UP सियासत में भूचाल! सपा दफ्तर के बाहर लगा राजभर हत्याओं का पोस्टर, ओम प्रकाश का तीखा पलटवार
UP Politics: समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर ने राज्य की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पोस्टर में साल 2024 से 2026 के बीच राजभर समाज के लोगों की हुई हत्याओं का जिक्र किया गया है।
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UP Politics: राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर ने राज्य की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पोस्टर में साल 2024 से 2026 के बीच राजभर समाज के लोगों की हुई हत्याओं का जिक्र किया गया है। पोस्टर में यह दावा किया गया है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में राजभर समाज के कई लोगों की हत्या हुई, जिससे समाज में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। इस पोस्टर के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर बोला हमला
पोस्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सिर्फ हत्याओं की संख्या दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी बताया जाना चाहिए कि इन घटनाओं के आरोपी कौन हैं। उनका दावा है कि अधिकांश मामलों में आरोपी यादव समाज से जुड़े लोग हैं। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी सच दिखाना चाहती है तो पोस्टर में यह भी स्पष्ट लिखना चाहिए कि हत्या किसने की।
आरोपियों की पहचान भी सार्वजनिक होनी चाहिए: ओम प्रकाश राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने बाराबंकी, मऊ और कौशांबी समेत कई घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन मामलों को पोस्टर में दिखाया गया है, उनमें आरोपियों की पहचान भी सार्वजनिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाराबंकी में एक गरीब युवक बर्फ बेच रहा था और पैसे मांगने पर उसकी हत्या कर दी गई। अगर समाजवादी पार्टी में हिम्मत है तो वह पोस्टर में हत्यारों के नाम भी लिखे।
सपा कार्यालय के बाहर लगे इस पोस्टर पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है, “भाजपा सरकार में 2024 से 2026 के बीच राजभर समाज के लोगों की हत्याएं।” पोस्टर में वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, बाराबंकी, कुशीनगर और संतकबीर नगर समेत कई जिलों के मृतकों के नाम दर्ज हैं। इनमें सुरेश राजभर, फया राजभर, डॉ. सचिन राजभर, दिग्विजय राजभर, चंदन राजभर, अमित राजभर, पंकज राजभर और नंदिनी राजभर जैसे कई नाम शामिल हैं। पोस्टर के अनुसार इन सभी की हत्या पिछले दो वर्षों में हुई है।
भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश
इस पोस्टर के जरिए समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रही है। वहीं, ओम प्रकाश राजभर ने इस बहाने सपा की राजनीति और उसके पीडीए फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा में पिछड़े और वंचित समाज को बराबरी का अधिकार नहीं मिलता। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि सपा के पीडीए का मतलब “पहला दावा अहिर” है और पार्टी में सिर्फ सैफई परिवार को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाजवादी पार्टी वास्तव में पिछड़े वर्गों की हितैषी होती तो विभिन्न पिछड़ी जातियों के नेताओं को सांसद और बड़े पदों पर मौका मिलता। ओपी राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज हो गई है।