राजा भैया के नक्शेकदम पर बेटे! शिवराज-बृजराज की सियासत में एंट्री, UP में फिर गूंजेगा ‘भदरी’ का नाम
Raja Bhaiya: कुंडा से 1993 से लगातार विधायक रहे राजा भैया अब अपनी अगली पीढ़ी को भी राजनीति में सक्रिय कर रहे हैं।
Raja Bhaiya
Raja Bhaiya: रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया' उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं। Kunda से 1993 से लगातार विधायक रहे राजा भैया अब अपनी अगली पीढ़ी को भी राजनीति में सक्रिय कर रहे हैं। उनके दोनों बेटे शिवराज प्रताप सिंह और बृजराज प्रताप सिंह ने हाल ही में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की सदस्यता लेकर औपचारिक रूप से सियासत में कदम रख दिया है। स्थानीय लोग शिवराज को “बड़े राजा” और बृजराज को “छोटे राजा” कहकर बुलाते हैं।
दोनों भाई युवाओं के बीच लोकप्रिय
दोनों भाई युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। वे अपने पिता की तरह ही आम जनता के बीच पहुंचते हैं और उनके सुख-दुख में शामिल होते हैं। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी दोनों भाइयों ने अपने पिता के लिए सक्रिय प्रचार किया था और क्षेत्र में लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया था। कुंडा क्षेत्र में उनकी छवि सरल और सहज नेताओं की बन रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिवराज और बृजराज हर वर्ग के लोगों से जुड़ाव रखते हैं। चाहे निमंत्रण किसी अमीर का हो या गरीब का, दोनों हर कार्यक्रम में शामिल होते हैं। जब राजा भैया क्षेत्र से बाहर होते हैं, तो शिवराज बेंती पैलेस में लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और समाधान की कोशिश करते हैं। क्षेत्र के निवासी बताते हैं कि दोनों भाई जरूरतमंदों की मदद, खासकर इलाज कराने में भी आगे रहते हैं। अपने पिता की तरह वे भी जाति से ऊपर उठकर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं।
2003 में हुआ शिवराज और बृजराज का जन्म
शिवराज और बृजराज का जन्म 2003 में हुआ था, उस समय राजा भैया पोटा कानून के तहत जेल में थे। लंबे समय तक वे अपने बेटों से दूर रहे। दोनों भाइयों की पढ़ाई सिंधिया स्कूल ग्वालियर से हुई है, जिसे देश के प्रतिष्ठित स्कूलों में गिना जाता है। शिक्षा के दौरान ही उनमें नेतृत्व और सामाजिक समझ विकसित हुई। शौक की बात करें तो दोनों भाई अपने पिता की तरह लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं। उनके पास रेंज रोवर, लैंड रोवर डिफेंडर, मर्सिडीज और टोयोटा लैंड क्रूजर जैसी महंगी गाड़ियां हैं। इसके अलावा उन्हें बाइकिंग, ATV राइडिंग और घुड़सवारी का भी शौक है। हालांकि, चुनाव लड़ने को लेकर दोनों का कहना है कि यह फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। वे अपने पिता की सेवा-आधारित राजनीति से प्रेरित हैं और उसी राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं।