PoK में मुनीर सेना का खूनी खेल! मस्जिद में घुसकर इमाम को दी ऐसी दर्दनाक मौत...कांप गई रूह
Pakistan Army Killed Imam: पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में कथित सैन्य कार्रवाई के बीच एक मस्जिद में इमाम की मौत और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों ने तनाव बढ़ा दिया है। मीरपुर और भिंबर में विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट बंदी और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर कई दावे सामने आए हैं।
Pakistan Army Killed Imam: पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से दिल दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। वहां की अवाम की सुरक्षा के नाम पर तैनात पाकिस्तानी सेना का खौफनाक और बर्बर चेहरा पूरी दुनिया के सामने आ चुका है। थल सेनाध्यक्ष जनरल आसिम मुनीर के इशारे पर काम कर रहे पाकिस्तानी सुरक्षा बल अब नागरिकों की ढाल बनने के बजाय उनके भक्षक बन चुके हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर सीधी गोलियां चलाई जा रही हैं और गलियों में खून बह रहा है। अपनी बर्बरता की सीमा पार करते हुए अब इन सुरक्षा बलों ने धार्मिक स्थलों और मस्जिदों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
मस्जिद पर अवैध कब्जा और इमाम की निर्मम हत्या
पाकिस्तानी सेना के हैवानियत भरे कारनामों की सबसे डरावनी तस्वीर भिंबर और मीरपुर जिलों से सामने आई है। भिंबर के एक स्थानीय इमाम के अनुसार, हथियारों से लैस पाकिस्तानी फौजी जबरन मस्जिद परिसर में घुस आए और उस पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। वहीं, मीरपुर शहर में इससे भी ज्यादा दर्दनाक वाकया सामने आया है। जब सेना के जवान जबरन पवित्र मस्जिद के भीतर दाखिल हो रहे थे, तब वहां मौजूद इमाम ने हिंसा रोकने के लिए उन्हें रोकने की कोशिश की। इस बात से बौखलाए मुनीर आर्मी के जवानों ने इमाम को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। मस्जिद के भीतर ही इमाम को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
अवामी एक्शन कमेटी का फूटा गुस्सा
इस जघन्य वारदात के बाद पूरे PoK में स्थानीय नागरिकों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन के नेताओं का कहना है कि पाकिस्तानी हुकूमत और उसकी सेना अपने ही नागरिकों की जायज मांगों और आवाज को दबाने के लिए लगातार हिंसक रास्ते अपना रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चाहे सेना कितने ही जुल्म ढा ले, लेकिन अपने अधिकारों और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उनका संघर्ष कभी खत्म नहीं होगा।
इंटरनेट ब्लैकआउट और पूरे PoK में कम्युनिकेशन ठप
मीरपुर और आसपास के पूरे इलाके में पाकिस्तानी प्रशासन ने दमनकारी नीतियां अपनाते हुए सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। सेना की बर्बरता की खबरें बाहर न आ सकें, इसलिए पूरे क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस डिजिटल ब्लैकआउट के कारण आम जनता का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं और भारी संकट के दौर से गुजर रहे हैं।
इंटरनेट बंद होने से खड़ी हुईं 3 बड़ी समस्याएं
अपनों से पूरी तरह संपर्क टूटा: मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बंद होने से लोग दूर रहने वाले अपने परिजनों और रिश्तेदारों का कुशलक्षेम नहीं जान पा रहे हैं।
मेडिकल इमरजेंसी में मदद मिलना मुश्किल: किसी के अचानक बीमार पड़ने या गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर लोग एम्बुलेंस या डॉक्टरों से संपर्क नहीं साध पा रहे हैं।
सेंसरशिप और अफवाहों का बाजार गर्म: मीडिया पर कड़े प्रतिबंध और इंटरनेट ब्लैकआउट के चलते वास्तविक खबरें बाहर नहीं आ पा रही हैं, जिससे नागरिकों के बीच डर और अफवाहों का माहौल बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की खामोशी पर उठे सवाल
PoK में मानवाधिकारों के लगातार हो रहे हनन और आम नागरिकों पर ढाए जा रहे जुल्म ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना ने निर्दोषों का नरसंहार करने के लिए पूरे इलाके को जेल में तब्दील कर दिया है। धार्मिक स्थलों का अपमान और इमाम की हत्या के बाद अब यह जनआंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।