UP Bahubali Arms License: यूपी के 19 बाहुबलियों पर HC का शिकंजा! राजा भैया-बृजभूषण समेत सभी के 26 मई तक शस्त्र लाइसेंस की मांगी रिपोर्ट

UP Bahubali Arms License: इलाहाबाद HC ने यूपी में शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग, हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को लाइसेंस पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राजा भैया, धनंजय सिंह और बृजभूषण शरण सिंह सहित प्रदेश के 19 बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंसों पर रिपोर्ट मांगी है।

Update:2026-05-22 11:22 IST

UP Bahubali Arms License

UP Bahubali Arms License: हाईकोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह, राजा भइया, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, विनीत सिंह समेत बाहुबलियों के लाइसेंसों की जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने उन बाहुबलियों की आपराधिक कुंडली तलब की है जिनके नाम सरकारी हलफनामों से गायब हैं। हाईकोर्ट ने बाहुबली को मिली सरकारी सुरक्षा का ब्यौरा 26 मई तक मांगा है।

उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे गन कल्चर और शस्त्र लाइसेंसों के कथित रूप से दुरुपयोग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदेश के कई बाहुबलियों, प्रभावशाली नेताओं और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस लिस्ट में रघुराज प्रताप सिंह, बृज भूषण शरण सिंह औरधनंजय सिंह जैसे चर्चित नाम शामिल हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संत कबीर नगर निवासी जयशंकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से 26 मई तक विस्तृत रूप से जानकारी पेश करने को कहा है।

गन कल्चर पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों का आवंटन, नवीनीकरण और हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर गंभीर रूप से सवाल खड़े हो रहे हैं। कोर्ट ने अधिकारियों द्वारा दाखिल हलफनामों पर अपना असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण जानकारियां छपाने का प्रयास किया गया है, ऐसा प्रतीत होता है।

सरकार की तरफ से दाखिल आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में मौजूदा वक़्त में तकरीबन 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। वहीं 23,407 आवेदन अभी लंबित हैं। इन सब में सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि दो या उससे ज्यादा आपराधिक मुकदमों में जिनका नाम है उन्हें भी लगभग 6,062 शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए हैं।

इसके अलावा प्रदेश के 20,960 परिवारों के पास एक से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं। वहीं, डीएम और पुलिस अधिकारियों के आदेशों के खिलाफ 1,738 अपीलें अलग-अलग मंडलों में लंबित बताई गई हैं।

बाहुबलियों और नेताओं की होगी बड़ी जांच

कोर्ट ने साफ़ कहा कि स्थानीय पुलिस प्रशासन कई बार राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की जानकारी छिपा लेता है। इसलिए अब जोनवार बाहुबलियों, अपराधियों और नेताओं के लाइसेंसों की खासतौर से गहराई से जांच की जाएगी।

कोर्ट ने सरकार से सवाल खड़े किया है कि इन प्रभावशाली लोगों को किस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है, उनके साथ कितने सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और उनके पास कितने हथियार हैं। साथ ही यह भी बताने को कहा गया है कि शस्त्र लाइसेंस जारी करते वक़्त उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की गई थी या नहीं।

इन चर्चित नामों की मांगी गई रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने प्रदेश के अलग-अलग जोनों से कई चर्चा में रहने वाले सभी नामों की आपराधिक कुंडली और शस्त्र लाइसेंस का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। इनमें नोएडा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जोन के कई बाहुबली शामिल हैं। मेरठ जोन से हाजी याकूब कुरैशी, वाराणसी जोन से अब्बास अंसारी और लखनऊ जोन से खान मुबारक जैसे नामों को लेकर भी कोर्ट ने रिपोर्ट मांगी है।

इसके अलावा सुंदर सिंह भाटी, अनिल दुजाना, विजय मिश्रा, कुंटू सिंह, राजन तिवारी और अनुपम दुबे सहित कई चर्चित अपराधियों के लाइसेंसों की जांच होगी।

अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी

हाईकोर्ट ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों और पुलिस कमिश्नरों को बेहद सख्त आदेश देते हुए कहा है कि वे शपथपत्र के साथ यह लिखित अंडरटेकिंग देंगे कि कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई है। अगर जांच में कोई तथ्य छिपाने की बात सामने आती है तो इससे संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

बता दे, कोर्ट की इस सख्ती के बाद प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और राजनीतिक संरक्षण के मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। इसे लेकर ऐसा माना जा रहा है कि आगामी दिनों में कई बड़े नामों की बड़ी मुश्किलें बढ़ सकती हैं और प्रदेश सरकार को लाइसेंस व्यवस्था में बड़े परिवर्तन करने पड़ सकते हैं।

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