लखनऊ को मिलेगा 125 करोड़ का सैन्य उपहार: गोमतीनगर के नेहरू एन्क्लेव में आकार लेगा अत्याधुनिक वॉर म्यूजियम और वर्ल्ड-क्लास कन्वेंशन सेंटर

Lucknow: लखनऊ में 125 करोड़ रुपये की लागत से वॉर म्यूजियम और विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर बनने जा रहा है। गोमतीनगर में बनने वाला यह प्रोजेक्ट भारतीय सेना के इतिहास, शौर्य गाथाओं और आधुनिक डिजिटल तकनीक का केंद्र बनेगा।

Update:2026-07-31 14:19 IST

Lucknow News

Lucknow: नवाबों का शहर लखनऊ अब भारतीय सेना के अदम्य साहस, रक्षा विरासत और सैन्य इतिहास के नए राष्ट्रीय केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने जा रहा है। गोमतीनगर स्थित नेहरू एन्क्लेव के पास खाली पड़ी करीब 34 एकड़ जमीन पर रक्षा मंत्रालय और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के साझे प्रयास से 125 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य वॉर म्यूजियम और विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर का निर्माण होने जा रहा है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की पहल पर तैयार यह प्रोजेक्ट लखनऊ को पर्यटन, रक्षा इतिहास और आधुनिक कॉन्फ्रेंस हब के रूप में एक नई बुलंदी पर पहुँचाएगा।

33.97 एकड़ भूमि का मास्टर प्लान: सेल्फ-सस्टेनेबल होगा प्रोजेक्ट

परियोजना के ज़मीनी क्रियान्वयन के लिए सेना अपने भौतिक कब्ज़े वाली 33.97 एकड़ ज़मीन एलडीए को हस्तांतरित करने पर सहमत हो गई है। एलडीए ने इस पूरी जगह को तीन मुख्य हिस्सों में बाँटकर एक आत्मनिर्भर मॉडल तैयार किया है:

म्यूजियम एवं कन्वेंशन सेंटर: 12.87 एकड़ क्षेत्र में मुख्य म्यूजियम कॉम्प्लेक्स, 270-डिग्री इमर्सिव ऑडिटोरियम और अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनेगा।

ग्रीन बेल्ट विकास: पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बनाए रखने के लिए 14 एकड़ हिस्से को पूर्णतः 'ग्रीन बेल्ट' के रूप में विकसित किया जाएगा।

कमर्शियल लैंड बैंक (7.10 एकड़): शेष 7.10 एकड़ जमीन पर व्यावसायिक (Commercial) और मिश्रित-उपयोग (Mixed-use) के भूखंड विकसित किए जाएंगे। इन प्लॉटों की बिक्री से मिलने वाले राजस्व से ही पूरे म्यूजियम और कन्वेंशन सेंटर के निर्माण का खर्च निकाला जाएगा, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

1947 से कारगिल तक: डिजिटल तकनीक से दिखेगा भारत का सैन्य गौरव

यह म्यूजियम पारंपरिक संग्रहालयों से बिल्कुल अलग और भविष्योन्मुखी (Future-ready) होगा। यहाँ भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य को पुरानी ऐतिहासिक फाइलों से निकालकर आधुनिक डिजिटल तकनीकों के ज़रिए जीवित किया जाएगा:

ऐतिहासिक युद्धों की गाथा: प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के भारतीय योगदान से लेकर 1947-48 के भारत-पाक युद्ध, 1962 (चीन युद्ध), 1965, 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और 1999 के कारगिल युद्ध तक के गौरवशाली पन्नों को यहाँ उकेरा जाएगा।

हाई-टेक प्रदर्शनी: 3D प्रोजेक्शन मैपिंग, डिजिटल इंटरैक्टिव डिस्प्ले और अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल माध्यमों का उपयोग करके दर्शकों को युद्ध का वास्तविक अहसास कराया जाएगा।

विशेष सैन्य गैलरी: आधुनिक युद्ध प्रणालियों के अलावा ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट एयरस्ट्राइक, उरी सर्जिकल स्ट्राइक, सियाचिन ग्लेशियर की चुनौतियों और भारतीय नौसेना व वायुसेना की ऐतिहासिक सफलताओं पर समर्पित विशेष गैलरियाँ बनाई जाएंगी।

सिम्युलेटर, ओपन एयर पार्क और युवाओं के लिए प्रेरणा

म्यूजियम में तकनीक और रोमांच का अद्भुत संगम होगा, जो विशेषकर युवाओं और छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करेगा:

हेलीकॉप्टर व टैंक सिम्युलेटर: आगंतुकों को भारतीय सेना के टैंक चलाने और लड़ाकू हेलिकॉप्टर उड़ाने जैसा वास्तविक अनुभव देने के लिए सिम्युलेटर जोन बनाया जाएगा।

ओपन एयर एग्जीबिशन: विशाल परिसर में सेवानिवृत्त हो चुके सैन्य टैंक, तोपें और रक्षा उपकरण खुले आसमान के नीचे प्रदर्शित किए जाएंगे।

स्मृति चिन्ह एवं डिजिटल ज़ोन: परिसर में सैन्य स्मृति वस्तु केंद्र (Military Souvenir Shop) और युवाओं को सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने वाला गाइडेंस डिजिटल ज़ोन भी होगा।

दो साल में बनकर होगा तैयार, एलडीए संभालेगा कमान

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार शासन स्तर पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल चुकी है। सेना से औपचारिक कागजी हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा और इसे आगामी दो वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूरा होने के बाद इस पूरे परिसर के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी भी लखनऊ विकास प्राधिकरण के पास ही रहेगी।

इस ड्रीम प्रोजेक्ट से न केवल राजधानी में वैश्विक स्तर का कॉन्फ्रेंस हब तैयार होगा, बल्कि इससे स्थानीय पर्यटन, नए रोजगार और निवेश के बड़े रास्ते खुलेंगे।

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