Sonbhadra: संविदाकर्मियों की छंटनी पर भड़की संघर्ष समिति, बिजली निगम पर निजीकरण की तैयारी का आरोप
Sonbhadra News: सोनभद्र में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने संविदाकर्मियों की छंटनी को लेकर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर सवाल उठाए।
Sonbhadra News: प्रदेश की बिजली व्यवस्था में संविदाकर्मियों की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा समीक्षा बैठक में दिए गए उस निर्देश का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा कि संविदाकर्मियों को हटाया न जाए और बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में उनके सहयोग का उपयोग किया जाए।समिति का कहना है कि सरकार के शीर्ष स्तर से लगातार संविदाकर्मियों के हित में निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन उन निर्देशों को जमीन पर लागू करने के बजाय अपने फैसलों पर अड़ा हुआ है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और बिजली व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बाद भी जारी है कार्रवाई
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि वित्त मंत्री के बयान से मात्र दो दिन पहले ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने भी स्पष्ट निर्देश दिए थे कि संविदाकर्मियों को नहीं हटाया जाए। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग, डाउनसाइजिंग और प्रशासनिक सुधारों के नाम पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।समिति का दावा है कि अब तक 25 हजार से अधिक संविदाकर्मियों को कार्य से बाहर किया जा चुका है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में उठाया जा रहा बड़ा कदम है।
‘कर्मचारी घटे, संकट बढ़ा’
संघर्ष समिति का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नियमित कर्मचारियों की संख्या में लगातार कमी की गई है। बड़ी संख्या में पद समाप्त कर दिए गए और संविदाकर्मियों की तैनाती भी कम कर दी गई। ऐसे में बिजली व्यवस्था का पूरा ढांचा कमजोर होता चला गया।समिति के अनुसार, वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू होने के बाद उत्पादन, पारेषण और वितरण इकाइयों के बीच समन्वय प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं पर पड़ रहा है।
गर्मी में बिगड़ी व्यवस्था पर जताई चिंता
संघर्ष समिति ने कहा कि वह नवंबर 2025 से लगातार चेतावनी देती आ रही थी कि यदि संविदाकर्मियों की छंटनी और वर्टिकल व्यवस्था का प्रयोग जारी रहा तो गर्मी के मौसम में बिजली व्यवस्था गंभीर संकट का सामना करेगी। आज प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सामने आ रही समस्याएं उसी आशंका को सही साबित कर रही हैं।समिति का कहना है कि बिजली तंत्र में कर्मचारियों की कमी का असर फाल्ट सुधार, लाइन रखरखाव और उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण पर साफ दिखाई दे रहा है।
‘उत्पीड़न और सुधार साथ-साथ नहीं चल सकते’
संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को चेताते हुए कहा कि सुधारों के नाम पर भय और दमन का वातावरण बनाना किसी भी व्यवस्था के लिए घातक है। बिजली कर्मचारी व्यवस्था में सुधार और बेहतर सेवा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों के बीच सकारात्मक परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती।समिति ने मांग की है कि मार्च 2023 से अब तक कर्मचारियों और संविदाकर्मियों के खिलाफ की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए। साथ ही हटाए गए संविदाकर्मियों को पुनः कार्य पर बहाल किया जाए तथा बिजली क्षेत्र में किसी भी बड़े सुधार से पहले कर्मचारियों को विश्वास में लिया जाए।संघर्ष समिति का कहना है कि कर्मचारियों की भागीदारी, पर्याप्त मानव संसाधन और पारदर्शी नीतियां ही प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मजबूत और उपभोक्ता हितैषी बना सकती हैं।