'प्रभु ईसामसीह मंदिर' का छलावा और संस्कृति की आड़: मोहनलालगंज में धर्मांतरण के गहरे नेटवर्क का पर्दाफाश

Lucknow: लखनऊ के मोहनलालगंज में सामने आए कथित धर्मांतरण मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। आरोपी के बैंक खातों, संपत्तियों और संदिग्ध आर्थिक लेनदेन की जांच के साथ पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।

Update:2026-07-31 13:14 IST

Conversion Case

Lucknow: लखनऊ का ग्रामीण इलाका मोहनलालगंज हाल ही में एक ऐसे शातिर धर्मांतरण गिरोह की गतिविधियों का केंद्र बनकर उभरा, जिसने आस्था और स्थानीय संस्कृति के प्रतीकों को ही अपने छलावे का जरिया बना लिया। भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह करने और कानून की नजरों से बचने के लिए गिरोह के मास्टरमाइंड ने मंदिर, संस्कृत मंत्रों और धार्मिक प्रतीकों का एक अनूठा मायाजाल बुना था।

तमिलनाडु से लखनऊ तक: 28 साल पुराना ताना-बाना

करीब 28 वर्ष पूर्व तमिलनाडु से लखनऊ आया डेनियल नाम का व्यक्ति धीरे-धीरे इलाके में अपनी जड़ें जमाने लगा। उसने स्थानीय लोगों का विश्वास जीतने के लिए अत्यधिक सतर्कता और योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू किया। वर्ष 2021 के आसपास मोहनलालगंज के शिवलर गांव में उसने अपने घर के भीतर ही एक चर्च स्थापित कर लिया।

लोगों का संदेह मिटाने और अपनी गतिविधियों को पारंपरिक रूप देने के लिए इस प्रार्थना स्थल का नाम 'प्रभु ईसामसीह मंदिर' रखा गया। इतना ही नहीं, राहगीरों और ग्रामीणों को आकर्षित करने के लिए गांव में बाकायदा इस 'मंदिर' का दिशासूचक (साइन) बोर्ड भी लगा दिया गया था।

'ऊं श्री यीशुख्रीष्टाय नमः' और चमत्कार का झांसा

धर्मांतरण की इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सूक्ष्म और चरणबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता था: सांस्कृतिक घालमेल और मंत्र जाप: प्रार्थना सभा में आने वाले ग्रामीणों से हिंदू धार्मिक शैली की तर्ज पर 'ऊं श्री यीशुख्रीष्टाय नमः' का जाप कराया जाता था, ताकि किसी को भी यह आभास न हो कि यह कोई गैर-पारंपरिक धार्मिक गतिविधि है।

बौद्धिक व आर्थिक प्रलोभन: जब लोग नियमित आने लगे, तो ईसाइयत से जुड़ी धार्मिक पुस्तकों का पाठ शुरू हुआ। शिक्षित लोगों को चमत्कारी बदलावों और जीवन की समस्याओं से मुक्ति का दावा करके घर पर प्रार्थना करने की सामग्री दी जाती थी।

गरीबी का फायदा: आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े-लिखे परिवारों को वित्तीय सहायता, इलाज और आर्थिक प्रलोभन देकर धीरे-धीरे धर्मांतरण के जाल में फंसा लिया जाता था।

विरोध, पुलिस कार्रवाई और बाहरी फंडिंग की जांच

समय के साथ जब गांव और आसपास के क्षेत्रों में धर्मांतरित लोगों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ने लगी, तो स्थानीय निवासियों में असंतोष पनपने लगा। मामला संदिग्ध लगने पर ग्रामीणों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और पुलिस प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गांव में लगा 'प्रभु ईसामसीह मंदिर' का दिशासूचक बोर्ड तुरंत हटवा दिया।

आगे की जांच में गिरोह के वित्तीय स्रोतों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। एडीसीपी साउथ वसंथ रल्लापल्ली के अनुसार, आरोपी डेनियल के बैंक खातों की सघन जांच की गई है, जिसमें बाहरी और संदिग्ध स्रोतों से भारी धनराशि आने की पुष्टि हुई है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां डेनियल व उसकी पत्नी की चल-अचल संपत्तियों, बैंक लेनदेन और इस धर्मांतरण नेटवर्क के संभावित अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय तारों को खंगालने में जुटी हुई हैं।

संस्कृति और आस्था के प्रतीकों का दुरुपयोग कर लोगों की मजबूरियों का फायदा उठाने वाला यह मामला सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक सतर्कता का एक बड़ा उदाहरण है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो रहा है कि इस नेटवर्क की जड़ें सिर्फ एक गांव तक सीमित न होकर आर्थिक फंडिंग के बड़े तंत्र से जुड़ी हो सकती हैं।

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