Kasmandi Fort Dispute: 'बकरीद पर ईंट का जवाब पत्थर से...', : कासमंडी विवाद से चर्चा में आए सूरज पासी कौन, दी हनुमान चालीसा पढ़ने की चेतावनी

Kasmandi Fort Dispute: लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कासमंडी किले पर विवाद तेज हो गया है। लाखन आर्मी चीफ सूरज पासी ने बकरीद पर नमाज के विरोध में हनुमान चालीसा पढ़ने की चेतावनी दी है। जानिए कौन हैं सूरज पासी और क्या है पूरा मामला।

Update:2026-05-27 19:22 IST

Kasmandi Fort Dispute: राजधानी लखनऊ से सटे मलिहाबाद का कासमंडी किला इन दिनों बड़े सांप्रदायिक टकराव का केंद्र बन गया है। किले के मालिकाना हक को लेकर पासी और मुस्लिम समाज आमने-सामने हैं। एक तरफ पासी समाज इसे महाराज कंसा पासी का पुराना महल और शिव मंदिर बता रहा है तो दूसरी ओर मुस्लिम समाज का कहना है कि यह जमीन मस्जिद और मकबरे की है।

इस टकराव के बीच जो सबसे बड़ा नाम सामने आ रहा है वो है ‘लाखन आर्मी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी का। पूरे आंदोलन की कमान संभाल रहे सूरज पासी ने बकरीद से पहले प्रशासन को धमकी दी है कि अगर वहां पर कल 28 मई को किले और शिव मंदिर के पास कोई भी गलत हरकरत की गई तो लाखन आर्मी इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर वहां नमाज अदा की गई तो वे अपने समर्थकों के साथ वहां बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। सूरज पासी ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि वे ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। सूरज ने आगे कहा कि उनका संगठन संविधान की पूरी इज्जत करता है लेकिन अगर भवनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई तो हालात बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा अगर जरूरत पड़ी तो मलिहाबाद में इतनी भीड़ जुटेगी कि पुलिस-प्रशासन के लिये उसको संभालना नामुमकिन हो जायेगा। सूरज ने पुलिस से पासी समाज की भावनाओं और आस्था का ख्याल रखने को कहा है।

कौन है सूरज पासी?

कासमंडी किले को लेकर हो रहे आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे सूरज पासी का सफर बहुत ही संघर्षमय रहा है। नई पीढ़ी में सामाजिक चेतना को जगाने का दावा करने वाले सूरज का बख्शी का तालाब इलाके के भोलपुर गांव के बेहद साधारण परिवार में हुआ था। मात्र 17 साल की उम्र में ही पिता का साया सिर से उठ गया था। मुश्किल हालातों के बीच सूरज ने परिवार को बोझ अपने सिर उठा लिया। इसी दौरान उन्हें अपने समाज के इतिहास को गहराई से खंगालना शुरू किया। इस दौरान उन्हें पता चला कि पासी समाज का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। लेकिन समय के साथ समाज, आर्थिक और सामाजिक रूप से हाशिये पर चला गया। इसी टीस ने उन्हें युवाओं को उनके स्वाभिमान, पहचान से रूबरू कराने का जिम्मा लिया।

पासी समाज को एकजुट करने के मकसद से सूरज पासी ने 27 फरवरी 2023 को ‘लाखन एकता मिशन’ की स्थापना की जिसे बाद में लाखन आर्मी के नाम से जाना जाने लगा। युवाओं को लिये समर्पित संगठन में शामिल होने की बड़ी कड़ी शर्ते हैं। सबसे बड़ी अनिवार्य शर्त है नशा मुक्त होना। संगठन में युवाओं को शराब,अपराध और हर तरह के नशे से दूर रहने के लिये शपथ दिलाई जाती है। इसके अलावा लाखन आर्मी जातीय बेड़ी को तोड़ आदिवासी और जनजातीय समाज के बीच शिक्षा और अधिकारों को लेकर जागरूकता फैला रही है। लाखन आर्मी धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर भी काफी मुखर रूख रखती है और दलित समाज को धर्मांतरण से रोकरने और अपनी संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहने के लिये प्रोत्साहित करती है।

80 जिलों तक फैला नेटवर्क

केवल तीन साल के अंदर ही लाखन आर्मी का प्रभाव प्रदेश के हर जिले तक फैल चुका है। प्रदेश के अलावा बिहार और उत्तराखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में संगठन की पैठ बनने लगी है। अब संगठन में युवाओं के साथ बड़े-बुजुर्ग भी कंधा से कंधा मिलाने लगे हैं।

प्रदेश की राजनीति में पासी समाज का अहम रोल

प्रदेश की राजनीति में पासी समाज बेहद अहम रोल अदा करता है। जाटव समाज के बाद पासी समाज की दलितों में दूसरी बड़ी संख्या हैं। अवध और पूर्वांचल में पासी समाज निर्णयाक स्थिति में है। ऐसे मे कासमंडी किले का विवाद स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि पासी समाज के आन-बान-शान का सवाल बन गया है और अगर इस विवाद का हल नहीं निकला तो इसका प्रदेश की राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। 

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