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Chaitra Navratri 2025 Fourth Day: मां कूष्मांडा का स्वरूप और उनकी दिव्य शक्ति की आराधना से मिलती है दुखों से मुक्ति, जानिए कैसे

Chaitra Navratri 2025 Fourth Day: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन जानिए मां दुर्गा के किस रूप की पूजा करते हैं, जानते है इनकी महिमा

Suman  Mishra
Published on: 1 April 2025 4:23 PM IST (Updated on: 1 April 2025 4:24 PM IST)
Chaitra Navratri 2025 Fourth Day Maa Kushmanda Puja
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Chaitra Navratri 2025 Fourth Day Maa Kushmanda Puja

Chaitra Navratri 2025 Fourth day: चैत्र नवरात्रि 2025 का चौथा दिन देवी दुर्गा के कूष्मांडा रूप को समर्पित है। इस दिन विशेष रूप से आध्यात्मिक शक्ति और समृद्धि प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मां कूष्मांडा को सृष्टि की आदिशक्ति कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने दिव्य हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी।

मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व

मां कूष्मांडा की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, बुद्धि, समृद्धि और शक्ति प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि देवी की कृपा से मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है। वे रोगों और कष्टों से मुक्ति प्रदान करती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

चैत्र नवरात्रि 2025 में मां कूष्मांडा की पूजा विधि

इस दिन प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और मां कूष्मांडा की आराधना का संकल्प लें।कलश स्थापना: पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और उसमें जल, सुपारी, अक्षत, पंचरत्न और एक सिक्का डालें। देवी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें और कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप, गंध और नैवेद्य अर्पित करें।

मंत्र जाप:

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

यह मंत्र कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

भोग अर्पण: मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग विशेष रूप से प्रिय है। इसे प्रसाद रूप में अर्पित करें और बाद में ब्राह्मणों को वितरित करें।

आरती और प्रार्थना: माता की आरती करें और उनके चरणों में अपनी समस्त मनोकामनाएं अर्पित करें।

ध्यान एवं साधना: कुछ समय के लिए मां कूष्मांडा का ध्यान करें और उनके आशीर्वाद की प्रार्थना करें।

मां कूष्मांडा के प्रमुख मंत्र और उनकी शक्ति

रोगों से मुक्ति के लिए मंत्र:दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

बुद्धि और विद्या प्राप्ति के लिए मंत्र:'या देवी सर्वभूतेषु बिद्धि-रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥'

सुख-शांति और समृद्धि के लिए मंत्र:या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कूष्मांडा की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था और सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें 'आदि शक्ति' कहा जाता है। वे अष्टभुजा धारी हैं और अपने हाथों में कमल, धनुष, बाण, अमृतकलश, चक्र और गदा धारण करती हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक एवं सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। यह दिन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और आत्मबल प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से माता की पूजा करता है, उसे समस्त प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है और वह सुख-समृद्धि की ओर अग्रसर होता है।

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