इंडो-पैसिफिक से निवेश तक... भारत-जापान ने मजबूत किए रणनीतिक रिश्ते, कई समझौतों पर लगी मुहर

Sana Takaichi India Visit: भारत और जापान ने रक्षा, फार्मा, AI, सेमीकंडक्टर और निवेश समेत कई क्षेत्रों में समझौते किए। पीएम मोदी और जापानी पीएम सना तकाइची ने रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया।

Update:2026-07-02 14:44 IST

Sana Takaichi India Visit: जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सना तकाइची की मौजूदगी में फार्मा, रक्षा, तकनीक, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों (MoC) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरे को भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी के लिए अहम माना जा रहा है।

पीएम मोदी ने किया गर्मजोशी से स्वागत

संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री सना तकाइची का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सना तकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और उनके नेतृत्व में भारत-जापान संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत और जापान के बीच वर्षों से भरोसे और आपसी सम्मान पर आधारित संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच केवल राजनीतिक और आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव भी काफी गहरा है।

विश्वास को बताया सबसे बड़ी ताकत

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच आपसी विश्वास सबसे महत्वपूर्ण आधार बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी इसी विश्वास पर टिकी हुई है और यही दोनों देशों की सबसे बड़ी ताकत भी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जापान ने पिछले कई दशकों में भारत के विकास में अहम योगदान दिया है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और कई अन्य क्षेत्रों में जापानी कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश किए हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।

इन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इनमें रक्षा, फार्मास्युटिकल उद्योग, सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सप्लाई चेन, निवेश और नई तकनीकों का विकास शामिल है। दोनों देशों का मानना है कि इन क्षेत्रों में मिलकर काम करने से न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि तकनीकी नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही दोनों सरकारें व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए भी मिलकर काम करेंगी।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर भी बनी सहमति

भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन किया और कहा कि क्षेत्र में स्वतंत्र एवं सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए रखना सभी देशों के हित में है। इसके अलावा दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर लगातार संवाद बनाए रखने और साझा हितों से जुड़े विषयों पर मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई।

रिश्तों के नए दौर की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, पारस्परिक विश्वास और साझा उद्देश्यों पर आधारित हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस यात्रा के दौरान हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेंगे। विशेषज्ञों का भी मानना है कि रक्षा, तकनीक, निवेश और औद्योगिक सहयोग में बढ़ती भागीदारी से भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता तथा विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

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