भड़क उठा Israel - America के छुटे पसीने! बड़े मंच पर बड़ा झटका! अमेरिका ने इज़राइल को बताया तबाही का सौदागर
America Calls Israel Destroyer of Peace: 13 जून के बाद से इज़राइल लगातार ईरान पर मिसाइलों की बारिश कर रहा है। परमाणु ठिकानों से लेकर सैन्य बेस तक हर जगह धमाकों की गूंज है। ईरान भी पीछे नहीं रहा, उसने भी मिसाइलों से पलटवार किया है। और इस सबके बीच अमेरिका की भूमिका सबसे ज्यादा संदेह के घेरे में है।
America Calls Israel Destroyer of Peace: दुनिया में जब गोलियों से ज्यादा शब्द घातक हो जाएं, तो समझ लीजिए कूटनीति की बिसात पर बड़ी साजिश चल रही है। इस बार जंग मिसाइलों से नहीं, बल्कि जुबान की फिसलन से भड़क गई है। इज़राइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग में जब सबकी नजरें तेल अवीव और तेहरान के सैन्य ठिकानों पर थीं, उसी वक्त संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के मुंह से ऐसा सच निकल गया जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। कूटनीति के सबसे सुरक्षित गलियारे में ऐसी चूक, जो अमेरिका को भी शर्मसार कर गई और इज़राइल को स्तब्ध कर गई।
13 जून के बाद से इज़राइल लगातार ईरान पर मिसाइलों की बारिश कर रहा है। परमाणु ठिकानों से लेकर सैन्य बेस तक हर जगह धमाकों की गूंज है। ईरान भी पीछे नहीं रहा, उसने भी मिसाइलों से पलटवार किया है। और इस सबके बीच अमेरिका की भूमिका सबसे ज्यादा संदेह के घेरे में है। हालांकि अमेरिका बार-बार कह रहा है कि वो इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है, लेकिन पूरी दुनिया जानती है कि वॉशिंगटन इज़राइल के साथ खड़ा है। लेकिन इसी बीच अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक ऐसी गलती कर दी, जिसे अब इतिहास में शायद ‘डिप्लोमैटिक ब्लंडर ऑफ द ईयर’ कहा जाएगा।
UN में गूंजा ‘आतंक फैलाने वाला देश’ बयान
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में अमेरिका की कार्यवाहक स्थायी प्रतिनिधि डोरोथी शिया जब ईरान पर बरस रही थीं, तभी उनके मुंह से वो शब्द निकल गया, जिसे सुनकर इज़राइल तक हैरान रह गया। शिया ने कहा— “इज़राइल आतंक और तबाही फैलाने वाला देश है…” बस, यहीं से कूटनीति का भूचाल शुरू हो गया। हालांकि शिया ने तुरंत अपनी गलती सुधारते हुए कहा कि उनका इशारा ईरान की ओर था, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर यह बयान आग की तरह फैल चुका था। वीडियो क्लिप वायरल हुई, इज़राइली मीडिया भड़क गई, अमेरिकी राजनयिक गलियारों में अफरा-तफरी मच गई और खुद अमेरिका को सफाई देनी पड़ी। इतना बड़ा मंच, इतनी बड़ी गलती, और वो भी तब जब पश्चिम एशिया में युद्ध का माहौल बना हुआ है— इसे सामान्य चूक नहीं कहा जा सकता। यही वजह है कि अब पूरी दुनिया इस ‘फिसलन’ के पीछे की असल कहानी तलाशने में जुट गई है।
अमेरिका की सफाई, लेकिन ईरान पर बरकरार हमला
अमेरिका ने आनन-फानन में अपने स्तर पर सफाई दी। डोरोथी शिया ने बाद में कहा— “मेरा स्पष्ट इशारा ईरान की ओर था। ईरान ही मिडिल ईस्ट में आतंक, अस्थिरता और तबाही का सबसे बड़ा स्रोत है। उसके पास अब वो तकनीकी संसाधन हैं, जिससे वह कभी भी परमाणु हथियार बना सकता है। और यह अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए अस्वीकार्य है।” शिया ने सुरक्षा परिषद से मांग की कि ईरान पर सख्त से सख्त दबाव बनाया जाए ताकि वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं छोड़ दे। उन्होंने चेतावनी दी कि “अब और तबाही नहीं होनी चाहिए। ईरान को अपनी राह बदलनी होगी।” लेकिन सवाल यह है कि जब दुनिया इस युद्ध के कगार पर खड़ी है, तो क्या ऐसी जुबानी चूक केवल गलती थी या फिर अमेरिका की अंदरूनी बेचैनी का संकेत?
ईरान ने भी छेड़ी कूटनीतिक जंग, IAEA प्रमुख निशाने पर
उधर, ईरान भी अब सिर्फ हथियारों से नहीं, कूटनीति के मैदान में भी पलटवार कर रहा है। ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर-सईद इरावानी ने सीधे आरोप लगाया कि ग्रॉसी ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर गलत धारणा फैला रहे हैं। इतना ही नहीं, ईरान का गुस्सा इस बात पर भी है कि IAEA प्रमुख ने इज़राइल द्वारा ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों की निंदा तक नहीं की। ईरान का आरोप है कि IAEA अमेरिका और इज़राइल के दबाव में काम कर रही है और जानबूझकर तेहरान के खिलाफ माहौल बना रही है। यानी अब मामला सिर्फ हथियारों और मिसाइलों का नहीं, बल्कि शब्दों और बैठकों का युद्ध भी बन चुका है।
क्या यह वैश्विक जंग की शुरुआत है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या यह सब वाकई सिर्फ कूटनीतिक चूक है या फिर अमेरिका और इज़राइल के बीच गहरे मतभेदों का इशारा? या फिर यह इस बात का संकेत है कि अमेरिका पर दबाव इतना बढ़ चुका है कि उसके प्रतिनिधि भी भाषणों में चूक करने लगे हैं? एक तरफ मिसाइलें उड़ रही हैं, दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जुबान फिसल रही है। और जब कूटनीति के सबसे ताकतवर मंच पर ऐसा कुछ होता है, तो यह साफ संकेत देता है कि पर्दे के पीछे बहुत कुछ सड़ रहा है। ईरान-इज़राइल जंग अब हथियारों से आगे निकलकर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की साख तक पहुंच गई है। और अगर इस आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में दुनिया को एक नए वैश्विक संकट के लिए तैयार रहना होगा। सवाल बस इतना है— अगली चूक जुबान से होगी या ट्रिगर से?