Raebareli News: राणा बेनी माधव और वीरा पासी की दोस्ती को मिला सम्मान, शंकरपुर में राहुल गांधी ने किया अनावरण

Raebareli News: रायबरेली के शंकरपुर में राहुल गांधी ने 1857 के महानायक राणा बेनी माधव सिंह और उनके सेनापति वीरा पासी की प्रतिमाओं का अनावरण किया। जानिए उनकी वीरता, दोस्ती और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान।

Update:2026-05-20 16:08 IST

 Rahul Gandhi at Raebareli (Image Credit-Newstrack)

​रायबरेली। उत्तर प्रदेश के बैसवारा की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास की गवाह बनी है। रायबरेली के शंकरपुर में देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा महान स्वतंत्रता सेनानी राणा बेनी माधव सिंह और उनके सबसे विश्वस्त सेनापति व महानायक वीरा पासी की प्रतिमाओं के अनावरण के साथ ही इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय जीवंत हो उठा है।

​गौरतलब है कि बीते 20 फरवरी 2025 को राहुल गांधी ने शंकरपुर में महान क्रांतिकारी राणा बेनी माधव सिंह की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया था। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, ब्लॉक प्रमुख राही धर्मेन्द्र कुमार यादव के विशेष प्रयासों से आज 1857 के एक और महानायक वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण भी राहुल गांधी के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इतिहास के पन्नों में राणा बेनी माधव सिंह और वीरा पासी की जोड़ी को राष्ट्रभक्ति और आपसी सद्भाव की एक बेमिसाल मिसाल माना जाता है, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर जंग लड़ी थी।

​1857 के महानायक: अमर बलिदानी राणा बेनी माधव सिंह

​1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अवध की धरती पर क्रांति का बिगुल फूंकने वाले शंकरपुर के शासक राणा बेनी माधव सिंह एक कुशल रणनीतिकार, अप्रतिम योद्धा और मातृभूमि के सच्चे सपूत थे। उनका नाम सुनते ही अंग्रेजी हुकूमत कांप उठती थी।

​गोरिल्ला युद्ध से अंग्रेजों को चटाई धूल: राणा बेनी माधव ने बेगम हजरत महल के आह्वान पर लखनऊ की घेराबंदी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने अपनी छापामार (गोरिल्ला) युद्ध रणनीति के दम पर कर्नल रॉबर्ट्स जैसी ब्रिटिश सेनाओं को कई बार करारी शिकस्त दी।

​प्रलोभन को ठुकराया: अंग्रेजों ने उन्हें आत्मसमर्पण करने और जागीर वापस पाने का बड़ा लालच दिया था। लेकिन इस महान देशभक्त ने उसे लात मारते हुए कहा था—

​"मैं अपनी जमीन छोड़ सकता हूँ, लेकिन अपने देश और राजा के प्रति अपनी वफादारी कभी नहीं बेच सकता।"

​राणा के 'दाहिने हाथ' थे महानायक वीरा पासी


​इतिहास गवाह है कि राणा बेनी माधव सिंह की इस अदम्य वीरता के पीछे उनके सबसे भरोसेमंद साथी और सेनापति वीरा पासी की ताकत थी।

​कंधे से कंधा मिलाकर लड़ी लड़ाई: वीरा पासी ने राणा बेनी माधव के साथ मिलकर अंग्रेजी सेना के दांत खट्टे किए थे।

​अद्भुत सूझबूझ: जब अंग्रेजों ने राणा के शंकरपुर किले को घेरकर तहस-नहस कर दिया था, तब वीरा पासी ने अपनी कूटनीति और साहस की बदौलत राणा बेनी माधव को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। दोनों ने अंतिम सांस तक नेपाल की तराई के जंगलों में अंग्रेजों और स्थानीय ताकतों से लोहा लिया और नवंबर 1859 में वीरगति प्राप्त की।

​जन-जन के नायक और उनकी अमर विरासत


​राणा बेनी माधव सिंह और वीरा पासी सिर्फ अपने दौर के योद्धा नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक एकता और जन-जन के नेता थे। रायबरेली और अवध के लोकगीतों में आज भी इन दोनों महानायकों की वीरता और अटूट दोस्ती की गाथाएं बड़े गर्व से गाई जाती हैं।

​आज शंकरपुर की धरती पर इन दोनों नायकों की प्रतिमाओं की स्थापना से न सिर्फ इतिहास को सम्मान मिला है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी देशप्रेम और आपसी भाईचारे की प्रेरणा मिलेगी। देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले इन अमर सपूतों को राष्ट्र हमेशा कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।

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