मक्का डिफेंस पैक्ट के बाद तेहरान में मुनीर की एंट्री से बढ़ी हलचल, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दौरा क्यों अहम?
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेहरान पहुंचे हैं, जहां ईरानी अधिकारियों से अहम बातचीत होगी।
Asim Munir Tehran Visit: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर सोमवार को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे। उनके इस दौरे को ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं।
मुनीर ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे। ईरान ने पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को बेहद अच्छा बताते हुए मुनीर के दौरे को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के दायरे में होने वाला दौरा बताया है।
ईरान ने बताया दोनों देशों के रिश्तों का अहम दौर
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मुनीर के तेहरान पहुंचने से पहले कहा कि पाकिस्तान और ईरान के रिश्ते इस समय बेहद अच्छे दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने संबंधों को लगातार मजबूत करना चाहते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी ईरान पहुंचे हैं। पाकिस्तान की सेना ने भी उनके दौरे की पुष्टि की है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दौरा क्यों अहम?
असीम मुनीर का ईरान दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करता रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने असीम मुनीर से फोन पर बातचीत की थी। पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बातचीत में अमेरिका की ओर से पाकिस्तान से ईरान को दोबारा बातचीत की मेज पर लाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की अपील की गई थी। ऐसे में मुनीर का इसके कुछ ही दिनों बाद तेहरान पहुंचना कूटनीतिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत पर भी चर्चा संभव
मुनीर के ईरान में उन लोगों से मुलाकात करने की संभावना है, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। पाकिस्तान पहले भी दोनों देशों के बीच संपर्क स्थापित कराने में भूमिका निभा चुका है। हालांकि, पहले की मध्यस्थता से किसी स्थायी समझौते का रास्ता नहीं निकल पाया था। इसके बावजूद पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रखने की कोशिश कर रहा है।
सऊदी अरब और हूती हमलों का मुद्दा भी अहम
मुनीर के तेहरान दौरे में सिर्फ अमेरिका-ईरान तनाव ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है। ईरान समर्थित हूती लड़ाकों की ओर से सऊदी अरब को निशाना बनाए जाने के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते हैं। ऐसे में पाकिस्तान के लिए एक तरफ ईरान के साथ संबंध बनाए रखना और दूसरी तरफ सऊदी अरब के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत रखना बड़ी कूटनीतिक चुनौती है।
मक्का डिफेंस समझौते के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
मुनीर का ईरान दौरा उस समय भी हो रहा है जब पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। समझौते में रक्षा सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने की बात कही गई है।
हालांकि, समझौते के कुछ ही दिनों बाद सऊदी अरब में हूती ड्रोन हमले ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हमले के बाद तुर्किये या पाकिस्तान की ओर से तत्काल किसी सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने समझौते की सामूहिक रक्षा व्यवस्था की तुलना नाटो के अनुच्छेद 5 से की थी, लेकिन साथ ही कहा था कि हमले की स्थिति में सदस्य देश पहले सहायता के स्वरूप और स्तर पर चर्चा करेंगे।
पाकिस्तान के लिए संतुलन साधना बड़ी चुनौती
असीम मुनीर के दौरे की सबसे बड़ी खासियत पाकिस्तान की बदलती कूटनीतिक भूमिका है। पाकिस्तान के एक ओर सऊदी अरब और तुर्किये के साथ रणनीतिक रिश्ते हैं, तो दूसरी ओर पड़ोसी ईरान के साथ उसके लंबे समय से संबंध हैं। इसके अलावा अमेरिका भी पाकिस्तान से ईरान को लेकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की उम्मीद कर रहा है। ऐसे में इस्लामाबाद को तीनों दिशाओं में संतुलन बनाना होगा।