Meerut: विनीत शारदा ने मां की स्मृति में मनाया जन्मदिन, अनाथ-दिव्यांग बच्चों की सेवा कर लिया संकल्प
Meerut News: मेरठ में भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा ने अपनी मां संतोष रानी गोयल की स्मृति में जन्मदिन जरूरतमंद और दिव्यांग बच्चों के बीच मनाया। उन्होंने बच्चों को भोजन, फल, मिठाई और वस्त्र वितरित किए।
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Meerut News: जन्मदिन पर केक काटना, बधाइयां लेना और अपनों के साथ खुशियां मनाना... ज्यादातर लोगों के लिए यही जन्मदिन की तस्वीर होती है। लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता और भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा ने अपने जन्मदिन की पूरी तस्वीर ही बदल दी है। जिस तारीख को कभी उनके घर में जन्मदिन की खुशियां मनाई जाती थीं, उसी तारीख को अब मां की याद, सेवा और जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पित किया जा रहा है।8 अगस्त 2024 को उनकी मां संतोष रानी गोयल का निधन हुआ था। संयोग से यही तारीख विनीत शारदा का जन्मदिन भी है। मां के निधन के बाद यह दिन उनके लिए उत्सव के बजाय भावनाओं और स्मृतियों का दिन बन गया। शनिवार को उन्होंने अपनी मां की दूसरी पुण्यतिथि और अपना जन्मदिन अनाथ, दृष्टिबाधित और जरूरतमंद बच्चों के बीच मनाया।
बच्चों को अपने हाथों से कराया भोजन
विनीत शारदा अपने परिवार के साथ लोहिया नगर, हापुड़ रोड स्थित मृजमोहन ब्लाइंड स्कूल पहुंचे। यहां उन्होंने दृष्टिबाधित और जरूरतमंद बच्चों को अपने हाथों से भोजन कराया। बच्चों को फल, मिष्ठान और वस्त्र वितरित किए। इसके बाद परिवार अनाथ आश्रम और गौशाला भी पहुंचा और सेवा कार्य किए।बच्चों के बीच पहुंचकर शारदा का जन्मदिन किसी औपचारिक कार्यक्रम की बजाय एक भावुक पारिवारिक अवसर में बदल गया। बच्चों के साथ समय बिताते हुए वह मां को याद करते नजर आए।
‘मां होतीं तो कहतीं- अपने लिए नहीं, किसी और के लिए खुशियां लेकर जाओ’
विनीत शारदा ने कहा, “पहले मेरा जन्मदिन परिवार और समाज के बीच बड़े उत्साह से मनाया जाता था, लेकिन 8 अगस्त 2024 ने मेरे जीवन की सारी खुशियों का अर्थ बदल दिया। उसी दिन मेरी मां मुझे छोड़कर भगवान के श्रीचरणों में चली गईं।”उन्होंने कहा, “मां की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। उनकी गोद कोई वापस नहीं ला सकता, लेकिन उनके दिए संस्कारों को जीवन में उतारकर उनकी ममता को समाज तक पहुंचाया जरूर जा सकता है।”शारदा के मुताबिक, बच्चों को अपने हाथों से भोजन कराते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे मां उनके सामने खड़ी होकर कह रही हों कि जन्मदिन पर अपने लिए नहीं, किसी और के लिए खुशियां लेकर जाओ।
मां से मिले संस्कारों को बनाया जीवन का रास्ता
शारदा ने बताया कि उनकी मां धर्मपरायण, सेवाभावी और संस्कारवान थीं। सनातन संस्कृति में उनकी गहरी आस्था थी और वह कृपालु जी महाराज को अपने गुरुदेव के रूप में श्रद्धापूर्वक मानती थीं।उन्होंने कहा कि मां ने उन्हें सिखाया था कि धन, पद और प्रतिष्ठा से ज्यादा महत्वपूर्ण संस्कार, सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी है। यही वजह है कि मां के जाने के बाद उनके जन्मदिन का स्वरूप बदल गया।शारदा ने कहा, “सनातन धर्म केवल मंदिर में दीप जलाना नहीं सिखाता, बल्कि उस चेहरे पर मुस्कान लाना भी सिखाता है जहां जीवन ने अंधेरा कर दिया हो। भूखे को भोजन, जरूरतमंद को वस्त्र, अनाथ को अपनापन, दिव्यांग को सम्मान और गौसेवा हमारी संस्कृति का जीवंत स्वरूप है।”
‘इससे बड़ा कोई बर्थडे गिफ्ट नहीं’
उन्होंने कहा कि अगर उनके किसी एक प्रयास से मां की ममता से वंचित किसी बच्चे को कुछ पल के लिए परिवार का एहसास हो जाए तो इससे बड़ा जन्मदिन का उपहार उनके लिए कुछ नहीं हो सकता।उन्होंने भगवान से अपनी मां को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और उन्हें तथा उनके परिवार को मां के बताए धर्म, सेवा, संस्कार और मानवता के रास्ते पर चलने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
परिवार भी मां की स्मृति को सेवा से जोड़ने के संकल्प में साथ
इस सेवा अभियान में शारदा की पत्नी संगीता अग्रवाल शारदा, भाई विपीन अग्रवाल शारदा, छोटे भाई उमेश अग्रवाल शारदा और उनकी पत्नी अंजली अग्रवाल, पुत्र चिराग अग्रवाल शारदा एवं पुत्रवधू सुहानी अग्रवाल, बहन योगिता अग्रवाल, बहनोई संजय अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, माधव अग्रवाल, आशी, राधिका, गौरव समेत परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।परिवार ने भी संकल्प लिया कि संतोष रानी गोयल के संस्कारों को केवल तस्वीरों और स्मृतियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सेवा और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से इन संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।विनीत शारदा ने कहा कि अब हर 8 अगस्त उनके लिए सिर्फ जन्मदिन नहीं, बल्कि मां की स्मृति में किसी जरूरतमंद के जीवन में खुशी का दीप जलाने का दिन होगा।