यूपी: लैब टेक्नीशियन भर्ती के परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती

याची के अधिवक्ता का कहना था कि 921 प्रयोगशाला सहायकों के पदों का विज्ञापन निकाला गया था। जिसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर 16 थी। आवेदकों के लिए उ.प्र. राज्य मेडिकल फैकल्टी द्वारा प्रदत्त लैब टेक्नीशियन का डिप्लोमा अनिवार्य था।

Update: 2019-07-20 14:32 GMT

प्रयागराज: उ.प्र. अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ द्वारा आयोजित लैब टेक्नीशियन भर्ती के परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी। कहा गया कि ऐसे अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया गया, जो आवेदन के समय निर्धारित योग्यता नहीं रखते थे और कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी चयनित किए गए जो लिखित परीक्षा में सफल ही नहीं हुए थे। नमित कुमार पाण्डेय और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं।

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921 पदों के लिए निकाला गया था विज्ञापन

याची के अधिवक्ता का कहना था कि 921 प्रयोगशाला सहायकों के पदों का विज्ञापन निकाला गया जिसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर 16 थी। आवेदकों के लिए उ.प्र. राज्य मेडिकल फैकल्टी द्वारा प्रदत्त लैब टेक्नीशियन का डिप्लोमा अनिवार्य था।

20 नवम्बर 16 को लिखित परीक्षा हुई और साक्षात्कार के बाद अंतिम परिणाम 15 जून 11 को जारी किया गया। याचीगण भी साक्षात्कार में शामिल हुए मगर असफल रहे।

जारी परिणाम को यह कहते हुए चुनौती दी गयी कि कई ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया है जिनके पास आवेदन के समय डिप्लोमा नहीं था। उनके डिप्लोमा का रिजल्ट 30 नवम्बर 16 को जारी हुआ जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर 16 थी।

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आवेदनकर्ता के लिए रखी गई थी ये शर्त

विज्ञापन में स्पष्ट शर्त थी कि आवेदन की तिथि पर अर्हता रखने वाले ही पात्र होंगे। इसके बावजूद ऐसे लोगों का न सिर्फ आवेदन स्वीकार किया गया बल्कि उनको सफल भी घोषित कर दिया गया।

इसी प्रकार से लिखित परीक्षा में असफल रहे लोगों को भी अंतिम रूप से चयनित किया गया है। चयन में गलत तरीके से क्षैतिज आरक्षण लागू करने तथा अंतिम परिणाम में सिर्फ रोल नंबर जारी करने का भी आरोप है। कोर्ट ने इस मामले में 25 जुलाई तक जवाब मांगा है।

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