Sonbhadra News:'गांव की सत्ता गांव के हाथ' : सरकार के नए फैसले से पंचायत राजनीति में हलचल, प्रधान बोले- थैंक्यू योगी जी

Sonbhadra News: योगी सरकार के नए फैसले के बाद ग्राम प्रधानों को पंचायत प्रशासक बनाने की तैयारी तेज, प्रधानों ने कहा- गांव की सत्ता फिर गांव के हाथ आई।

Update:2026-05-25 23:00 IST

'गांव की सत्ता गांव के हाथ' : सरकार के नए फैसले से पंचायत राजनीति में हलचल, प्रधान बोले- थैंक्यू योगी जी (Photo- Newstrack)

Sonbhadra News: सोनभद्र।  योगी सरकार के उस फैसले के बाद प्रदेश की पंचायत राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है, जिसमें ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाए जाने का रास्ता साफ किया गया है। लंबे समय से चली आ रही “प्रशासक व्यवस्था” पर सवाल उठते रहे थे, लेकिन अब सरकार ने सीधे चुने हुए प्रधानों को जिम्मेदारी देकर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश देने की कोशिश की है।

प्रधानों ने ऐसे जताया समर्थन

नगवां ब्लॉक के प्रधान प्रतिनिधि रामनरेश यादव ने मुख्यमंत्री के फैसले को गांव की लोकतांत्रिक ताकत को मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे गांव के विकास संबंधी फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।

दुद्धी ब्लॉक की मल्देवा ग्राम पंचायत की प्रधान सुनीता देवी ने कहा कि प्रशासक व्यवस्था में छोटे-छोटे काम भी महीनों अटक जाते थे। अब जनता सीधे प्रधान के पास पहुंच सकेगी और समस्याओं का समाधान भी जल्दी होगा।

सदर ब्लॉक के बछौंधा ग्राम पंचायत प्रधान जुबेर अहमद ने इसे स्वागत योग्य फैसला बताते हुए कहा कि इससे गांव के विकास को गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा का जनाधार भी मजबूत हो सकता है।

सदर ब्लॉक के कुर्था ग्राम पंचायत प्रधान नथुनी मौर्य ने कहा कि सरकार का यह निर्णय गांवों के हित में है। इससे अधूरे विकास कार्य पूरे होंगे और ग्रामीणों को समस्याओं के समाधान में आसानी मिलेगी।

क्या है राजनीतिक संदेश?

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पंचायत स्तर पर बड़ा राजनीतिक दांव भी माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को विधानसभा और लोकसभा चुनाव की 'सेमीफाइनल राजनीति' माना जाता है। गांवों में प्रधानों का प्रभाव सीधा वोटरों तक पहुंचता है।

भाजपा समर्थक इसे 'गांव की सत्ता गांव को लौटाने' वाला कदम बता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पंचायत प्रतिनिधियों में सरकार के प्रति भरोसा बढ़ेगा और ग्रामीण वोट बैंक पर पार्टी की पकड़ और मजबूत हो सकती है।

हालांकि विपक्ष इसे पंचायत व्यवस्था के राजनीतिक उपयोग से जोड़कर भी देख रहा है। आने वाले पंचायत चुनावों में यह फैसला कितना असर दिखाएगा, इस पर अब सबकी नजर टिकी हुई है।

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