवी), पं. राहुल राज जी, आचार्य सुभेश शर्मन जी, डॉ. घनश्याम ठाकुर जी, आचार्य अविनाश राय जी, पं. आर.के. शर्मा जी, वास्तुविद अंकिता झुनझुनवाला जी, डॉ. संजीव श्रीवास्तव जी, आचार्य आनंद पाण्डेय जी एवं पं. पंकज त्रिवेदी उपमन्यु जी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बबन शर्मा जी, वरिष्ठ भाजपा नेता विजय सोनी जी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजक आचार्य कें एम दुबे पद्मेश जी एवं सिद्धार्थ दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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