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Aaj Surya Grahan: सूर्य ग्रहण के दिन 148 साल बाद बन रहा ऐसा दुर्लभ संयोग, जानिए इसके बारे में सबकुछ

Aaj Surya Grahan: साल 2021 (Year 2021) का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून यानी आज लगेगा।

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Published on 9 Jun 2021 6:58 PM GMT

Surya Grahan
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सूर्य ग्रहण(फाइल फोटो: सोशल मीडिया)

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Aaj Surya Grahan, Solar Eclipse 2021 Date and Time in India: साल 2021 (Year 2021) का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून यानी आज लगेगा। जा रहा है जो एक सूर्य ग्रहण होगा। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है, लेकिन खगोलीय घटना को देखने के लिए हर कोई बेताब रहता है। आज सूर्य ग्रहण के दिन शनि देव की जयंती भी है। इसलिए सूर्यग्रहण पर शनिदेव का भी अद्भुत संयोग नजर आएगा।

यह सूर्य ग्रहण वलयाकार (Ring of Fire Eclipse) होगा जिसमें चंद्रमा सूर्य को ऐसे ढक लेता है जिसके चलते सूर्य का बाहरी हिस्सा प्रकाशमान रहता हैऔर बीच का हिस्सा पूरा ढक जाएगा। ऐसे सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह दिखेगा। जानें इस अद्भुत सूर्य ग्रहण के बारे में सबकुछ...

148 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग

आज 148 साल बाद शनि जयंती व सूर्यग्रहण का अद्भुत संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषियों के मुताबिक, 148 साल बाद पहला मौका है जब शनि जयंती के दिन सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। आज के दिन सूर्य ग्रहण (Aaj Surya Grahan) का अद्भुत योग भी बन रहा है। लेकिन चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) के जैसे ही यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। शनि देव के पिता सूर्य हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, पिता-पुत्रा में मतभेद और अलगाव रहा है।
धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को शनिदेव का जन्म हुआ था। हर साल इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन विधि-विधान से शनि देव की लोग पूजा करते हैं। सूर्यग्रहण और शनि जयंती एक दिन होने के साथ ही आज शनिदेव मकर राशि में वक्री रहेंगे। एक तरफ पिता सूर्यदेव ग्रहण के साए में होंगे जबिक पुत्र शनि की जयंती मनाई जाएगी। इससे पहले 26 मई 1873 को सूर्यग्रहण और शनि जयंती एक दिन थी।

सूर्य ग्रहण (फाइल फोटो: सोशल मीडिया)


कहां और कब लगेगा सूर्य ग्रहण? (Solar Eclipse 2021 Date and Time)

साल के पहले सूर्य ग्रहण की शुरुआत गुरुवार यानी 10 जून को दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से शुरुआत होगी और शाम 6 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगा। यह सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) उत्तरी अमेरिका ( North America) के उत्तरी भाग (North Area) में, उत्तरी कनाडा (North Canada), यूरोप (Europe) और एशिया (Asia) में, ग्रीनलैंड (Greenland ) और रुस (Russia) के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। कनाडा, ग्रीनलैंड तथा रूस में वलयाकार (Ring of Fire Eclipse) सूर्य ग्रहण नजर आएगा जबकि उत्तर अमेरिका के ज्यादातक इलाकों में, यूरोप और उत्तर एशिया में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा।

भारत में कहां दिखेगा आंशिक सूर्य ग्रहण ( Surya Grahan in India)

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मैप के मुताबिक, सूर्य ग्रहण (Aaj Surya Grahan) अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में नजर आएगा। आज यह सूर्य ग्रहण आंशिक दिखेगा। ग्रहण की शुरुआत 12:25 बजे होगी जो 12:51 पर खत्म हो जाएगा।

सूर्य ग्रहण (फाइल फोटो: सोशल मीडिया)

भारत में रहेगा सूतक काल? ( Sutak kaal in India)
भारत में साल के लग रहे पहले सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) का सूतक काल (Sutak Kal) नहीं रहेगा। ज्योतिष के मुताबिक, उसी सूर्य ग्रहण का सूतक काल माना जाता है जो ग्रहण अपने यहां दृष्टिगोचर हो यानी दिखाई दे। भारत में सूर्य ग्रहण नहीं नजर आएगा।

वलयाकार सूर्य ग्रहण किसे कहते हैं? (Ring of Fire Eclipse)

वलयाकार सूर्य ग्रहण को रिंग ऑफ फायर (Ring of Fire Eclipse) कहते हैं। इस दौरान सूर्य एक आग की अंगूठी की जैसे दिखता है। यह नजारा कुछ ही समय दिखाई देता है। यह ग्रहण उस समय होता जब चंद्रमा सूर्य को अपनी छाया से नहीं ढक पाता है ऐसे में सूर्य का बाहरी भाग प्रकामान रहता है। इसे ही वलयाकार सूर्य ग्रहण (Ring of Fire Eclipse) कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण (फाइल फोटो: सोशल मीडिया)

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें क्या ना करें
सूर्य ग्रहण के दौरान नए व मांगलिक कार्य की शुरुआत नहीं की जाती है। ग्रहण के दौरान भोजन ना बनाना और ना खाना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान भगवान की मूर्ति को स्पर्श करना और पूजा करना दोनों मना है। तुलसी के पौधे को भी छूना नहीं चाहिए। इस दौरान कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय सोना भी नहीं चाहिए।

सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक कारण

सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्थित है। सभी ग्रह सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाते रहते हैं। सूर्य का चक्कर लागने वाले ग्रह उपग्रह भी हैं। जो ग्रहों के चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा है। चक्कर लगाने के दौरान चंद्रमा जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक देता है। ऐसी स्थिति को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।


Dharmendra Singh

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