Sonbhadra: सोनभद्र के सघन जंगलों पर मंडराया खतरा, पावर प्रोजेक्टों के विरोध में डीएम को सौंपा ज्ञापन
Sonbhadra News: सोनभद्र में तरिया कैमूर वन्यजीव क्षेत्र में प्रस्तावित पावर प्रोजेक्टों के विरोध में गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने पर्यावरण और वन्यजीवों को खतरे की आशंका जताई।
Sonbhadra News
Sonbhadra News: गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट के बैनर तले गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से मुलाकात कर तरिया कैमूर वाइल्ड लाइफ क्षेत्र में प्रस्तावित पावर प्रोजेक्टों का विरोध जताया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बचे हुए इस सघन वन क्षेत्र में औद्योगिक परियोजनाएं शुरू होने से पर्यावरण, वन्य जीव और मानव जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
प्राकृतिक धरोहर को बचाने की उठी मांग
प्रतिनिधियों ने बताया कि तरिया कैमूर क्षेत्र प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध है, जहां सैकड़ों प्राचीन भित्तिचित्र, रॉक पेंटिंग, प्राकृतिक जल स्रोत और चिरौंजी, महुआ, हर्रा, बहेरा व आंवला जैसी बहुमूल्य वनस्पतियां मौजूद हैं। इसके अलावा साखू, विजयशाल और करम जैसे दुर्लभ वृक्षों से आच्छादित यह वन क्षेत्र लाखों लोगों के जीवन और पर्यावरण का आधार बना हुआ है।संगठन ने कहा कि सोनभद्र का यह इलाका सबसे ऊंचाई वाला वन क्षेत्र है, जहां सर्वाधिक वर्षा होती है। घाघर, वेलन और कर्मनाशा जैसी नदियों का अस्तित्व भी इसी जंगल से जुड़ा है। यदि यहां पावर प्लांट स्थापित किए गए तो सोनभद्र के साथ-साथ मिर्जापुर और चंदौली जिले भी पर्यावरणीय संकट की चपेट में आ जाएंगे।
वैज्ञानिकों की चेतावनी का भी दिया हवाला
प्रतिनिधिमंडल ने वैज्ञानिकों की चेतावनियों का हवाला देते हुए कहा कि जंगलों के कटान और भारी औद्योगिक गतिविधियों के कारण भविष्य में अम्लीय वर्षा और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति और मानव सभ्यता को खतरे में डालना उचित नहीं है।ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि जिन कंपनियों को जमीन दी जा रही है, उससे स्थानीय लोगों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। गांवों को न बिजली मिलेगी और न रोजगार, ऐसे में इसे विकास नहीं कहा जा सकता।
हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई
गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट ने बताया कि इस मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जा चुकी है और सुनवाई जारी है। संगठन का कहना है कि कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद किसी भी प्रकार का कार्य कराया जाना न्यायालय की अवमानना होगी।इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को “गुप्तकाशी स्मारिका” भेंट कर सम्मानित भी किया तथा 15 वर्षों से संचालित गुप्त काशी दर्शन यात्रा की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल में रवि प्रकाश चौबे, सत्य प्रताप सिंह, श्रीकांत त्रिपाठी, स्वामी ध्यानानंद, धर्मेंद्र कुमार पांडेय, राजू, सौरभकांत तिवारी और राजन दूबे सहित अन्य लोग मौजूद रहे।