विश्व पर्यावरण दिवस पर हिंडाल्को रेणुकूट का हरित संकल्प, किया पौधरोपण
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस पहल ने न केवल हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया, बल्कि लोगों को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझने और उन्हें व्यवहार में
hindalco plantation drive
सोनभद्र में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हिंडाल्को रेणुकूट में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों और श्रमिक प्रतिनिधियों ने पर्यावरण की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक शपथ ग्रहण से हुई, जिसमें उपस्थित लोगों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ ऊर्जा संरक्षण एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया। इसके बाद केंद्र सरकार की प्रेरणा से चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत संयंत्र परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पौधे रोपे गए। अभियान का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना ही नहीं, बल्कि लोगों को वृक्षों के प्रति भावनात्मक रूप से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण की संस्कृति को मजबूत करना भी रहा।
यह आयोजन आरओ-ज़ेडएलडी प्लांट परिसर में किया गया, जहां पर्यावरण जागरूकता को लेकर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। इस मौके पर हिंडाल्को रेणुकूट के यूनिट हेड समीर नायक ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रह सकेगा। उन्होंने कहा कि धरती को हरा-भरा बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए योगदान देना चाहिए।
क्लस्टर हेड (एचआर) जसबीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन के लिए ही नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घर, गांव और आसपास के क्षेत्रों में पौधरोपण कर हरित वातावरण बनाने में भागीदारी निभाएं।
कार्यक्रम में रिडक्शन प्लांट हेड जयेश पवार, पर्यावरण विभाग के प्रमुख सत्यजीत आचार्य, एचआर विभाग के अजय सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश प्रमुखता से दिया गया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस पहल ने न केवल हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया, बल्कि लोगों को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझने और उन्हें व्यवहार में उतारने के लिए भी प्रेरित किया।