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Baglamukhi Jayanti 2025: अलौकिक शक्ति की देवी बगलामुखी की पूजा से मिलेगा अद्भुत लाभ, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Baglamukhi Jayanti 2025: वैशाख शुक्ल अष्टमी को देवी बगलामुखी का अवतरण दिवस कहा जाता है जिस कारण इसे मां बगलामुखी जयंती के रूप में मनाया जाता है, जानते है इस साल कब है बगलामुखी जयंती
Baglamukhi Jayanti 2025 बगलामुखी जयंती 2025 कब है?: बगलामुखी जयंती हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह वह शुभ दिन है जब मां बगलामुखी ने अवतार लिया था। वर्ष 2025 में यह तिथि 16 मई, शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन माता की आराधना करने से शत्रुओं पर विजय, कानूनी मामलों में सफलता और जीवन की बाधाओं का नाश होता है।
मां बगलामुखी का स्वरूप और महत्व
मां बगलामुखी को शक्ति और विजय की देवी माना जाता है। उनका स्वरूप अद्भुत तेजस्वी और पीले रंग की आभा से युक्त है। इसलिए इन्हें पीतांबरा देवी भी कहा जाता है। उनका स्वरूप इस प्रकार है:
रथ: देवी स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होती हैं।
वस्त्र और आभूषण: वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और सोने के आभूषणों से सुसज्जित रहती हैं।
अस्त्र: एक हाथ में गदा होती है, जिससे वे शत्रुओं का नाश करती हैं, और दूसरे हाथ से वे दुश्मनों की जीभ पकड़कर उन्हें वाणी एवं कर्म से रोकती हैं।
महाविद्या में स्थान: दस महाविद्याओं में मां बगलामुखी का आठवां स्थान है।
तंत्र शक्ति: बगलामुखी साधना से कुंडलिनी जागरण होता है और व्यक्ति को अपार आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
बगलामुखी जयंती 2025 का शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 मई 2025, दोपहर 02:30 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 16 मई 2025, दोपहर 12:45 बजे
पूजा का उत्तम मुहूर्त:
सुबह 04:00 AM से 05:30 AM
दोपहर 12:00 PM से 01:15 PM
इस दिन पुष्य और अश्लेषा नक्षत्र रहेगा, जो इस पूजा को और अधिक शुभ बनाता है।
बगलामुखी जयंती पर पूजा-विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें।देवी बगलामुखी की प्रतिमा को पीले वस्त्र और पीले फूलों से सजाएं। सिहांसन पर विराजमान देवी का ध्यान करें।
मंत्र जाप:
बीज मंत्र: “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।”
इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
देवी को पीले फूल (गेंदे), हल्दी, चने की दाल, पीले वस्त्र, बेसन के लड्डू आदि अर्पित करें।केसर मिश्रित दूध का भोग लगाएं।मंत्रों के साथ हल्दी, चावल, पीले सरसों के दाने से हवन करें।पूजा के बाद गरीबों को पीले वस्त्र, हल्दी, चना, केसर, मिठाई आदि का दान करें।इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं और रात्रि में फलाहार करते हैं। अगले दिन पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
बगलामुखी जयंती की पौराणिक कथा
प्राचीन कथा के अनुसार, सतयुग में एक भयंकर तूफान आया जिसने संपूर्ण सृष्टि को नष्ट करने का संकट खड़ा कर दिया। भगवान विष्णु इस संकट को रोकने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने हरिद्रा सरोवर के तट पर कठोर तप किया। उनकी साधना से देवी आदिशक्ति प्रसन्न हुईं और उनके हृदय से पीतांबरा स्वरूपिणी मां बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने अपने शक्तिशाली मंत्रों और दिव्य शक्ति से तूफान को रोक दिया और संसार को विनाश से बचाया।इस घटना के बाद मां बगलामुखी को विजय, स्तम्भन (दुष्टों को रोकने), और रक्षा की देवी के रूप में पूजा जाने लगा।
बगलामुखी जयंती का आध्यात्मिक लाभ
शत्रु बाधा से मुक्ति: यदि कोई शत्रु परेशान कर रहा हो तो मां बगलामुखी की पूजा करने से रक्षा कवच प्राप्त होता है।
कानूनी मामलों में सफलता: मुकदमेबाजी, कोर्ट केस में विजय प्राप्ति के लिए मां की उपासना विशेष लाभकारी होती है।
वाणी पर नियंत्रण: अगर वाणी में संयम नहीं है या विवादों में फंस जाते हैं तो मां की आराधना से वाणी में मधुरता और शक्ति आती है।
आर्थिक समृद्धि: व्यापार, धन-संपत्ति में वृद्धि और कर्ज से मुक्ति के लिए यह पूजा उत्तम मानी गई है।
तांत्रिक सिद्धि: बगलामुखी साधना तांत्रिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह नकारात्मक शक्तियों को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
इस दिन मां बगलामुखी की आराधना से जीवन की सभी बाधाओं का नाश, शत्रुओं पर विजय, न्यायालय में सफलता और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। भक्तों को इस दिन स्नान, पूजा, हवन, व्रत और दान करना चाहिए ताकि मां की कृपा प्राप्त हो सके।