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असम विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2021: BJP की प्रचंड वापसी, कांग्रेस का हुआ बुरा हाल

जेपी नड्डा ने कहा कि पांच साल पहले असम में कई तरह चुनौतियां थीं, जिनका सामना एनडीए की सरकार ने किया है।

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NewstrackNewstrack Network NewstrackChitra SinghPublished By Chitra Singh

Published on 2 May 2021 4:54 AM GMT

असम विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2021: BJP की प्रचंड वापसी, कांग्रेस का हुआ बुरा हाल
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असम विधानसभा चुनाव परिणाम 2021 (फाइल फोटो- सोशल मीडिया)

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Assam Assembly Elections 2021: असम में तमाम ओपिनियन पोल को झुठलाते हुए भाजपा जिस तरह से शुरुआती रुझान में ही अपनी अजेय बढ़ाती नजर आ रही है उसने कांग्रेस गठबंधन की संभावनाओं को धूल धूसरित कर दिया है। ऐसे में भाजपा या कांग्रेस की संभावनाओं को विराम लग गया है और भाजपा का डंका बज उठा है। निसंदेह ये भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की बड़ी कामयाबी है।

असम में भाजपा ने पूरा जोर लगा दिया था ओपिनियन पोल में भी उसका वोट प्रतिशत बढ़ने के दावे किये गए थे। पिछली बार राज्य में एनडीए को 41 फीसद वोट मिले थे वहीं इस बार उसका वोट शेयर बढ़कर 45 फीसद होने का अनुमान लगाया गया था मतगणना के ताजा ट्रेंड बता रहे हैं ये आकलन गलत नहीं था।

उधर कहा ये जा रहा था कि राज्य में भाजपा से सत्ता छीनने के कांग्रेस ने इस बार पूरा जोर लगाया है और इस कोशिश को पुख्ता करने के लिए एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन किया। लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की लचर शैली और चुनाव पर पूरी तरह फोकस न करने और सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने में चूकने से उसके पास सिवाय अफसोस करने के कोई लाभ नहीं दिख रहा है।

कांग्रेस का 'पांच गारंटी' प्रचार

राज्य में कांग्रेस का पूरा प्रचार 'पांच गारंटी' के इर्द गिर्द रहा। पार्टी ने जनता को गारंटी दी कि सत्ता में आने पर मुफ्त बिजली, महिला पेंशन और रोजगार की दिशा में काम करेंगे। मुफ्त बिजली का वादा तो दिल्ली की केजरीवाल सरकार से कॉपी किया था लेकिन मतगणना के ट्रेंड बता रहे हैं जनता को कांग्रेस पर उतना भरोसा नहीं हुआ।

वर्तमान ट्रेंड में कांग्रेस की उम्मीद नाउम्मीद में बदलती दिख रही है कि मतदाता तीस लाख नौकरी और गृहणी सम्मान निधि के वादे पर भरोसा करके इसे चुनावी जीत का औजार साबित कर देगी। कांग्रेस ने तो अपने वादे पर यकीन दिलाने के लिए सरकारी नौकरी वेबसाइट भी बना दी थी।

कांग्रेस (फाइल फोटो- सोशल मीडिया)

जबकि असम में पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की 15 सालों की तरुण गोगोई सरकार को भाजपा ने पराजित किया था और सर्वानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने थे। पिछले पांच साल में भाजपा ने राज्य में हुए सभी चुनाव जीते थे इसलिए पार्टी आश्वस्त थी कि सर्वानंद सोनोवाल द्वारा किये गए विकास कार्यों के लिए मतदाता भाजपा को एक मौका और देंगी। मतगणना के ट्रेंड बता रहे हैं कि भाजपा का आकलन सही था।

भाजपा ने युवाओं से किया था नौकरी देने का वादा

भाजपा ने अपने घोषणापत्र में दो लाख युवाओं को सरकारी और आठ लाख युवाओं को निजी क्षेत्रों में नौकरी देने का वादा किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत एनआरसी को लागू करने का वादा भी किया था।

विकास की ओर अग्रसर असम

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का भी गणित यही था कि असम में भाजपा शासित सरकार आ रही है और इसके बाद घुसपैठियों को बाहर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एनआरसी लागू किया जाएगा। साथ ही राज्य में उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। जेपी नड्डा ने कहा कि पांच साल पहले असम में कई तरह चुनौतियां थीं, जिनका सामना एनडीए की सरकार ने किया है। एनडीए ने समस्याओं का निराकरण कर के असम को विकास की ओर अग्रसर किया है। और इसका लाभ भाजपा को अवश्य मिलेगा।

Chitra Singh

Chitra Singh

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