Meta Lawsuit: 29 राज्यों का केस, Instagram-Facebook के इन फीचर्स पर सवाल

Meta Lawsuit में 29 अमेरिकी राज्यों ने Instagram और Facebook के डिजाइन, बच्चों की सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानें पूरा मामला।

Update:2026-08-20 14:53 IST

Meta Lawsuit: 29 States Target Instagram-Facebook Features Over Child Safety

Meta Lawsuit: अगर आप Instagram पर रील्स स्क्रॉल करते-करते अचानक देखते हैं कि आधा घंटा कब बीत गया, तो अमेरिका में चल रहा Meta का यह मुकदमा आपके लिए भी बेहद खास साबित हो सकता है। अमेरिका के 29 राज्यों ने Meta पर आरोप लगाया है कि Facebook और Instagram को इस तरह डिजाइन किया गया कि बच्चे और किशोर ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बने रहें। अब यह मामला अदालत में ट्रायल के दौर में पहुंच गया है और इसका फैसला सोशल मीडिया के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। मामला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि राज्यों की मांग सिर्फ आर्थिक जुर्माने तक सीमित नहीं है। वे Meta के प्लेटफॉर्म डिजाइन, बच्चों की उम्र की पहचान और डेटा प्राइवेसी से जुड़े नियमों में बदलाव चाहते हैं। Meta ने इन आरोपों को खारिज किया है।

29 राज्यों ने Meta के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा?

यह मुकदमा 2023 में 29 अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल की अगुवाई में दायर किया गया था। राज्यों का आरोप है कि Meta ने बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए ऐसे फीचर्स विकसित किए, जो लगातार इस्तेमाल को बढ़ावा देते हैं। आरोपों में सिर्फ स्क्रीन टाइम बढ़ाने की बात नहीं है। राज्यों का कहना है कि Meta ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों के डेटा को अभिभावकों की जरूरी अनुमति के बिना जुटाया और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर लोगों को गुमराह किया। मुकदमे में इसे अमेरिकी बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी से जुड़े कानून COPPA के उल्लंघन से भी जोड़ा गया है।

Infinite Scroll और Likes भी बन सकते हैं निशाने पर

मामले में प्लेटफॉर्म के डिजाइन पर खास सवाल उठाए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि लगातार स्क्रॉल होने वाला कंटेंट, नोटिफिकेशन, लाइक्स और दूसरे एंगेजमेंट फीचर्स यूजर्स को ऐप पर ज्यादा समय बिताने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

इसी वजह से अगर अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है तो Meta को बच्चों और किशोरों के लिए इन फीचर्स में बदलाव करने पड़ सकते हैं। कुछ मांगों में Infinite Scroll जैसे फीचर को सीमित करने और नाबालिग यूजर्स के लिए ज्यादा सख्त सुरक्षा उपाय लागू करने की बात शामिल है। यानी इसका मतलब यह नहीं है कि फैसला आते ही सभी Instagram और Facebook यूजर्स के फोन में बदलाव हो जाएगा। अदालत के आदेश का दायरा, लागू होने वाले नियम और Meta की अपील जैसी चीजें तय करेंगी कि बदलाव कितने बड़े और कितनी तेजी से होंगे।

Meta पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर का जुर्माना कैसे?

इस मुकदमे की सबसे चौंकाने वाली बात संभावित जुर्माने की रकम है। चार प्रमुख राज्यों में, कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी से जुड़े दावों में संभावित आर्थिक दंड करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

यह कोई तय जुर्माना नहीं है। Meta ने अदालत में राज्यों की गणना के जवाब में यह आंकड़ा सामने रखा है। राज्यों ने कथित उल्लंघनों की संख्या और संबंधित राज्य कानूनों में तय जुर्माने के आधार पर रकम की गणना की है।

यानी अभी यह कहना सही नहीं होगा कि Meta को 1.4 ट्रिलियन डॉलर चुकाने ही होंगे। अंतिम रकम अदालत के फैसले और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

Meta के पूर्व कर्मचारी ने कोर्ट में क्या कहा?

ट्रायल में Meta के पूर्व इंजीनियर Arturo Béjar की गवाही ने मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं से परिचित थी, लेकिन प्रोडक्ट एंगेजमेंट और बिजनेस प्राथमिकताओं को ज्यादा महत्व दिया गया।

Béjar ने यह भी दावा किया कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों की मौजूदगी को लेकर कंपनी का रवैया प्रभावी उम्र-जांच के बजाय आंखें मूंदने जैसा था। उन्होंने Instagram के कुछ सुरक्षा फीचर्स, जैसे Take a Break, को भी पर्याप्त प्रभावी नहीं बताया। हालांकि ये आरोप गवाह की गवाही का हिस्सा हैं और अदालत में इन पर अंतिम फैसला होना बाकी है।

Mark Zuckerberg और Adam Mosseri की गवाही क्यों अहम?

इस मामले में Meta के CEO Mark Zuckerberg और Instagram प्रमुख Adam Mosseri की गवाही पर भी नजर है। Zuckerberg की गवाही खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि राज्यों का आरोप है कि कंपनी के शीर्ष नेतृत्व को प्लेटफॉर्म के सुरक्षा जोखिमों की जानकारी थी।

अगर अदालत में आंतरिक दस्तावेजों और पूर्व कर्मचारियों की गवाही के साथ वरिष्ठ अधिकारियों से भी सवाल-जवाब होते हैं, तो इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि Meta के भीतर बच्चों की सुरक्षा को लेकर फैसले कैसे लिए जाते थे।

Instagram और Facebook यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?

फौरी तौर पर अभी कोई बड़ा बदलाव लागू नहीं हुआ है। लेकिन अगर राज्यों को अदालत से राहत मिलती है, तो Meta को खासकर युवा यूजर्स के लिए कई बदलाव करने पड़ सकते हैं। इनमें उम्र की ज्यादा सख्त जांच, बच्चों के डेटा की सुरक्षा, नोटिफिकेशन और स्क्रीन टाइम से जुड़े नियंत्रण, लगातार स्क्रॉलिंग जैसे फीचर्स में बदलाव और नाबालिगों के लिए डिफॉल्ट सेफ्टी सेटिंग्स मजबूत करना शामिल हो सकता है।

इसका असर अमेरिका में रहने वाले यूजर्स पर सीधे पड़ सकता है। हालांकि Meta अगर कुछ सुरक्षा बदलाव वैश्विक स्तर पर लागू करता है, तो भारत समेत दूसरे देशों के यूजर्स को भी आगे चलकर इसका असर दिखाई दे सकता है।

सिर्फ Meta ही नहीं दूसरी टेक कंपनियां भी कर रही इस लड़ाई का सामना

सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर Meta अकेली कंपनी नहीं है जिस पर सवाल उठ रहे हैं। TikTok, YouTube और दूसरी टेक कंपनियां भी नाबालिगों की सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और प्लेटफॉर्म डिजाइन से जुड़े मुकदमों का सामना कर रही हैं। Meta के खिलाफ चल रहा यह ट्रायल इसलिए अहम है क्योंकि अदालत का फैसला यह तय करने में मदद कर सकता है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन और उसके संभावित नुकसान के लिए किस हद तक कानूनी रूप से जिम्मेदार मानी जा सकती हैं।

फिलहाल Meta सभी आरोपों से इनकार कर रहा है और उसका कहना है कि कंपनी बच्चों की सुरक्षा के लिए कई उपाय करती है। जून 2026 में अदालत ने Meta की मामले को खारिज करने की कोशिश को अस्वीकार कर दिया था, जिसके बाद यह मुकदमा ट्रायल तक पहुंचा।

अब आने वाले हफ्तों में होने वाली गवाही और अदालत के फैसले पर पूरी टेक इंडस्ट्री का भविष्य निर्भर है। अगर राज्यों के आरोप साबित होते हैं, तो इसका असर सिर्फ Meta के संभावित जुर्माने पर नहीं, बल्कि आने वाले समय में Instagram और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों के लिए कैसे डिजाइन किए जाएंगे, इस पर भी पड़ सकता है।

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