सरहद पार से आईं 150 दुल्हनें! ऑपरेशन सिंदूर के बाद अटकी शादियों में फिर बजी शहनाई, ऐसे हुआ पाकिस्तान से भारत का रास्ता साफ

सरहद पार से आईं 150 दुल्हनें! ऑपरेशन सिंदूर के बाद अटकी शादियों में फिर बजी शहनाई, ऐसे हुआ पाकिस्तान से भारत का रास्ता साफ

Update:2026-08-24 19:06 IST

Pakistani Brides India: कभी शादी की तैयारियां थीं, घरों में मेहमानों के आने का इंतजार था और नई जिंदगी के सपने सजाए जा रहे थे। लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद वीजा और सीमा मार्गों पर लगी पाबंदियों ने कई परिवारों की खुशियों पर ब्रेक लगा दिया। खासकर पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आने वाली उन युवतियों की शादियां अटक गईं, जिनकी शादी भारतीय युवकों से तय हो चुकी थी।

अब लंबे इंतजार के बाद कम से कम 150 पाकिस्तानी दुल्हनों और उनके परिवारों को भारत आने की अनुमति मिल गई है। ये महिलाएं अलग-अलग ट्रांजिट रूट के जरिए भारत पहुंची हैं और अब अपने होने वाले पतियों के साथ नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी में हैं।

सालों पुरानी परंपरा पर लगा था ब्रेक

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहने वाले कई सिंधी परिवारों के लिए भारत आकर शादी करना कोई नई बात नहीं है। वर्षों से ऐसे परिवार वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत आते रहे हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के साथ भारत ने अटारी मार्ग से आने वाले लोगों के वीजा पर रोक लगा दी। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ा, जिनकी बेटियों की शादी भारत में तय हो चुकी थी।

सिंधी समुदाय से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता राजेश झांबिया के मुताबिक, कई परिवार शादी की तारीख तय होने के बावजूद भारत नहीं आ पा रहे थे। उनके सामने एक तरफ रिश्ते को आगे बढ़ाने की चिंता थी तो दूसरी तरफ सीमा पार करने का रास्ता बंद हो गया था।

फिर शुरू हुई उम्मीद की तलाश

जब वीजा और अटारी मार्ग से आने का रास्ता बंद हुआ तो समुदाय के लोगों ने मदद की कोशिश शुरू की। इसी दौरान पाकिस्तान के सिंध प्रांत स्थित शदानी दरबार के आध्यात्मिक प्रमुख और रायपुर निवासी संत युधिष्ठिरलाल शदानी से संपर्क किया गया। उन्होंने उन पाकिस्तानी महिलाओं की सूची तैयार करवाने में मदद की, जिनकी शादी भारतीय युवकों से तय हो चुकी थी।

झांबिया के मुताबिक, इस सूची में करीब 150 दुल्हनें थीं। इनकी शादी नागपुर, रायपुर, जोधपुर, पुणे और देश के दूसरे शहरों में होनी थी। इसके बाद मंदिर की ओर से यह सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई और इन परिवारों के लिए भारत आने की अनुमति देने की अपील की गई।

बॉर्डर नहीं, अब हवाई रास्ते से भारत आईं दुल्हनें

मामले में राहत तब मिली जब गृह मंत्रालय ने इन दुल्हनों और उनके परिवारों को भारत आने की अनुमति दे दी। हालांकि, उन्हें सीधे अटारी बॉर्डर से आने की इजाजत नहीं थी।

इसके लिए उन्हें दूसरे देशों के रास्ते हवाई यात्रा करनी पड़ी। राजेश झांबिया के अनुसार, अप्रैल से अब तक करीब 150 दुल्हनें और उनके परिवार दुबई, ओमान, श्रीलंका, बांग्लादेश और दूसरे ट्रांजिट देशों के रास्ते भारत पहुंच चुके हैं। इनमें नागपुर से जुड़े करीब 15 मामले भी बताए गए हैं।

अभी करीब 300 और दुल्हनों को इंतजार

हालांकि कहानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। झांबिया के मुताबिक पाकिस्तान में करीब 300 और महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी शादी भारत में तय हो चुकी है और वे वीजा मिलने का इंतजार कर रही हैं। समुदाय ने केंद्र सरकार से इन महिलाओं और उनके परिवारों को भी भारत आने की अनुमति देने की अपील की है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में आई तल्खी के बीच इन परिवारों के लिए सरकार की ओर से दी गई यह अनुमति एक बड़ी राहत बनकर सामने आई है। सीमा पर भले ही सख्ती हो, लेकिन इन परिवारों के लिए अब उम्मीद की एक नई राह खुली है, जहां इंतजार के बाद फिर से शहनाई बजने और नई जिंदगी शुरू होने की तैयारी है।

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